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बहलोलपुर गांव : 30 सालों से न एक तहरीर न मुकदमा
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अमरोहा। जरा सी बात पर लोग एक दूसरे का खून बहाने से नहीं चूकते हैं। मनमुटाव और द्वेष भावना इसका बड़ा कारण है। लेकिन अमरोहा जिले का एक ऐसा गांव जो आपसी सौहार्द और भाईचारे की अनूठी मिसाल है। यहां बीते 30 सालों से कोई ऐसा विवाद नहीं हुआ। जिससे ग्रामीणों को थाने जाना पड़ा हो। लोग आपसी मतभेदों को सुलह समझौते से ही निपटा लेते हैं। हिंदू-मुस्लिम और उनकी कई बिरादरियां सालों से एक दूसरे के साथ खड़े रहते हैं। जी हां हम बात कर रहे हैं गांव बहलोलपुर की।
जिला मुख्यालय से तकरीबन 18 किलोमीटर दूर स्थित बहलोलपुर सदर तहसील का गांव है। जो देहात थाना क्षेत्र में पड़ता है। इसे अमरोहा ब्लाक की सिहाली नारायण ग्राम पंचायत का मझरा भी कहा जाता है। गांव की आबादी तकरीबन बारह सौ है। यहां गुर्जर, पाल, जोगी और मुस्लिम वर्ग के लोग रहते हैं। मिश्रित आबादी का यह गांव वासियों के लिए प्रेरणा से कम नहीं है। क्योंकि गांव का तीस सालों से कोई भी मामला थाने नहीं पहुंचा। छोटे मोटे विवादों को ग्रामीण आपसी सुलह से निपटा लेते हैं। यह गांव उनके लिए प्रेरणा स्रोत है जो मामूली विवाद में एक दूसरे के खून के प्यासे हो जाते हैं।
बुजुर्गों के साथ युवा भी संभालते हैं जिम्मेदारी
गांव में विवाद न हो इसकी जिम्मेदारी बुजुर्ग ही नहीं युवाओं पर भी है। वजह, युवा वर्ग कई बार छोटी-छोटी बात पर लड़ झगड़ जाते हैं, लेकिन यहां के युवा भाईचारे पर विश्वास रखते हैं। साथ ही बुजुर्गाें द्वारा बनाए गए नियमों का पालन करते हैं। इसमें हिंदू ही नहीं मुस्लिम वर्ग के युवा भी इस मार्ग पर चल रहे हैं। जो गांव में अमन और शांति बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। वहीं, किसी के बीच कोई विवाद होता भी है तो उसे गांव में निपटा लिया जाता है।
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हमारे गांव में लोग प्रेम और सादगी से रहते हैं। विवाद से कुछ हासिल नहीं होता है। सभी काम काज में व्यस्त रहते हैं। गांव में विवाद न हो इसकी जिम्मेदारी किसी एक पर नहीं बल्कि पूरे गांव पर रहती है। जिसे सभी बखूबी निभाते हैं। बुजुर्ग रघुनाथ सिंह।
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पहली बात तो यह है कि गांव में विवाद की नौबत ही नहीं आती है। यदि किसी के बीच मतभेद होने पर कहासुनी होती है तो आपस में निपटा लिया जाता है, लेकिन थाने जाने नहीं जाने दिया जाता है। कोर्ट कचहरी तो दूरी की बात है। सुरेंद्र सिंह।
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गांव में हिंदू मुस्लिम दोनों वर्ग के लोग परिवार के तरह रहते हैं। किसी के साथ कोई परेशानी होती है तो एक दूसरे के साथ खड़े रहते हैं। इस स्थिति में मारपीट या झगड़े की नौबत ही नहीं आती है। ऐसे थाना या कोर्ट कचहरी तो बहुत दूर की बात है। जुम्मा खान
हमारा गांव बहुत ही शांति प्रिय है। यहां राजनीति भी किसी पर हावी नहीं रहती है। यह वजह है कि गांव में कोई विवाद नहीं होता है। यह सभी के लिए बहुत गर्व की बात है। जोकि गांव में आज तक भी राम राज कायम है। थाने तक पहुंचने की नौबत ही नहीं आती है। नौनिहाल सिंह, ग्राम प्रधान।
30 वर्षों से गांव का कोई भी मामला थाने में दर्ज नहीं होना हैरत करने वाला है। जबकि, गांव में कई बिरादरी के लोग रहते हैं। गांव को विवादों से बचाकर रखने के लिए ग्रामीण वाकई काबिले तारीफ हैं। बहलोलपुर के लोगों से दूसरे गांवों को भी प्रेरणा लेनी चाहिए। ग्रामीणों के आपसी प्रेम को देखकर अन्य गांव के लोगों को भी इसके आगे आना चाहिए।
- कुंवर अनुपम सिंह, एसपी, अमरोहा।
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जिला मुख्यालय से तकरीबन 18 किलोमीटर दूर स्थित बहलोलपुर सदर तहसील का गांव है। जो देहात थाना क्षेत्र में पड़ता है। इसे अमरोहा ब्लाक की सिहाली नारायण ग्राम पंचायत का मझरा भी कहा जाता है। गांव की आबादी तकरीबन बारह सौ है। यहां गुर्जर, पाल, जोगी और मुस्लिम वर्ग के लोग रहते हैं। मिश्रित आबादी का यह गांव वासियों के लिए प्रेरणा से कम नहीं है। क्योंकि गांव का तीस सालों से कोई भी मामला थाने नहीं पहुंचा। छोटे मोटे विवादों को ग्रामीण आपसी सुलह से निपटा लेते हैं। यह गांव उनके लिए प्रेरणा स्रोत है जो मामूली विवाद में एक दूसरे के खून के प्यासे हो जाते हैं।
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बुजुर्गों के साथ युवा भी संभालते हैं जिम्मेदारी
गांव में विवाद न हो इसकी जिम्मेदारी बुजुर्ग ही नहीं युवाओं पर भी है। वजह, युवा वर्ग कई बार छोटी-छोटी बात पर लड़ झगड़ जाते हैं, लेकिन यहां के युवा भाईचारे पर विश्वास रखते हैं। साथ ही बुजुर्गाें द्वारा बनाए गए नियमों का पालन करते हैं। इसमें हिंदू ही नहीं मुस्लिम वर्ग के युवा भी इस मार्ग पर चल रहे हैं। जो गांव में अमन और शांति बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। वहीं, किसी के बीच कोई विवाद होता भी है तो उसे गांव में निपटा लिया जाता है।
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हमारे गांव में लोग प्रेम और सादगी से रहते हैं। विवाद से कुछ हासिल नहीं होता है। सभी काम काज में व्यस्त रहते हैं। गांव में विवाद न हो इसकी जिम्मेदारी किसी एक पर नहीं बल्कि पूरे गांव पर रहती है। जिसे सभी बखूबी निभाते हैं। बुजुर्ग रघुनाथ सिंह।
पहली बात तो यह है कि गांव में विवाद की नौबत ही नहीं आती है। यदि किसी के बीच मतभेद होने पर कहासुनी होती है तो आपस में निपटा लिया जाता है, लेकिन थाने जाने नहीं जाने दिया जाता है। कोर्ट कचहरी तो दूरी की बात है। सुरेंद्र सिंह।
गांव में हिंदू मुस्लिम दोनों वर्ग के लोग परिवार के तरह रहते हैं। किसी के साथ कोई परेशानी होती है तो एक दूसरे के साथ खड़े रहते हैं। इस स्थिति में मारपीट या झगड़े की नौबत ही नहीं आती है। ऐसे थाना या कोर्ट कचहरी तो बहुत दूर की बात है। जुम्मा खान
हमारा गांव बहुत ही शांति प्रिय है। यहां राजनीति भी किसी पर हावी नहीं रहती है। यह वजह है कि गांव में कोई विवाद नहीं होता है। यह सभी के लिए बहुत गर्व की बात है। जोकि गांव में आज तक भी राम राज कायम है। थाने तक पहुंचने की नौबत ही नहीं आती है। नौनिहाल सिंह, ग्राम प्रधान।
30 वर्षों से गांव का कोई भी मामला थाने में दर्ज नहीं होना हैरत करने वाला है। जबकि, गांव में कई बिरादरी के लोग रहते हैं। गांव को विवादों से बचाकर रखने के लिए ग्रामीण वाकई काबिले तारीफ हैं। बहलोलपुर के लोगों से दूसरे गांवों को भी प्रेरणा लेनी चाहिए। ग्रामीणों के आपसी प्रेम को देखकर अन्य गांव के लोगों को भी इसके आगे आना चाहिए।
- कुंवर अनुपम सिंह, एसपी, अमरोहा।