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Amroha News: 15 हजार में होती थी फर्जी नाम-पते वाली एक एंबुलेंस की फिटनेस

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Thu, 14 Mar 2024 02:05 AM IST
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An ambulance with fake name and address was fitted for Rs 15 thousand
अमरोहा। दो फर्मों के फर्जी नाम-पते पर रजिस्टर्ड 700 एम्बुलेंस की फिटनेस करने के नाम पर भी बड़ा खेल हुआ है। हर साल एंबुलेंस की फिटनेस होती रही और विभाग आंख मूंद कर बैठा रहा। एंबुलेंस की फिटनेस पहले स्वास्थ्य विभाग से होती है, इसके बाद एआरटीओ कार्यालय से। सीएमओ कार्यालय में नियुक्त नोडल अधिकारी के पास करने के बाद ही आरटीओ कार्यालय से एंबुलेंस को सड़क पर दौड़ने की अनुमति मिलती है। दो तत्कालीन एआरटीओ पर कार्रवाई के बाद सीएमओ कार्यालय में भी खलबली मची हुई है।
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चर्चा है कि फर्जी नाम-पते पर रजिस्टर्ड प्रत्येक एंबुलेंस की फिटनेस के नाम पर तत्कालीन नोडल अधिकारी द्वारा 15 हजार रुपये वसूले जाते थे। इसमें एक दलाल भी शामिल रहे। अगर इस तरफ भी निष्पक्ष जांच हो तो तत्कालीन नोडल अधिकारी पर भी कार्रवाई हो सकती है। उधर, एआरटीओ कार्यालय से फर्म के मालिकों और एंबुलेंस संचालकों को नोटिस देने की कार्रवाई की जा रही है।
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सीएमओ डॉ. एसपी ने बताया कि पूरा प्रकरण उनके सीएमओ बनने से पहले का है। लेकिन, मामले की जांच कराकर संबंधित तत्कालीन नोडल अधिकारी पर विभागीय कार्रवाई कराई जाएगी। वहां के मुख्य चिकित्साधिकारी को पत्र लिखा जाएगा, जहां उनकी तैनात होगी।
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ये है पूरा मामला
सड़क सुरक्षा समिति के सदस्य और सामाजिक कार्यकर्ता अनिल जग्गा ने परिवहन विभाग के अधिकारियों से फर्जी फर्म का गठन कर कूटरचित प्रपत्रों के जरिए 700 एंबुलेंस का पंजीयन करने का आरोप लगाया था। एंबुलेंस के पंजीयन पत्रावली में वाहन के पंजीकृत मालिकों द्वारा कारोबार के स्थान के पते के प्रमाणपत्र के रूप में कागजात लगाए गए, वह कूटरचित हैं। सात सौ से अधिक एंबुलेंस केवल दो फर्जी फर्मों श्री साइन एम्बुलेंस सर्विसेज निकट एआरटीओ ऑफिस अतरासी रोड और गगन त्यागी एम्बुलेंस सर्विस ग्राम तिगरिया खादर गजरौला और करीब सौ एम्बुलेंस इकबाल नगर कस्बा जोया के पते पर पंजीकृत हैं। जबकि हकीकत में उन नाम-पते पर कोई एंबुलेंस सेवा उपलब्ध नहीं है। नाम-पते पूरी तरह फर्जी हैं। इतना ही नहीं इन पतों पर कोई भी एंबुलेंस सर्विस देने वाली संस्था कार्यरत नहीं है। एंबुलेंस के अधिकतर मालिक उत्तर प्रदेश राज्य से बाहर दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा के मूल निवासी हैं। अस्थायी पते के कॉलम में दोनों फर्मों और इकबाल नगर जोया के फर्जी पते दर्ज किए गए थे। परिवहन विभाग के द्वारा प्रकरण में संलिप्त तत्कालीन एआरटीओ दरोगा सिंह और रमाकांत वर्मा के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है। दोनों सेवानिवृत्त हो चुके हैं। इसलिए विभाग ने दोनों की पेंशन से 5 हजार से 5500 रुपये तक की कटौती की है।
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