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अमरोहा: दिल्ली समेत प्रदेश के कई जिलों में वैवाहिक कार्यक्रमों में खुशबू बिखेर रहा अमरोहा का गुलाब
Thu, 09 Feb 2023 01:55 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
Updated Thu, 09 Feb 2023 01:55 AM IST
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अमरोहा। आम और सब्जी के बाद अमरोहा का गुलाब भी अपनी पहचान बनने लगा है। इस समय शादियों का सीजन है। ऐसे में दिल्ली-बरेली सहित प्रदेश के कई जिलों में होने वाली शादी में जयमाला और मंडप में गुलाब अपनी खुशबू बिखेर रहा है। जिले में करीब 70 बीघा में गुलाब की खेती हो रही है।अमरोहा नगर के सटे बंबूगढ़ पंडकी गांव सब्जी की खेती के लिए पहचाना जाता है, लेकिन अब यहां एक-दो नहीं बल्कि 50 किसान गुलाब की खेती कर रहे हैं। करीब एक साल पहले रतनलाल सैनी ने पांच बीघा जमीन में गुलाब की खेती की शुरूआत की थी, लेकिन अब गांव के एकाएक 50 किसान इस खेती से जुड़ चुके हैं। गांव में करीब 70 बीघा जमीन में गुलाब के फूल उगाए जा रहे हैं। किसान गोकल सिंह ने बताया कि ये फसल पूरे साल फूल देती है। एक बार पौधा लगा दिया जाए जो उम्र भर दोबारा लगाने की जरूरत नहीं पड़ती। कहा जाए जो केवल एक बार फसल को पैदा करना है। इसके बाद जमीन की निराई-गुड़ाई के अलावा पौधे की कटिंग करनी पड़ती है। अगर गुलाब की नई फसल लगाई जाए तो एक बीघा क्षेत्रफल में करीब 40 हजार रुपये की लागत आती है। जबकि प्रत्येक महीने दो लाख रुपये के फूल बेचे जाते हैं। इस फसल की निराई-गुड़ाई से लेकर तुड़ाई तक खेत मालिक के अलावा गांव के 100 लोगों को रोजगार मिल रहा है। इसके लिए लोगों को प्रतिदिन तड़के तीन बजे से पांच बजे तक फूल तोड़ने का काम करना पड़ता है। सुबह को दो घंटे काम कर 100 से 125 रुपये तक की आमदनी प्रतिदिन कर लेते हैं। इसके बाद दूसरे काम पर चले जाते हैं। प्रतिदिन बिक्री के लिए छह क्विंटल तक गुलाब मुरादाबाद, बरेली, दिल्ली, बिजनौर के नूरपुर मंडी और जिले की फूलों की दुकानों पर सप्लाई किया जाता है।
किसान दीपक कुमार ने बताया कि फूलों की खेती करने वाले किसानों के पास कम जमीन है। इसके लिए किसान एक बीघा से लेकर पांच बीघा तक गुलाब की खेती कर रहे है। ये फसल सालभर रहती है और लागत के सापेक्ष तीन गुना आमदनी हो रही है। इसमें अच्छा फायदा मिल जाता है। उन्होंने बताया कि इस समय शादियों का सीजन चल रहा है। ऐसे में गुलाब की मांग अधिक है। क्योंकि इस गुलाब से दुल्हे की गाड़ी को सजाया जाता है। इसके अलावा वरमाला के अलावा जयमाला स्टेज और फेरों के लिए मंडप को सजाया जाता है।
गुलाब की खेती के कमाया जा सकता है काफी लाभ
जिला उद्यान अधिकारी सर्वेश चंद ने बताया कि गुलाब की खेती व्यावसायिक स्तर पर करके काफी लाभ कमाया जा सकता है। गुलाब की खेती पूरे भारतवर्ष में व्यवसायिक रूप से की जाती है। गुलाब के फूल डाली सहित या कट फ्लावर और पंखुड़ी फ्लावर दोनों तरह के बाजार में व्यापारिक रूप से पाए जाते है। गुलाब को कट फ्लावर, गुलाब जल, गुलाब तेल, गुलकंद आदि के लिए उगाया जाता है। गुलाब की खेती मुख्यत: कर्नाटक, तमिलनाडु, महाराष्ट्रा, बिहार, पश्चिम बंगाल ,गुजरात, हरियाणा, पंजाब, जम्मू एवं कश्मीर, मध्य प्रदेश, आंध्रा प्रदेश और उत्तर प्रदेश के कई जिलों में अधिक की जाती है।
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लगातार बढ़ रहा गुलाब की खेती का रकबा
किसान दीपक कुमार बताते हैं कि पिछले कुछ सालों में गांव में खेती की रकबा तेज से बढ़ा है। पिछले करीब पांच साल पहले करीब बीस बीघा जमीन में गुलाब की खेती हो रही थी। लेकिन किसान एक-दूसरे की देखादेख खेती की ओर बढ़ रहे हैं।
गुलाब के पौधों के बीच मिर्च उगाने की तैयारी
किसान दीपक कुमार ने बताया कि पहली बार गुलाब के पौधों के बीच मिर्च की फसल उगाने की तैयारी की गई है। करीब दो बीघा जमीन में गुलाब के पौधे की कटिंग की गई। इसके बाद निराई गुड़ाई के बाद पौधों के बीच में मिर्च के पौधे लगाए गए हैं। एक साथ दो फसलों को तैयार करने की कवायद पहली बार की गई है। देखते हैं कि गुलाब के पौधों के बीच मिर्च की फसल तैयार हो जाती है तो फायदे का सौदा साबित होगी।
एक बार लगाओ पौधे, जिंदगी भर उगाओ फूल
गुलाब की खेती करने वाले किसान रामचंद्र सिंह ने बताया गुलाब की खेती घाटे का सौदा नहीं है। निराई गुड़ाई के साथ फसल की देखरेख जरूर करनी पड़ती है। यदि एक बार जमीन में पौधे को लगा दिया तो हर साल पौधे की कटिंग करने की आवश्यकता पड़ती है। पौधे को जड़ से उखाड़ने की आवश्यकता नहीं है। कटिंग करने के बाद पौधा फिर से ढाई महीने में तैयार हो जाता है और बाजार में बेचने लायक फूल आने लगते हैं। जबकि नई फसल तैयार होने में 6 महीने का समय लगता है। एक बार फसल लगाओ को बार-बार गुलाब के फूल उगाओ।
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किसान दीपक कुमार ने बताया कि फूलों की खेती करने वाले किसानों के पास कम जमीन है। इसके लिए किसान एक बीघा से लेकर पांच बीघा तक गुलाब की खेती कर रहे है। ये फसल सालभर रहती है और लागत के सापेक्ष तीन गुना आमदनी हो रही है। इसमें अच्छा फायदा मिल जाता है। उन्होंने बताया कि इस समय शादियों का सीजन चल रहा है। ऐसे में गुलाब की मांग अधिक है। क्योंकि इस गुलाब से दुल्हे की गाड़ी को सजाया जाता है। इसके अलावा वरमाला के अलावा जयमाला स्टेज और फेरों के लिए मंडप को सजाया जाता है।
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गुलाब की खेती के कमाया जा सकता है काफी लाभ
जिला उद्यान अधिकारी सर्वेश चंद ने बताया कि गुलाब की खेती व्यावसायिक स्तर पर करके काफी लाभ कमाया जा सकता है। गुलाब की खेती पूरे भारतवर्ष में व्यवसायिक रूप से की जाती है। गुलाब के फूल डाली सहित या कट फ्लावर और पंखुड़ी फ्लावर दोनों तरह के बाजार में व्यापारिक रूप से पाए जाते है। गुलाब को कट फ्लावर, गुलाब जल, गुलाब तेल, गुलकंद आदि के लिए उगाया जाता है। गुलाब की खेती मुख्यत: कर्नाटक, तमिलनाडु, महाराष्ट्रा, बिहार, पश्चिम बंगाल ,गुजरात, हरियाणा, पंजाब, जम्मू एवं कश्मीर, मध्य प्रदेश, आंध्रा प्रदेश और उत्तर प्रदेश के कई जिलों में अधिक की जाती है।
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लगातार बढ़ रहा गुलाब की खेती का रकबा
किसान दीपक कुमार बताते हैं कि पिछले कुछ सालों में गांव में खेती की रकबा तेज से बढ़ा है। पिछले करीब पांच साल पहले करीब बीस बीघा जमीन में गुलाब की खेती हो रही थी। लेकिन किसान एक-दूसरे की देखादेख खेती की ओर बढ़ रहे हैं।
गुलाब के पौधों के बीच मिर्च उगाने की तैयारी
किसान दीपक कुमार ने बताया कि पहली बार गुलाब के पौधों के बीच मिर्च की फसल उगाने की तैयारी की गई है। करीब दो बीघा जमीन में गुलाब के पौधे की कटिंग की गई। इसके बाद निराई गुड़ाई के बाद पौधों के बीच में मिर्च के पौधे लगाए गए हैं। एक साथ दो फसलों को तैयार करने की कवायद पहली बार की गई है। देखते हैं कि गुलाब के पौधों के बीच मिर्च की फसल तैयार हो जाती है तो फायदे का सौदा साबित होगी।
एक बार लगाओ पौधे, जिंदगी भर उगाओ फूल
गुलाब की खेती करने वाले किसान रामचंद्र सिंह ने बताया गुलाब की खेती घाटे का सौदा नहीं है। निराई गुड़ाई के साथ फसल की देखरेख जरूर करनी पड़ती है। यदि एक बार जमीन में पौधे को लगा दिया तो हर साल पौधे की कटिंग करने की आवश्यकता पड़ती है। पौधे को जड़ से उखाड़ने की आवश्यकता नहीं है। कटिंग करने के बाद पौधा फिर से ढाई महीने में तैयार हो जाता है और बाजार में बेचने लायक फूल आने लगते हैं। जबकि नई फसल तैयार होने में 6 महीने का समय लगता है। एक बार फसल लगाओ को बार-बार गुलाब के फूल उगाओ।