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शबनम की फांसी के बाद किसकी होगी शौकत अली की संपत्ति 

Sat, 20 Feb 2021 03:28 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, हसनपुर (अमरोहा)
अमर उजाला नेटवर्क, हसनपुर (अमरोहा) Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sat, 20 Feb 2021 03:28 AM IST
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Amroha News : who will keep the property of Shaukat Ali after the hanging of Shabnam
शबनम - फोटो : Social Media

बावनखेड़ी नरसंहार की खलनायिका शबनम को फांसी पर लटकाने की तैयारियां चल रही हैं।  इसी बीच क्षेत्र में यह भी चर्चाएं होने लगी हैं कि शबनम की फांसी के बाद शौकत अली की लाखों की संपत्ति का वारिस कौन होगा। हालांकि अधिवक्ताओं का मानना है कि शबनम की फांसी के बाद शौकत अली की संपत्ति का वारिस शबनम का बेटा ताज नहीं हो सकता। 

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14 अप्रैल 2008 की रात बावनखेड़ी में प्रेमी के साथ अपने ही परिवार के सात सदस्यों की गला काटकर हत्या करने वाली शबनम को फांसी पर लटकाने की तैयारियां चल रही हैं। हालांकि फांसी की अभी तिथि निश्चित नहीं है परंतु शबनम के पिता स्वर्गीय शौकत अली की संपत्ति की विरासत के संबंध में अनेक कानूनी पहलुओं पर चर्चा हो रही है। माना जाता है कि स्वर्गीय शौकत अली के पास वेशकीमती बाग एवं कोठी बनी हुई है। 
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अधिवक्ता परिषद के तहसील समन्वयक एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अमरोहा के पैनल लायर सुरमित कुमार गुप्त एडवोकेट का कहना है कि कहा शबनम अपने पिता शौकत अली एवं परिवार के सात सदस्यों की हत्या करने के बाद उनकी संपत्ति की वारिस नहीं हो सकती। कहा कि उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006 की धारा 114 (ग) में स्पष्ट उल्लेख है कि कोई व्यक्ति जो किसी भूमिधर या आसामी की हत्या कर देता है या ऐसी हत्या किए जाने के लिए दुष्प्रेरित करता है वह किसी जोत में मृतक के हित को उत्तराधिकार में प्राप्त करने के लिए अयोग्य हो जाएगा।
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इसके अतिरिक्त उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता धारा 114 ( घ)में वर्णित है कि यदि कोई व्यक्ति खंड (ग) के अधीन किसी भूमिधर या आसामी के जोत में हित को उत्तराधिकार में प्राप्त करने के लिए अयोग्य हो जाए, तो ऐसे हित का इस प्रकार न्यागमन हो जाएगा। मानो अयोग्य व्यक्ति की मृत्यु ऐसे भूमिधर या आसामी की मृत्यु के पूर्व हुई हो। ऐसी दशा में शबनम को फांसी दिए जाने के उपरांत उसका पुत्र ताज , मृतक शौकत अली की संपत्ति का उत्तराधिकारी नहीं बन सकता। अधिवक्ता का कहना है कि स्वर्गीय शौकत अली की संपत्ति का वारिस  कौन होगा। यह फैसला कोर्ट  अपने विवेक के अनुसार ले सकता है।

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