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Amroha: दुकान के विवाद में कर दी थी बड़े भाई की हत्या, अब कोर्ट ने सुनाई उम्रकैद की सजा

Sat, 17 Sep 2022 05:54 PM IST
अनुराग सक्सेना संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा Published by: अनुराग सक्सेना Updated Sat, 17 Sep 2022 05:54 PM IST
सार

गिरफ्तारी के बाद से ही भगवान दास जेल में बंद है, जबकि उसकी पत्नी सरोज को जमानत मिल गई थी। ये मुकदमा पॉक्सो तृतीय संजय कुमार चतुर्थ की अदालत में विचाराधीन चल रहा था। शुक्रवार को न्यायालय में मुकदमे में सुनवाई की। अभियोजन पक्ष की तरफ से अपर जिला शासकीय अधिवक्ता चौधरी संजीव कुमार ने पैरवी की।

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Amroha court sentenced life imprisonment for Elder brother murder
court demo - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

दुकान के विवाद में बड़े भाई की गंडासे से गर्दन काटकर हत्या करने के मामले में न्यायालय ने छोटे भाई को उम्रकैद की सजा सुनाई है। साथ ही 70 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। दोषी की पत्नी भी आरोपी थी, लेकिन साक्ष्यों के अभाव में न्यायालय ने उसे दोषमुक्त कर दिया। गिरफ्तारी के बाद से ही दोषी जेल में बंद है, उसे जमानत नहीं मिल सकी थी।

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ये घटना आदमपुर थानाक्षेत्र के गांव दौरारा की है। यहां पर किसान कनछिद का परिवार रहता है। उनके दो बेटे थे। बड़ा बेटा रामकेश और छोटा बेटा भगवान दास के बीच जमीन का बंटवारा हुआ था। इस दौरान घर में बनी दुकान रामकेश से हिस्से में आ गई थी। लेकिन भगवानदास इस दुकान पर कब्जा करना चाहता था। इसके चलते दोनों भाइयों में विवाद रहता था।
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घटना 15 अगस्त 2020 की सुबह 11 बजे की है। इस दिन भगवान दास ने अपनी पत्नी सरोज के साथ मिलकर रामकेश पर गंडासे से हमला कर घायल कर दिया। आनन-फानन में परिजनों ने रामकेश को अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उसकी उपचार के दौरान मौत हो गई थी। इस मामले में रामकेश की पत्नी मुन्नी देवी की तरफ से भगवानदास और उसकी पत्नी सरोज के खिलाफ जानलेवा हमले की रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। लेकिन मौत के बाद पुलिस ने मुकदमे को हत्या में तरमीम कर लिया था। आरोपी दंपती को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
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गिरफ्तारी के बाद से ही भगवान दास जेल में बंद है, जबकि उसकी पत्नी सरोज को जमानत मिल गई थी। ये मुकदमा पॉक्सो तृतीय संजय कुमार चतुर्थ की अदालत में विचाराधीन चल रहा था। शुक्रवार को न्यायालय में मुकदमे में सुनवाई की। अभियोजन पक्ष की तरफ से अपर जिला शासकीय अधिवक्ता चौधरी संजीव कुमार ने पैरवी की। न्यायालय ने साक्ष्यों के आधार पर आरोपी भगवानदास को दोषी करार दिया। जबकि उसकी पत्नी सरोज को साक्ष्यों के अभाव में दोषमुक्त कर दिया। वहीं शनिवार को न्यायालय ने दोषी भगवानदास को उम्रकैद की सजा सुनाई है। साथ ही 70 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

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