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शनिवार को फिर चार बंदरों की मौत
ब्यूरो अमर उजाला /ढबारसी।
Updated Sun, 08 Apr 2018 01:42 AM IST
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आखिर ढबारसी में बंदरों की मौत का सिलसिला कब थमेगा। हर किसी की जुबान पर यही सवाल है। क्योंकि, शनिवार को भी चार बंदरों ने दम तोड़ दिया। अब तक डेढ़ सौ से ज्यादा बंदर काल के गाल में समा चुके हैं। वहीं, दर्जनों बंदर बीमारी से जूझ रहे हैं। जिन्हें इलाज के बाद भी नहीं बचाया जा रहा है।
ढबारसी के मोहल्ला होलीवाला में शनिवार की सुबह दो बंदरों के शव पड़े मिले। दोपहर होने तक दो और बंदर ने दम तोड़ दिया। एक ही दिन में चार बंदरों की मौत हो गई। बंदरों की मौत का यह सिलसिला पिछले बीस दिनों से चल रहा है। अब तक डेढ़ सौ से ज्यादा बंदर मर चुके हैं। बंदरों की मौत पर हल्ला हुआ तो पशुपालन विभाग ने डाक्टरों का अमला गांव में उतार दिया। डाक्टरों की टीम पिछले पंद्रह दिनों से गांव में डटी हुई है।
इलाज के शुरुआती दौर में ग्लूकोज, इंजेक्शन और दवाइयां दी गईं। उम्मीद जगी कि शायद अब बंदर बच जाएंगेे। लेकिन, अब भी बीमार बंदर एक-एक कर दम तोड़ रहे हैं। गौरतलब है कि एक बंदर का पोस्टमार्टम करते हुए विसरा आईवीआरआई बरेली भेजा गया। वैज्ञानिकों ने बंदरों को जहर दिए जाने की पुष्टि की है। इसके बाद आईवीआरआई की टीम भी दो बार गांव में आ चुकी है। इस घटना को लेकर फिलहाल आईवीआरआई में रिसर्च चल रहा है जल्द ही फाइनल रिपोर्ट आ सकती है।
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ढबारसी के मोहल्ला होलीवाला में शनिवार की सुबह दो बंदरों के शव पड़े मिले। दोपहर होने तक दो और बंदर ने दम तोड़ दिया। एक ही दिन में चार बंदरों की मौत हो गई। बंदरों की मौत का यह सिलसिला पिछले बीस दिनों से चल रहा है। अब तक डेढ़ सौ से ज्यादा बंदर मर चुके हैं। बंदरों की मौत पर हल्ला हुआ तो पशुपालन विभाग ने डाक्टरों का अमला गांव में उतार दिया। डाक्टरों की टीम पिछले पंद्रह दिनों से गांव में डटी हुई है।
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इलाज के शुरुआती दौर में ग्लूकोज, इंजेक्शन और दवाइयां दी गईं। उम्मीद जगी कि शायद अब बंदर बच जाएंगेे। लेकिन, अब भी बीमार बंदर एक-एक कर दम तोड़ रहे हैं। गौरतलब है कि एक बंदर का पोस्टमार्टम करते हुए विसरा आईवीआरआई बरेली भेजा गया। वैज्ञानिकों ने बंदरों को जहर दिए जाने की पुष्टि की है। इसके बाद आईवीआरआई की टीम भी दो बार गांव में आ चुकी है। इस घटना को लेकर फिलहाल आईवीआरआई में रिसर्च चल रहा है जल्द ही फाइनल रिपोर्ट आ सकती है।
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