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Amroha News: गजराैला में बैठेंगे एईएन रेलवे, दफ्तर तैयार
Wed, 14 May 2025 11:59 PM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
Updated Wed, 14 May 2025 11:59 PM IST
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गजरौला (अमरोहा)।
सहायक मंडल अभियंता (रेलपथ) का पद सृजित होने के साथ ही उनका कार्यालय भी तैयार हो गया है। स्टाफ के लिए आवास भी बन गए हैं। जिन पर करीब तीन करोड़ खर्च हुए हैं। संभावना है कि कुछ ही दिन में सहायक मंडल अभियंता गजरौला में बैठने लगेंगे। वह अधिकारी-कर्मचारियों के कार्यों की निगरानी करेंगे। इससे ट्रेनों का संचालन बेहतर होगा।
दो साल पहले गजरौला में सहायक मंडल अभियंता (रेलपथ) का पद सृजित हुआ था। सहायक मंडल अभियंता जंगपाल सिंह की गजरौला में तैनाती भी कर दी गई। मगर, उनके सामने कार्यालय व स्टाफ की समस्या खड़ी हुई। जिससे अपना काम सुचारू रूप से कर सकें। इस समस्या को दूर करने के लिए सीनियर सेक्शन इंजीनियर (कार्य) के कार्यालय परिसर में ही उनका कार्यालय, स्टोर व आवास बनाने का काम शुरू किया गया, जो लगभग पूरा हो गया है। इस पर 1.44 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं।
संभावना है कि कुछ दिन बाद जंगपाल सिंह कार्यालय में बैठकर कार्य करेंगे। वह रेलवे के अधिकारी व कर्मचारियों की यह निगरानी करेंगे वह सही और समय पर काम कर रहे हैं या नहीं। इसके अलावा मालगोदाम पर सहायक मंडल अभियंता (रेलपथ ) स्टाफ के रहने के लिए छह आवास बनवाए गए हैं। जिन पर 1.29 करोड़ रुपये का खर्च आया है। सीनियर सेक्शन इंजीनियर (कार्य) नवीन पाल का कहना है कि सहायक मंडल अभियंता (रेलपथ) का कार्यालय, आवास और उनके स्टाफ के लिए आवास बनकर तैयार हो गए हैं।
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सही संचालन के साथ ही जल्द होगा समस्याओं का निराकरण
सहायक मंडल अभियंता (रेलपथ) रेलवे के मंडल स्तर पर बैठते हैं। गजरौला में उनकी तैनाती हो जाने पर उनके अधिकार में दिल्ली-लखनऊ रेलमार्ग का लोधीपुर से सिंभावली और गजरौला-नजीबाबाद का रेलमार्ग का बिजनौर तक का क्षेत्र उनके कार्य के अधिकार में आएगा। क्षेत्र में कहां-कहां पर ओवरब्रिज और अंडर पास बनाए जाएंगे। ट्रेनों की स्पीड बढ़ाने के लिए कहां पर नई पटरियां बिछाई जाएंगी। इसके अलावा निर्माण कार्य के लिए कितने घंटे का ब्लॉक लेना है।
तीन जिलों के सहायक मंडल अभियंता देखते हैं काम
गजरौला में न तो सहायक मंडल अभियंता (रेलपथ) का पद था और न ही उनकी तैनाती थी। जिसके चलते जिले में रेलवे ट्रैक की मरम्मत, ट्रेन के संचालन उनकी स्पीड में वृद्धि के लिए ट्रैक को इस लायक बनाए जाने आदि कार्यों की निगरानी मुरादाबाद, नजीबाबाद और हापुड़ के सहायक मंडल अभियंता करते थे। इससे कार्यों की सही से निगरानी नहीं हो पाती थी।
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सहायक मंडल अभियंता (रेलपथ) का पद सृजित होने के साथ ही उनका कार्यालय भी तैयार हो गया है। स्टाफ के लिए आवास भी बन गए हैं। जिन पर करीब तीन करोड़ खर्च हुए हैं। संभावना है कि कुछ ही दिन में सहायक मंडल अभियंता गजरौला में बैठने लगेंगे। वह अधिकारी-कर्मचारियों के कार्यों की निगरानी करेंगे। इससे ट्रेनों का संचालन बेहतर होगा।
दो साल पहले गजरौला में सहायक मंडल अभियंता (रेलपथ) का पद सृजित हुआ था। सहायक मंडल अभियंता जंगपाल सिंह की गजरौला में तैनाती भी कर दी गई। मगर, उनके सामने कार्यालय व स्टाफ की समस्या खड़ी हुई। जिससे अपना काम सुचारू रूप से कर सकें। इस समस्या को दूर करने के लिए सीनियर सेक्शन इंजीनियर (कार्य) के कार्यालय परिसर में ही उनका कार्यालय, स्टोर व आवास बनाने का काम शुरू किया गया, जो लगभग पूरा हो गया है। इस पर 1.44 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं।
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संभावना है कि कुछ दिन बाद जंगपाल सिंह कार्यालय में बैठकर कार्य करेंगे। वह रेलवे के अधिकारी व कर्मचारियों की यह निगरानी करेंगे वह सही और समय पर काम कर रहे हैं या नहीं। इसके अलावा मालगोदाम पर सहायक मंडल अभियंता (रेलपथ ) स्टाफ के रहने के लिए छह आवास बनवाए गए हैं। जिन पर 1.29 करोड़ रुपये का खर्च आया है। सीनियर सेक्शन इंजीनियर (कार्य) नवीन पाल का कहना है कि सहायक मंडल अभियंता (रेलपथ) का कार्यालय, आवास और उनके स्टाफ के लिए आवास बनकर तैयार हो गए हैं।
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सही संचालन के साथ ही जल्द होगा समस्याओं का निराकरण
सहायक मंडल अभियंता (रेलपथ) रेलवे के मंडल स्तर पर बैठते हैं। गजरौला में उनकी तैनाती हो जाने पर उनके अधिकार में दिल्ली-लखनऊ रेलमार्ग का लोधीपुर से सिंभावली और गजरौला-नजीबाबाद का रेलमार्ग का बिजनौर तक का क्षेत्र उनके कार्य के अधिकार में आएगा। क्षेत्र में कहां-कहां पर ओवरब्रिज और अंडर पास बनाए जाएंगे। ट्रेनों की स्पीड बढ़ाने के लिए कहां पर नई पटरियां बिछाई जाएंगी। इसके अलावा निर्माण कार्य के लिए कितने घंटे का ब्लॉक लेना है।
तीन जिलों के सहायक मंडल अभियंता देखते हैं काम
गजरौला में न तो सहायक मंडल अभियंता (रेलपथ) का पद था और न ही उनकी तैनाती थी। जिसके चलते जिले में रेलवे ट्रैक की मरम्मत, ट्रेन के संचालन उनकी स्पीड में वृद्धि के लिए ट्रैक को इस लायक बनाए जाने आदि कार्यों की निगरानी मुरादाबाद, नजीबाबाद और हापुड़ के सहायक मंडल अभियंता करते थे। इससे कार्यों की सही से निगरानी नहीं हो पाती थी।