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नाबालिग के अपहरण और दुष्कर्म में दस साल की कैद
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अमरोहा। नाबालिग का अपहरण कर दु्ष्कर्म के मामले में न्यायालय ने आरोपी को दस साल कैद की सजा सुनाई है। साथ ही 71 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। आरोपी जमानत पर जेल से बाहर था, उसे कस्टडी में लेकर जेल भेज दिया गया है।
दुष्कर्म की यह वारदात डिडौली कोतवाली क्षेत्र के एक गांव की है। यहां पर किसान का परिवार रहता है। उनकी नाबालिग बेटी कक्षा दस की छात्रा थी। 25 अक्तूबर 2014 को बरखेड़ा राजपूत गांव निवासी समरपाल सिंह और बब्लू ने नाबालिग का अपहरण कर लिया। जहां आरोपी समरपाल ने उसके साथ दुष्कर्म किया। पीड़ित पिता ने दोनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। इसके बाद पुलिस ने नाबालिग को बरामद कर लिया था। पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। फिलहाल दोनों जमानत पर जेल से बाहर थे। यह मुकदमा अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश (पोक्सो एक्ट) शंकर लाल की अदालत में विचाराधीन था। मंगलवार को न्यायालय ने मुकदमे में सुनवाई की। अभियोजन पक्ष की तरफ से शासकीय अधिवक्ता रविंद्र गर्ग ने आरोपियों को सख्त से सख्त सजा दिए जाने की मांग की। लेकिन साक्ष्य और सबूतों के अभाव में न्यायालय ने बबलू को बरी कर दिया। जबकि न्यायालय ने लैंगिंक अपराधों से संरक्षण अधिनियम 2012 की धारा 4 पोक्सो एक्ट के तहत समरपाल को दोषी करार दिया। दस साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। साथ ही 71 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। जुर्माने की धनराशि से पीड़िता को 50 हजार रुपये की आर्थिक मदद दी जाएगी।
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दुष्कर्म की यह वारदात डिडौली कोतवाली क्षेत्र के एक गांव की है। यहां पर किसान का परिवार रहता है। उनकी नाबालिग बेटी कक्षा दस की छात्रा थी। 25 अक्तूबर 2014 को बरखेड़ा राजपूत गांव निवासी समरपाल सिंह और बब्लू ने नाबालिग का अपहरण कर लिया। जहां आरोपी समरपाल ने उसके साथ दुष्कर्म किया। पीड़ित पिता ने दोनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। इसके बाद पुलिस ने नाबालिग को बरामद कर लिया था। पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। फिलहाल दोनों जमानत पर जेल से बाहर थे। यह मुकदमा अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश (पोक्सो एक्ट) शंकर लाल की अदालत में विचाराधीन था। मंगलवार को न्यायालय ने मुकदमे में सुनवाई की। अभियोजन पक्ष की तरफ से शासकीय अधिवक्ता रविंद्र गर्ग ने आरोपियों को सख्त से सख्त सजा दिए जाने की मांग की। लेकिन साक्ष्य और सबूतों के अभाव में न्यायालय ने बबलू को बरी कर दिया। जबकि न्यायालय ने लैंगिंक अपराधों से संरक्षण अधिनियम 2012 की धारा 4 पोक्सो एक्ट के तहत समरपाल को दोषी करार दिया। दस साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। साथ ही 71 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। जुर्माने की धनराशि से पीड़िता को 50 हजार रुपये की आर्थिक मदद दी जाएगी।
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