{"_id":"5b5cc93d4f1c1b8f568b6fa6","slug":"71532807485-amroha-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"गंगा के पानी में डूब गई खादर के किसानों की फसलें","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गंगा के पानी में डूब गई खादर के किसानों की फसलें
Updated Sun, 29 Jul 2018 01:21 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गजरौला। गंगा ने इन दिनों रौद्र रुप अपना रखा है। बाढ़ के पानी में खादर के किसानों की फसलें पूरी तरह से डूब चुकी है। खेतों पर भी किसानों का आना जाना बंद हो गया है। जिसके चलते पशुओ के चारे का संकट खड़ा हो गया है। आधा दर्जन गांव के लोग अपने पशुओं को सिर्फ सूूखा भूसा खिलाकर ही बचाएं हुए हैं।
शनिवार को गंगा का जलस्तर दौ सौ मीटर को पार कर गया। ऐसे में खेतों से पानी कम होने की उम्मीद नहीं है। पिछले चार दिनों से खेतों में पानी बह रहा है। ऐसे में फसलें पूरी तहर से डूबी हुई हैं। जिसने किसानों के सामने चारे का संकट खड़ कर दिया है। पशुओं के लिए चारा काटने में भी दिक्कत आ रही है। वहीं घास खिलाकर पशु पालने मजदूरों के पशुओं को चारा मिलना बंद हो गया है। पानी बढ़ने से किसानों की फसल भी खराब हो सकती है। जिसे लेकर किसानों में चिंता बनी हुई है। इसके अलावा खादर में बसे गांव शीशोवाली, जाटोवाली, ढाकोवाली, मीरापुर, भुड्डी, रुस्तमपुर, टीकोवाली आदि आधा दर्जन गांव के खेत पानी से लबालब हैं। ग्रामीणों ने बताया कि पशुओं को सिर्फ भूसा ही खिलाना पड़ रहा है। जंगल में पशुओं को चराने के लिए भी जगह नहीं बची है। सभी जगहों पर गंगा का पानी बह रहा है।
विज्ञापन
शनिवार को गंगा का जलस्तर दौ सौ मीटर को पार कर गया। ऐसे में खेतों से पानी कम होने की उम्मीद नहीं है। पिछले चार दिनों से खेतों में पानी बह रहा है। ऐसे में फसलें पूरी तहर से डूबी हुई हैं। जिसने किसानों के सामने चारे का संकट खड़ कर दिया है। पशुओं के लिए चारा काटने में भी दिक्कत आ रही है। वहीं घास खिलाकर पशु पालने मजदूरों के पशुओं को चारा मिलना बंद हो गया है। पानी बढ़ने से किसानों की फसल भी खराब हो सकती है। जिसे लेकर किसानों में चिंता बनी हुई है। इसके अलावा खादर में बसे गांव शीशोवाली, जाटोवाली, ढाकोवाली, मीरापुर, भुड्डी, रुस्तमपुर, टीकोवाली आदि आधा दर्जन गांव के खेत पानी से लबालब हैं। ग्रामीणों ने बताया कि पशुओं को सिर्फ भूसा ही खिलाना पड़ रहा है। जंगल में पशुओं को चराने के लिए भी जगह नहीं बची है। सभी जगहों पर गंगा का पानी बह रहा है।
विज्ञापन