{"_id":"6692dbc50d7adaa9fd0d4696","slug":"37603-cusecs-of-water-released-from-bijnor-barrage-gajraula-news-c-284-1-smbd1015-121996-2024-07-14","type":"story","status":"publish","title_hn":"Amroha News: बिजनौर बैराज से छोड़ा 37603 क्यूसेक पानी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Amroha News: बिजनौर बैराज से छोड़ा 37603 क्यूसेक पानी
विज्ञापन
गजरौला। बिजनौर बैराज से गंगा में 37603 और हरिद्वार से 32159 क्यूसेक पानी छोड़े जाने से गंगा का जल स्तर 20 सेंटीमीटर बढ़ कर 199.40 मीटर हो गया। खादर के ग्रामीणों को बाढ़ का भय सताने लगा है। लगातार पानी बढ़ता रहा तो निचले इलाकों के खेतों में लबालब पानी भर जाने पर फसलें तबाह हो सकती हैं।
बीते शनिवार को बिजनौर बैराज से गंगा में 134964 और हरिद्वार से 88860 क्यूसेक पानी छोड़े जाने के कारण तिगरी में गंगा का जलस्तर 100 सेंटीमीटर बढ़ गया था। शनिवार और रविवार को तिगरी में गंगा का जलस्तर 200.10 मीटर रहा। इसके बाद लगातार कम होता रहा। बीते शुक्रवार को तिगरी में गंगा का जलस्तर 199.20 मीटर था। मगर शनिवार को 20 सेंटीमीटर बढ़ जाने के कारण 199.40 मीटर हो गया।
बाढ़ खंड के जेई सुभाष चंद्र गहलौत का कहना है कि गंगा में खतरे का निशान अभी दूर है। अगर पानी और बढ़ता है तो दिक्कत हो सकती है। उधर कई दिन बाद गंगा का जल स्तर बढ़ने से खादर के ग्रामीणों की धड़कन फिर तेज हो गई हैं। उनको अपनी फसल नष्ट होने का डर सता रहा है। क्योंकि निचले इलाके के खेतों में बाढ़ का पानी भर जाने से चारा, सब्जी आदि की फसलें खराब हो जाती हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
बीते शनिवार को बिजनौर बैराज से गंगा में 134964 और हरिद्वार से 88860 क्यूसेक पानी छोड़े जाने के कारण तिगरी में गंगा का जलस्तर 100 सेंटीमीटर बढ़ गया था। शनिवार और रविवार को तिगरी में गंगा का जलस्तर 200.10 मीटर रहा। इसके बाद लगातार कम होता रहा। बीते शुक्रवार को तिगरी में गंगा का जलस्तर 199.20 मीटर था। मगर शनिवार को 20 सेंटीमीटर बढ़ जाने के कारण 199.40 मीटर हो गया।
विज्ञापन
बाढ़ खंड के जेई सुभाष चंद्र गहलौत का कहना है कि गंगा में खतरे का निशान अभी दूर है। अगर पानी और बढ़ता है तो दिक्कत हो सकती है। उधर कई दिन बाद गंगा का जल स्तर बढ़ने से खादर के ग्रामीणों की धड़कन फिर तेज हो गई हैं। उनको अपनी फसल नष्ट होने का डर सता रहा है। क्योंकि निचले इलाके के खेतों में बाढ़ का पानी भर जाने से चारा, सब्जी आदि की फसलें खराब हो जाती हैं।
विज्ञापन