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Amroha News: पुराने 34 पट्टे निरस्त, 227 बीघा भूमि ग्रामसभा के खाते में होगी दर्ज

Thu, 06 Aug 2026 01:01 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा Updated Thu, 06 Aug 2026 01:01 AM IST
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34 old land leases cancelled; 227 bighas of land to be recorded in the Gram Sabha's name.
अमरोहा। सार्वजनिक उपयोग की जमीन पर वर्षों पहले किए गए अवैध पट्टों के खिलाफ प्रशासन की कार्रवाई लगातार तेज हो रही है। एडीएम न्यायिक धीरेंद्र प्रताप की अदालत ने श्रेणी बदलकर किए गए 34 पुराने पट्टों को निरस्त करते हुए करीब 227 बीघा भूमि को दोबारा ग्रामसभा के खाते में दर्ज करने के आदेश दिए हैं। इनमें वर्ष 1975 से 2004 के बीच किए गए पट्टा आवंटन शामिल हैं। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि चारागाह और खलिहान जैसी सार्वजनिक उपयोग की भूमि का आवंटन कानून के विपरीत है। वहीं, आदमपुर और रहरा क्षेत्र के करीब 200 से अधिक अन्य पट्टा मामलों की सुनवाई अभी न्यायालय में चल रही है।
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जिला शासकीय अधिवक्ता (राजस्व) राजेश राणा ने बताया कि न्यायालय ने अलग-अलग चार मामलों में यह कार्रवाई की। इनमें तीन मामलों में कुल आठ पट्टे तथा रहरा के एक मामले में 22 पट्टे निरस्त किए गए है। सभी मामलों में मूल पट्टेदारों के साथ-साथ उनके उत्तराधिकारियों के नाम भी राजस्व अभिलेखों से हटाने तथा भूमि को उसकी मूल श्रेणी में दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं। हाकमपुर गांव में करीब 1.10 एकड़ चारागाह भूमि पर वर्ष 1975 में गंगुवा, सूखा, चन्नू और बृजपाल के नाम चार कृषि पट्टे स्वीकृत किए गए थे। न्यायालय ने पाया कि भूमि मूल रूप से चारागाह थी, इसलिए इसका आवंटन प्रारंभ से ही शून्य और अवैध था। इसी प्रकार, रहरा गांव में वर्ष 1983 में खलिहान भूमि पर कलुवा और देवीसाह के नाम किए गए दो पट्टे भी निरस्त कर दिए गए। न्यायालय ने इनके साथ बाद में दर्ज उत्तराधिकारियों के नाम भी खतौनी से हटाने के आदेश दिए। इसके अलावा वर्ष 1987 में रहरा की चारागाह भूमि पर रामनाथ और जगदीश के नाम किए गए दो पट्टे भी अवैध घोषित कर निरस्त कर दिए गए। वहीं, रहरा गांव में वर्ष 2004 में चारागाह भूमि पर किए गए 22 कृषि पट्टों को भी अदालत ने रद्द कर दिया।
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ये था पूरा मामला
हसनपुर तहसील के गंगेश्वरी, रहरा, आदमपुर और दढ़ियाल गांवों में करीब 2880 बीघा सरकारी भूमि पर 500 से अधिक पट्टे आवंटित किए गए थे। आरोप है कि तत्कालीन अधिकारियों ने नियमों की अनदेखी कर भूमि की श्रेणी बदलकर पट्टे दिए। चकबंदी के दौरान मामला सामने आने पर एडीएम न्यायिक न्यायालय गंगेश्वरी और दढ़ियाल के 225 पट्टे निरस्त कर चुका है। इसके अलावा दौरारा, चंदनपुर, बिहारीपुर, सतेड़ा, दियावली, धौरिया, जयतौली और पिपलौती समेत 10 से अधिक गांवों में करीब 2000 बीघा सरकारी भूमि पर किए गए लगभग 400 पट्टों की जांच चल रही है। सहेरिया गांव में 200 बीघा भूमि पर 35 से अधिक, अल्लीपुर खादर में नदी की भूमि पर तथा पाइंदापुर एतमाली में 500 बीघा सरकारी भूमि पर 80 से अधिक पट्टों की भी जांच हो रही है। तिगरिया खादर में श्रेणी-3 के तहत किए गए 100 से अधिक पट्टे निरस्त होने के बावजूद करीब 400 बीघा भूमि पर अब भी कब्जे बने हुए हैं। वहीं पहाड़पुर वक्काल गांव में 500 बीघा झील की भूमि पर किए गए पट्टे वर्ष 2014 में निरस्त होने के बाद भी अतिक्रमण नहीं हट सका है। जमीनों की श्रेणी बदलकर पट्टे होने की फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद डीएम डॉ. नितिन गौड़ ने चारों तहसीलों में पट्टों की जांच कर एसडीएम से जांच रिपोर्ट मांग रखी है।
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