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जलस्तर में मामूली गिरावट से बाढ़ से नहीं मिली राहत
Updated Fri, 07 Sep 2018 12:29 AM IST
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गजरौला। गंगा के जलस्तर में बीस सेमी की गिरावट आई है लेकिन, यह कमी बाढ़ से राहत नहीं दिला पाई। फिलहाल आबादी तक पानी घुसा हुआ है। खादर में लोगों का जनजीवन अस्त व्यस्त है। वहीं रोगियों की संख्या बढ़ती जा रही है।
गुरुवार को बिजनौर बैराज से 117843 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। जिससे तिगरी में गंगा का जलस्तर 199.90 पर जा ठहरा। ब्रजघाट में 198.15 मीटर दर्ज किया गया। यह बेहद मामूली गिरावट है। क्योंकि गंगा के पानी का फैलाव पूरे खादर में है। आठ गांव बाढ़ से जूझ रहे हैं। इन गांव का संपर्क शहरों से कटा हुआ है। केवल नाव ही एक सहारा रह गई है। नाव तक पहुंचने के लिए भी ग्रामीणों को तमाम झंझटों का सामना करना पड़ा है। खेती बाड़ी का काम पूरी तरह से ठप हो गया है। पिछले दो महीनों से खेतों में भरा हुआ पानी गन्ने की फसल को नुकसान पहुंचा रहा है। धान की फसल पहले ही चौपट हो गई।
चारे का इंतजाम करना खादरवासियों के लिए बेहद मुश्किल हो रहा है। क्योंकि चारे की फसल पहले ही नष्ट हो चुकी है। अब तो गन्ने का पत्ता उतारकर खिलाना पड़ रहा है। कई लोगों ने अपनी गन्ने की फसल को ही काट कर पशुओं को खिलाना शुरू कर दिया है। हर रोज खादर के लोग पानी कम होने की कामना कर रहे हैं। जिससे उन्हें राहत मिल सके।
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पपसरा खादर में पांच लोग हुए बीमार
गजरौला। खादर के सभी गांव बीमारी की चपेट में हैं। अब पपसरा खादर में भी बीमारियों ने पैर पसार लिए हैं। गांव के करीब पांच सौ लोगों को बुखार और खांसी जैसी बीमारियों ने जकड़ लिया है। इस गांव में अभी तक स्वास्थ्य विभाग की टीम नहीं पहुंची है।
खादर में बसे पपसरा गांव अभी तक बीमारियों से अछूता था। क्योंकि इस गांव के चारों और तटबंध बना हुआ है। यहां की आबादी में पानी नहीं पहुंचता। केवल खेतों तक ही गंगा का पानी रहता है। जिसके चलते सबसे बाद में इस गांव को बीमारी ने अपनी चपेट में लिया। सबसे पहले दारानगर में करीब दो हजार लोग बीमार पड़े थे। इनमें कुछ ठीक हो गए हैं। काफी लोगों को दारानगर में अभी भी बीमारी ने चपेट में ले रखा है। उधर टीकोवाली, जाटोवाली, शीशोवाली, भुड्डीवाली, मंदिरवाली में भी लोग बीमारियों से पीड़ित है। बच्चों और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा दिक्कत हो रही है। काफी बच्चों को बुखार के बाद निमोनिया की शिकायत हो गई।
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गुरुवार को बिजनौर बैराज से 117843 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। जिससे तिगरी में गंगा का जलस्तर 199.90 पर जा ठहरा। ब्रजघाट में 198.15 मीटर दर्ज किया गया। यह बेहद मामूली गिरावट है। क्योंकि गंगा के पानी का फैलाव पूरे खादर में है। आठ गांव बाढ़ से जूझ रहे हैं। इन गांव का संपर्क शहरों से कटा हुआ है। केवल नाव ही एक सहारा रह गई है। नाव तक पहुंचने के लिए भी ग्रामीणों को तमाम झंझटों का सामना करना पड़ा है। खेती बाड़ी का काम पूरी तरह से ठप हो गया है। पिछले दो महीनों से खेतों में भरा हुआ पानी गन्ने की फसल को नुकसान पहुंचा रहा है। धान की फसल पहले ही चौपट हो गई।
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चारे का इंतजाम करना खादरवासियों के लिए बेहद मुश्किल हो रहा है। क्योंकि चारे की फसल पहले ही नष्ट हो चुकी है। अब तो गन्ने का पत्ता उतारकर खिलाना पड़ रहा है। कई लोगों ने अपनी गन्ने की फसल को ही काट कर पशुओं को खिलाना शुरू कर दिया है। हर रोज खादर के लोग पानी कम होने की कामना कर रहे हैं। जिससे उन्हें राहत मिल सके।
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पपसरा खादर में पांच लोग हुए बीमार
गजरौला। खादर के सभी गांव बीमारी की चपेट में हैं। अब पपसरा खादर में भी बीमारियों ने पैर पसार लिए हैं। गांव के करीब पांच सौ लोगों को बुखार और खांसी जैसी बीमारियों ने जकड़ लिया है। इस गांव में अभी तक स्वास्थ्य विभाग की टीम नहीं पहुंची है।
खादर में बसे पपसरा गांव अभी तक बीमारियों से अछूता था। क्योंकि इस गांव के चारों और तटबंध बना हुआ है। यहां की आबादी में पानी नहीं पहुंचता। केवल खेतों तक ही गंगा का पानी रहता है। जिसके चलते सबसे बाद में इस गांव को बीमारी ने अपनी चपेट में लिया। सबसे पहले दारानगर में करीब दो हजार लोग बीमार पड़े थे। इनमें कुछ ठीक हो गए हैं। काफी लोगों को दारानगर में अभी भी बीमारी ने चपेट में ले रखा है। उधर टीकोवाली, जाटोवाली, शीशोवाली, भुड्डीवाली, मंदिरवाली में भी लोग बीमारियों से पीड़ित है। बच्चों और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा दिक्कत हो रही है। काफी बच्चों को बुखार के बाद निमोनिया की शिकायत हो गई।