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Amroha News: हाईवे के चौड़ीकरण में 190 पेड़ बने बाधा

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Fri, 21 Jun 2024 03:51 AM IST
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190 trees became an obstacle in the widening of the highway
गजरौला। हाईवे चौड़ीकरण में 190 पेड़ रोड़ा बन गए हैं। उनकी वजह से काम रोक दिया गया है। हाईवे चौड़ीकरण की निर्माण कंपनी द्वारा छह साल पूर्व अनुमति लेकर पेड़ों को कटवाने के बाद भी निर्माण कार्य नहीं कराना महंगा पड़ गया। पेड़ कटने के बाद दोबारा पौधे रोप दिए गए। जो काफी बड़े हो गए। जिनको काटे जाने के लिए वन्य जीव बोर्ड व वन विभाग से दोबारा अनुमति व एनओसी चाहिए।
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दिल्ली से मुरादाबाद तक हाईवे चौड़ीकरण का जिम्मा आईआरबी मुरादाबाद-हापुड़ टोलवे लिमिटेड पर है। मई-19 में शुरू किया गया चौड़ीकरण कार्य वर्ष-2022 के दिसंबर तक पूर्ण करना था। निर्माण कंपनी ने मुरादाबाद से गजरौला और हापुड़ से ब्रजघाट तक का अधिकांश काम पूरा कर लिया, लेकिन गजरौला से ब्रजघाट तक कई स्थान पर काम अधूरा है। ऑक्सफोर्ड इंटरनेशनल स्कूल से कुछ दूरी से गजरौला की दिशा में करीब दो किमी लंबाई में हाईवे चौड़ीकरण का काम अटक गया है। निर्माण कंपनी चाहती थी कि चौड़ीकरण का काम मुरादाबाद से दिल्ली जाने वाले वाहनों की लेन की तरफ किया जाए। क्योंकि इस लेन की तरफ वन विभाग का कोई दखल नहीं है। मगर इस लेन पर बिस्कुट फैक्टरी, ढाबे, होटल, अस्पताल और नाईपुरा बसा है। सादुल्लेपुर गांव की भी कुछ आबादी है।
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जो चौड़ीकरण की जद में आ रहे थे। उनको ध्वस्त कराने से पहले करोड़ों रुपये मुआवजे के रूप में खर्च करने पड़ते। निर्माण कंपनी ने फिलहाल करोड़ों की रकम बचाने के चक्कर में दिल्ली से मुरादाबाद जाने वाले वाहनों की लेन की तरफ हाईवे चौड़ा कराने का निर्णय लिया। जिसकी लंबाई दो किमी है। यह क्षेत्र वन विभाग के अधीन आता है। निर्माण कंपनी ने 2018 में वन्य जीव बोर्ड व वन विभाग से अनुमति भी ले ली। जिसके बाद उन पेड़ों को कटवा दिया गया। मगर निर्माण कंपनी ने हाईवे चौड़ीकरण का कार्य शुरू नहीं किया। इस दौरान छह साल बीत गए। इस बीच उस क्षेत्र में फैक्टरियों द्वारा पौधे रोप दिए गए। जिनकी संख्या 190 है, जो इस समय पूरे पेड़ तो नहीं बने हैं, लेकिन उनकी वजह से हाईवे चौड़ीकरण का काम रुक गया है। अब निर्माण कंपनी ने पेड़ों को कटवाने के लिए दोबारा अनुमति मांगी है। जिसमें अभी लंबा समय लग सकता है।
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कोट:
2018 में हाईवे चौड़ीकरण के लिए वन विभाग व वन्य जीव बोर्ड से पेड़ों को काटे जाने की अनुमति ली गई थी। एनओसी मिलने पर पेड़ों को कटवा दिया गया। पहले फोरलेन करना था, लेकिन बाद में सिक्सलेन बनाए जाने का निर्णय लिया गया। इस कारण उधर का काम शुरू नहीं किया गया था। जो पेड़ कटवाए गए थे अब उनकी जड़ फूट आई हैं। जिनको कटवाने के लिए दोबारा एनओसी चाहिए। इसके लिए डीएफओ को पत्र लिखा गया है। एनओसी मिलते ही काम शुरू कर दिया जाएगा।

-ललित मोहन तिवारी, जीएम आईआरबी मुरादाबाद-हापुड़ टोलवे लिमिटेड
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हाईवे चौड़ीकरण की निर्माण कंपनी ने लापरवाही की सभी हद पार कर दीं। अनुमति लेकर पेड़ कटवाने के छह साल में काम शुरू नहीं किया। इस बीच उस भूमि को खाली देख उस पर पौधरोपण किया गया। जो पौधे अब काफी बड़े हो गए हैं। जिनको बिना अनुमति नहीं काटा जा सकता। हाईवे चौड़ीकरण कंपनी यह लिखकर दे कि वह 190 पेड़ लगवाएगी। जब तक वह बड़े नहीं होंगे, उनकी देखभाल की जिम्मेदारी भी उसी की होगी। इसी शर्त पर अनुमति मिल सकती है।
-विमल भारद्वाज, उप प्रभागीय वन अधिकारी अमरोहा
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