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Amroha News: 1.41 लाख को मिल रहा पुष्टाहार, फिर भी छह हजार बच्चे कुपोषित
Sat, 07 Jun 2025 02:31 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
Updated Sat, 07 Jun 2025 02:31 AM IST
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अमरोहा। कुपोषण की श्रेणी से बाहर लाने के लिए सरकार भले ही कवायद कर रही हो, लेकिन इसके बाद भी जिले में कुपोषित बच्चों की संख्या कम नहीं है। खेलने कूदने की उम्र में बचपन सेहतमंद बनने की आस में कुपोषण से जंग लड़ रहा है। जिलेभर में 1.41 लाख लाभार्थी पुष्टाहार पा रहे हैं। इसके बावजूद भी करीब छह हजार बच्चों का बचपन कुपोषण से जूझने को मजबूर है।
बाल विकास व पुष्टाहार विभाग के तहत जिलेभर में 1314 आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन होता है। जहां 1,25,643 बच्चे पंजीकृत हैं। इन केंद्रों के माध्यम से गर्भवती और धात्री महिलाओं को पूरक व पुष्टाहार का वितरण भी किया जाता है। जिससे उनको पौष्टिकता से भरपूर आहार मिल सके, लेकिन इसके बाद भी बच्चों में पोषण की कमी देखी जा रही है।
जिलेभर में 5949 बच्चे कुपोषण का दंश झेल रहे हैं। वजह कुछ भी हो, लेकिन ऐसे में इन मासूम बच्चों को बचपन कुपोषण से जूझते हुए बीत रहा है। ऐसे बच्चों को कुपोषण से बाहर लाने के लिए सरकार भरपूर प्रयास कर रही है। वजह कुछ भी रहे, लेकिन ऐसे में इन मासूम बच्चों को बचपन कुपोषण से जूझते हुए बीतता है।
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ऐसे बच्चों को कुपोषण से बाहर लाने के लिए केंद्रों पर समय-समय पर बच्चों का वजन व देखभाल की जाती है। जिला स्तर पर सरकारी अस्पताल में ऐसे बच्चों के लिए पोषण पुर्नवास केंद्र बनाया गया है। जहां उनको भर्ती रखकर भरपूर पोषण देने का प्रयास किया जाता है। पोषण पुर्नवास केंद्र पर फिलहाल करीब छह बच्चों का उपचार चल रहा है। बच्चों के अभिभावकों को बच्चों के लिए दलिया, दाल, तेल व फोर्टिफाइड चावल आदि भी उपलब्ध कराया जाता है।
डीएम ने बनाई सुपर 45 टीम
बच्चों को कुपोषण की श्रेणी बाहर लाए जाने के लिए डीएम निधि गुप्ता वत्स ने भी सुपर 30 की टीम बनाई थी। इसमें काफी बच्चों के कुपोषण से बाहर आने के बाद अब उन्होंने सुपर-45 टीम बनाई है। जिसमें डीएम समेत सीडीओ, परियोजना निदेशक, बीएसए, डीपीआरओ, जिला कार्यक्रम अधिकारी समेत 45 अधिकारियों को अलग-अलग गांवों के कुपोषित बच्चों की जिम्मेदारी दी गई है। जिसमें अधिकारियों द्वारा ऐसे परिवारों को सरकारी की योजनाओं का लाभ दिलाने की जिम्मेदारी दी गई है। जिससे उनकी आय का कुछ स्रोत बने, और उनके खान-पान में भी सुधार हो। जिससे बच्चे कुपोषण की श्रेणी से बाहर आ सकें।
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20818 गर्भवती व धात्री महिलाएं को मिलता है पूरक आहार
बाल विकास व पुष्टाहार विभाग के अनुसार जिले में 1,41,430 लाभार्थी हैं। जिसमें 11,134 गर्भवती व 9684 धात्री महिलाएं शामिल हैं। इनको पोषण युक्त पुष्टाहार का वितरण किया जाता है। इसके अलावा छह माह से तीन साल के 76,916 व तीन साल से छह माह के 42,960 बच्चे पुष्टाहार पा रहे हैं।
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ब्लाॅक में इतनी है कुपोषित बच्चों की संख्या
ब्लॉक (परियोजना) - अतिकुपोषित (सैम) - कुपोषित (मैम)
अमरोहा शहर- - 85 - 559
अमरोहा देहात - 177 - 653
धनौरा - 132 - 493
गजरौला - 203 - 628
गंगेश्वरी - 226 - 1006
हसनपुर - 120 - 747
जोया - 87 - 833
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जिले में कुपोषित बच्चों को स्वस्थ बनाए जाने के लिए लगातार प्रयास हो रहे हैं। कुपोषित बच्चों को पोषण पुर्नवास केंद्र पर भी भर्ती कराया जाता है। अधिकारियों ने भी कुपोषण की श्रेणी वाले गांवों को गोद लिया है। जिससे स्थिति में सुधार भी हुआ है। - संजीव कुमार, प्रभारी जिला कार्यक्रम अधिकारी
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कुपोषित बच्चों के आहार
- तीन साल के बच्चे को 24 घंटे में दो कप दूध, दो कटोरी दाल, 3-4 कटोरी मिक्स अनाज छह से आठ बार खिलाना ठीक रहता है।
- बच्चों को साफ पानी ही देना चाहिए।
- कोई भी संक्रमण होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
- छह माह के बच्चों को मां के दूध के अलावा दो कटोरी मसला हुआ खाना दिनभर में थोड़-थोड़ा कर के खिलाना चाहिए।
- आठ से दस महीनों के बच्चों को मां के दूध के अलावा तीन कटोरी प्रोटीन युक्त खाना दिनभर में खिला देना चाहिए।
- हर मौसम में विभिन्न मौसमी फलों या उनके रस को बच्चों को दें।
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कुपोषण के लक्षण
- जन्म के समय दो किलो से कम वजन होना।
- बच्चे में चिड़चिड़ापन और सुस्ती रहना।
- बार-बार बीमारियों की चपेट में आना।
- बच्चे में उम्र के साथ वजन न बढ़ना।
- कई बच्चे ऐसे होते हैं, जो खाया पिया नहीं पचा पाते।
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इस तरह करें बचाव और बरतें सावधानी
- रोगों से बचाने के लिए साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें।
- नौ माह की आयु तक बच्चे को मां अपना दूध पिलाएं।
- जन्म से लेकर दो साल तक बच्चे रोज तीन कप दूध दें।
- रोजाना दो कटोरी दाल और दलिया दिया जाए।
- बच्चे को उबला हुआ पानी ठंडा कर पिलाएं।
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बाल विकास व पुष्टाहार विभाग के तहत जिलेभर में 1314 आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन होता है। जहां 1,25,643 बच्चे पंजीकृत हैं। इन केंद्रों के माध्यम से गर्भवती और धात्री महिलाओं को पूरक व पुष्टाहार का वितरण भी किया जाता है। जिससे उनको पौष्टिकता से भरपूर आहार मिल सके, लेकिन इसके बाद भी बच्चों में पोषण की कमी देखी जा रही है।
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जिलेभर में 5949 बच्चे कुपोषण का दंश झेल रहे हैं। वजह कुछ भी हो, लेकिन ऐसे में इन मासूम बच्चों को बचपन कुपोषण से जूझते हुए बीत रहा है। ऐसे बच्चों को कुपोषण से बाहर लाने के लिए सरकार भरपूर प्रयास कर रही है। वजह कुछ भी रहे, लेकिन ऐसे में इन मासूम बच्चों को बचपन कुपोषण से जूझते हुए बीतता है।
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ऐसे बच्चों को कुपोषण से बाहर लाने के लिए केंद्रों पर समय-समय पर बच्चों का वजन व देखभाल की जाती है। जिला स्तर पर सरकारी अस्पताल में ऐसे बच्चों के लिए पोषण पुर्नवास केंद्र बनाया गया है। जहां उनको भर्ती रखकर भरपूर पोषण देने का प्रयास किया जाता है। पोषण पुर्नवास केंद्र पर फिलहाल करीब छह बच्चों का उपचार चल रहा है। बच्चों के अभिभावकों को बच्चों के लिए दलिया, दाल, तेल व फोर्टिफाइड चावल आदि भी उपलब्ध कराया जाता है।
डीएम ने बनाई सुपर 45 टीम
बच्चों को कुपोषण की श्रेणी बाहर लाए जाने के लिए डीएम निधि गुप्ता वत्स ने भी सुपर 30 की टीम बनाई थी। इसमें काफी बच्चों के कुपोषण से बाहर आने के बाद अब उन्होंने सुपर-45 टीम बनाई है। जिसमें डीएम समेत सीडीओ, परियोजना निदेशक, बीएसए, डीपीआरओ, जिला कार्यक्रम अधिकारी समेत 45 अधिकारियों को अलग-अलग गांवों के कुपोषित बच्चों की जिम्मेदारी दी गई है। जिसमें अधिकारियों द्वारा ऐसे परिवारों को सरकारी की योजनाओं का लाभ दिलाने की जिम्मेदारी दी गई है। जिससे उनकी आय का कुछ स्रोत बने, और उनके खान-पान में भी सुधार हो। जिससे बच्चे कुपोषण की श्रेणी से बाहर आ सकें।
20818 गर्भवती व धात्री महिलाएं को मिलता है पूरक आहार
बाल विकास व पुष्टाहार विभाग के अनुसार जिले में 1,41,430 लाभार्थी हैं। जिसमें 11,134 गर्भवती व 9684 धात्री महिलाएं शामिल हैं। इनको पोषण युक्त पुष्टाहार का वितरण किया जाता है। इसके अलावा छह माह से तीन साल के 76,916 व तीन साल से छह माह के 42,960 बच्चे पुष्टाहार पा रहे हैं।
ब्लाॅक में इतनी है कुपोषित बच्चों की संख्या
ब्लॉक (परियोजना) - अतिकुपोषित (सैम) - कुपोषित (मैम)
अमरोहा शहर- - 85 - 559
अमरोहा देहात - 177 - 653
धनौरा - 132 - 493
गजरौला - 203 - 628
गंगेश्वरी - 226 - 1006
हसनपुर - 120 - 747
जोया - 87 - 833
जिले में कुपोषित बच्चों को स्वस्थ बनाए जाने के लिए लगातार प्रयास हो रहे हैं। कुपोषित बच्चों को पोषण पुर्नवास केंद्र पर भी भर्ती कराया जाता है। अधिकारियों ने भी कुपोषण की श्रेणी वाले गांवों को गोद लिया है। जिससे स्थिति में सुधार भी हुआ है। - संजीव कुमार, प्रभारी जिला कार्यक्रम अधिकारी
कुपोषित बच्चों के आहार
- तीन साल के बच्चे को 24 घंटे में दो कप दूध, दो कटोरी दाल, 3-4 कटोरी मिक्स अनाज छह से आठ बार खिलाना ठीक रहता है।
- बच्चों को साफ पानी ही देना चाहिए।
- कोई भी संक्रमण होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
- छह माह के बच्चों को मां के दूध के अलावा दो कटोरी मसला हुआ खाना दिनभर में थोड़-थोड़ा कर के खिलाना चाहिए।
- आठ से दस महीनों के बच्चों को मां के दूध के अलावा तीन कटोरी प्रोटीन युक्त खाना दिनभर में खिला देना चाहिए।
- हर मौसम में विभिन्न मौसमी फलों या उनके रस को बच्चों को दें।
कुपोषण के लक्षण
- जन्म के समय दो किलो से कम वजन होना।
- बच्चे में चिड़चिड़ापन और सुस्ती रहना।
- बार-बार बीमारियों की चपेट में आना।
- बच्चे में उम्र के साथ वजन न बढ़ना।
- कई बच्चे ऐसे होते हैं, जो खाया पिया नहीं पचा पाते।
इस तरह करें बचाव और बरतें सावधानी
- रोगों से बचाने के लिए साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें।
- नौ माह की आयु तक बच्चे को मां अपना दूध पिलाएं।
- जन्म से लेकर दो साल तक बच्चे रोज तीन कप दूध दें।
- रोजाना दो कटोरी दाल और दलिया दिया जाए।
- बच्चे को उबला हुआ पानी ठंडा कर पिलाएं।