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दस वर्ष में भी नहीं बन सका महिला छात्रावास
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जगदीशपुर (अमेठी)। औद्योगिक क्षेत्र में संचालित संजय गांधी पॉलीटेक्निक में अध्ययनरत छात्राओं को परिसर में मिलने वाली छात्रावास की सुविधा पिछले दस वर्षों से अधर में लटकी है। संशोधित बजट मंजूर होने के बावजूद अब तक छात्रावास का निर्माण कार्य पूरा नहीं हो सका है। इसके कारण छात्राओं को मजबूरन कस्बे में किराए पर कमरा लेकर रहना पड़ता है।
संजय गांधी पॉलीटेक्निक में अध्ययनरत छात्राओं को कैंपस में हॉस्टल की सुविधा मिल सके इसके लिए 92.79 लाख रुपये की लागत से 60 बेड के छात्रावास निर्माण को मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने वर्ष 2010-11 में मंजूरी दी थी। हॉस्टल निर्माण के लिए 50 लाख रुपये की राशि पहली किस्त 20 दिसंबर 2010 को विद्यालय के खाते में भेजी गई थी।
विद्यालय के खाते में राशि आने के बाद प्रधानाचार्य ने 2.24 प्रतिशत की दर से 1.12 लाख रुपये आयकर कटौती कर 48 लाख 88 हजार रुपये कार्यदायी संस्था उत्तर प्रदेश श्रम एवं निर्माण सहकारी संघ लिमिटेड अयोध्या के खाते में भेजा था। राशि मिलने के बाद कार्यदायी संस्था ने काम शुरू किया। हालांकि कुछ ही दिनों में संस्था ने बजट को कम बताते हुए इसे बढ़ाने की मांग की।
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कार्यदायी संस्था की मांग पर संशोधित बजट में इसे बढ़ाकर एक करोड़ 33 लाख 37 हजार रुपये कर दिया गया। बजट संशोधित होने के बाद 62 लाख 97 हजार रुपये की दूसरी किस्त छह मार्च 2019 को कार्यदायी संस्था के खाते में भेजी गई।
बावजूद इसके कार्यदायी संस्था निर्माण कार्य पूरा नहीं कर सकी है। जो निर्माण हुआ भी है वह क्षतिग्रस्त हो रहा है। ऐसी स्थिति में अध्ययनरत छात्राएं कस्बे में किराए पर कमरा लेकर रहने को मजबूर हैं। प्रधानाचार्य एसपी वाष्णेय का कहना है कि कार्यदायी संस्था से कई बार पत्राचार किया गया लेकिन वह कोई जवाब नहीं दे रही। इस संबंध में शासन को पत्र भेजकर काम पूरा कराने की मांग की गई है।
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संजय गांधी पॉलीटेक्निक में अध्ययनरत छात्राओं को कैंपस में हॉस्टल की सुविधा मिल सके इसके लिए 92.79 लाख रुपये की लागत से 60 बेड के छात्रावास निर्माण को मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने वर्ष 2010-11 में मंजूरी दी थी। हॉस्टल निर्माण के लिए 50 लाख रुपये की राशि पहली किस्त 20 दिसंबर 2010 को विद्यालय के खाते में भेजी गई थी।
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विद्यालय के खाते में राशि आने के बाद प्रधानाचार्य ने 2.24 प्रतिशत की दर से 1.12 लाख रुपये आयकर कटौती कर 48 लाख 88 हजार रुपये कार्यदायी संस्था उत्तर प्रदेश श्रम एवं निर्माण सहकारी संघ लिमिटेड अयोध्या के खाते में भेजा था। राशि मिलने के बाद कार्यदायी संस्था ने काम शुरू किया। हालांकि कुछ ही दिनों में संस्था ने बजट को कम बताते हुए इसे बढ़ाने की मांग की।
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कार्यदायी संस्था की मांग पर संशोधित बजट में इसे बढ़ाकर एक करोड़ 33 लाख 37 हजार रुपये कर दिया गया। बजट संशोधित होने के बाद 62 लाख 97 हजार रुपये की दूसरी किस्त छह मार्च 2019 को कार्यदायी संस्था के खाते में भेजी गई।
बावजूद इसके कार्यदायी संस्था निर्माण कार्य पूरा नहीं कर सकी है। जो निर्माण हुआ भी है वह क्षतिग्रस्त हो रहा है। ऐसी स्थिति में अध्ययनरत छात्राएं कस्बे में किराए पर कमरा लेकर रहने को मजबूर हैं। प्रधानाचार्य एसपी वाष्णेय का कहना है कि कार्यदायी संस्था से कई बार पत्राचार किया गया लेकिन वह कोई जवाब नहीं दे रही। इस संबंध में शासन को पत्र भेजकर काम पूरा कराने की मांग की गई है।