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Amethi News: मिट्टी के बर्तन बनाकर महिलाएं बनीं आत्मनिर्भर
Tue, 17 Jun 2025 12:31 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Tue, 17 Jun 2025 12:31 AM IST
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सति्थन गांव के अब्दुल लतीफ शाहबाबा स्वयं सहायता समूह की ओर से तैयार हो रहे मिट्टी के बर्तन व ख
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अमेठी सिटी। बाजारशुकुल के सत्थिन गांव का अब्दुल लतीफ शाहबाबा स्वयं सहायता समूह महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रहा है। समूह की महिलाओं से प्रेरित होकर गांव की अन्य महिलाएं आर्थिक रूप से समृद्ध हो रही हैं। समूह की महिलाएं मिट्टी के बर्तन व खिलौनों का कारोबार कर अपनी आमदनी बढ़ा रही हैं।
बूबूपुर गांव की समूह सखी किरन ने दिसंबर 2024 में सत्थिन गांव की महिलाओं को समूह से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। गांव की महिलाओं ने 50 रुपये जमा करके बीती एक जनवरी में अब्दुल लतीफ शाहबाबा स्वयं सहायता समूह का गठन किया। समूह में अध्यक्ष अजमेरून, सचिव रामदेई, कोषाध्यक्ष रेशमा और सदस्य सबीना, फातिमा, माधुरी, विमला, जुलेखा, मुन्नी, सुंदरकली, साफिया, खैरुन्निशा हैं। समूह की अध्यक्ष ने बताया कि समूह की महिलाओं के अलावा 12 अन्य महिलाएं रोजगार से जुड़ी हैं।
बताया कि बहुत कम लागत में करीब तीन हजार रुपये से मिट्टी के बर्तन बनाने का कार्य शुरू किया है। इस समय मिट्टी से कुल्हड़, घड़ा, सुराही, कप, गमला, मिट्टी के खिलौने आदि तैयार कर बाजार व मेले में बेच रही हैं। बताया कि लखनऊ में महिलाओं के बनाए गए मिट्टी के बर्तनों की मांग अधिक रहती है। इसके अलावा स्थानीय बाजार के साथ आसपास के जिलों में आयोजित मेले व प्रदर्शनी में भी महिलाएं बर्तन व खिलौनों की बिक्री करती हैं। अध्यक्ष ने बताया कि प्रति महिला बर्तन व खिलौने बनाकर करीब 3000 रुपये प्रति माह की आमदनी कर रहीं है। बताया कि गांव की अन्य महिलाएं प्रेरित होकर मिट्टी के बर्तन व खिलौने बनाने का कार्य कर रहीं हैं।
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बूबूपुर गांव की समूह सखी किरन ने दिसंबर 2024 में सत्थिन गांव की महिलाओं को समूह से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। गांव की महिलाओं ने 50 रुपये जमा करके बीती एक जनवरी में अब्दुल लतीफ शाहबाबा स्वयं सहायता समूह का गठन किया। समूह में अध्यक्ष अजमेरून, सचिव रामदेई, कोषाध्यक्ष रेशमा और सदस्य सबीना, फातिमा, माधुरी, विमला, जुलेखा, मुन्नी, सुंदरकली, साफिया, खैरुन्निशा हैं। समूह की अध्यक्ष ने बताया कि समूह की महिलाओं के अलावा 12 अन्य महिलाएं रोजगार से जुड़ी हैं।
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बताया कि बहुत कम लागत में करीब तीन हजार रुपये से मिट्टी के बर्तन बनाने का कार्य शुरू किया है। इस समय मिट्टी से कुल्हड़, घड़ा, सुराही, कप, गमला, मिट्टी के खिलौने आदि तैयार कर बाजार व मेले में बेच रही हैं। बताया कि लखनऊ में महिलाओं के बनाए गए मिट्टी के बर्तनों की मांग अधिक रहती है। इसके अलावा स्थानीय बाजार के साथ आसपास के जिलों में आयोजित मेले व प्रदर्शनी में भी महिलाएं बर्तन व खिलौनों की बिक्री करती हैं। अध्यक्ष ने बताया कि प्रति महिला बर्तन व खिलौने बनाकर करीब 3000 रुपये प्रति माह की आमदनी कर रहीं है। बताया कि गांव की अन्य महिलाएं प्रेरित होकर मिट्टी के बर्तन व खिलौने बनाने का कार्य कर रहीं हैं।
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