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Amethi News: मजबूत इच्छाशक्ति से रेनु ने बनाई खुद की अलग पहचान
Thu, 15 Jan 2026 12:02 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Thu, 15 Jan 2026 12:02 AM IST
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अमेठी सिटी। सीमित शिक्षा, पारिवारिक जिम्मेदारियों और आर्थिक अभाव के बीच मजबूत इच्छाशक्ति ने रेनू को सफलता के शिखर तक पहुंचाया। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़कर भेटुआ के टिकरी निवासी रेनू ने ग्रामीण अंचल में महिला सशक्तीकरण की सशक्त मिसाल कायम की है।
बजरंगी स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद अपनी लगन और निरंतर परिश्रम के दम पर रेनु न केवल खुद को आत्मनिर्भर बनाया, बल्कि अलग पहचान देकर अन्य महिलाओं को भी आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।
आठवीं कक्षा तक शिक्षित रेनू अपने परिवार में पति, सास-ससुर, एक पुत्र और एक पुत्री के साथ रहती हैं। स्वयं सहायता समूह से जुड़ाव से पहले परिवार की आय अस्थिर रही। घरेलू सीमाओं में सिमटा जीवन आत्मविश्वास को कमजोर करता रहा।
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ऐसे समय में आजीविका मिशन से जुड़ना उनके जीवन का निर्णायक मोड़ बना। एक अप्रैल 2013 को बजरंगी स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद रेनू ने समूह की कार्यप्रणाली को गंभीरता से समझा।
समूह सहयोग से ऋण प्राप्त कर धूपबत्ती निर्माण मशीन खरीदी। घर से शुरू हुआ यह छोटा कार्य धीरे-धीरे नियमित आय का मजबूत आधार बन गया। आर्थिक मजबूती के साथ आत्मविश्वास भी नई ऊंचाई पर पहुंचा।
निरंतर मेहनत, अनुशासन और नेतृत्व क्षमता को देखते हुए समूह की महिलाओं ने रेनू को समूह सखी की जिम्मेदारी सौंपी।
नवंबर 2021 में प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद उन्होंने कई स्वयं सहायता समूहों का मार्गदर्शन शुरू किया। वर्तमान समय में रेनू गांव और आसपास के क्षेत्रों में महिलाओं को समूहों से जोड़ने, बीमा योजनाओं की जानकारी देने और आजीविका के नए अवसरों से जोड़ने में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।
रेनू का समूह क्षेत्र के सबसे पुराने और सशक्त समूहों में शामिल है, जो सामाजिक जागरूकता और आर्थिक स्वावलंबन का प्रभावी उदाहरण प्रस्तुत करता है।
उनकी संघर्षपूर्ण यात्रा यह साबित करती है कि दृढ़ इच्छाशक्ति और सही मार्गदर्शन के सहारे महिलाएं हर बाधा पार कर समाज में सकारात्मक बदलाव की वाहक बन सकती।
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बजरंगी स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद अपनी लगन और निरंतर परिश्रम के दम पर रेनु न केवल खुद को आत्मनिर्भर बनाया, बल्कि अलग पहचान देकर अन्य महिलाओं को भी आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।
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आठवीं कक्षा तक शिक्षित रेनू अपने परिवार में पति, सास-ससुर, एक पुत्र और एक पुत्री के साथ रहती हैं। स्वयं सहायता समूह से जुड़ाव से पहले परिवार की आय अस्थिर रही। घरेलू सीमाओं में सिमटा जीवन आत्मविश्वास को कमजोर करता रहा।
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ऐसे समय में आजीविका मिशन से जुड़ना उनके जीवन का निर्णायक मोड़ बना। एक अप्रैल 2013 को बजरंगी स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद रेनू ने समूह की कार्यप्रणाली को गंभीरता से समझा।
समूह सहयोग से ऋण प्राप्त कर धूपबत्ती निर्माण मशीन खरीदी। घर से शुरू हुआ यह छोटा कार्य धीरे-धीरे नियमित आय का मजबूत आधार बन गया। आर्थिक मजबूती के साथ आत्मविश्वास भी नई ऊंचाई पर पहुंचा।
निरंतर मेहनत, अनुशासन और नेतृत्व क्षमता को देखते हुए समूह की महिलाओं ने रेनू को समूह सखी की जिम्मेदारी सौंपी।
नवंबर 2021 में प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद उन्होंने कई स्वयं सहायता समूहों का मार्गदर्शन शुरू किया। वर्तमान समय में रेनू गांव और आसपास के क्षेत्रों में महिलाओं को समूहों से जोड़ने, बीमा योजनाओं की जानकारी देने और आजीविका के नए अवसरों से जोड़ने में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।
रेनू का समूह क्षेत्र के सबसे पुराने और सशक्त समूहों में शामिल है, जो सामाजिक जागरूकता और आर्थिक स्वावलंबन का प्रभावी उदाहरण प्रस्तुत करता है।
उनकी संघर्षपूर्ण यात्रा यह साबित करती है कि दृढ़ इच्छाशक्ति और सही मार्गदर्शन के सहारे महिलाएं हर बाधा पार कर समाज में सकारात्मक बदलाव की वाहक बन सकती।