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धरतीपुत्र के निधन पर जिले में शोक की लहर

Mon, 10 Oct 2022 11:10 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Mon, 10 Oct 2022 11:10 PM IST
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Wave of mourning in the district on the death of Mulayam Singh
गौरीगंज (अमेठी)। सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव के निधन पर पूरे जिले में शोक की लहर दौड़ गई। लोगों ने भावभीनी श्रद्धांजलि देकर उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की तो कहीं सुनहरी यादों से आंखें नम हो गईं। अमेठी से नेताजी का गहरा नाता था। अमेठी विधायक महराजी देवी, गौरीगंज विधायक राकेश प्रताप सिंह ने मुलायम सिंह के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। सपा नेता प्रियंक हरि विजय तिवारी, पूर्व जिलाध्यक्ष छोटेलाल यादव व रघुवीर यादव मौजूदा जिलाध्यक्ष राम उदित यादव, पूर्व ब्लॉक प्रमुख रमाशंकर सिंह, जय सिंह प्रताप यादव, चंद्र प्रकाश यादव आदि ने मुलायम के निधन को व्यक्तिगत क्षति बताया है। राम उदित ने कहा कि नेताजी के निधन से उन्हें गहरा झटका लगा है। वे हमेशा कार्यकर्ताओं के दिलों में बने रहेंगे।
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शिव हरि विजय की मौत पर बिलख उठे थे नेताजी
गौरीगंज (अमेठी)। नंदमहर के रहने वाले शिव हरि विजय तिवारी का परिवार उन विरले परिवारों में था जिन्हें मुलायम सिंह यादव का भरपूर स्नेह मिला। बताते हैं कि शिव हरि विजय की मौत पर मुलायम फूट फूट कर रो पड़े थे।
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सोमवार सुबह मुलायम के दिवंगत होने की सूचना सार्वजनिक हुई तो शिव हरि विजय के पुत्र प्रियंक हरि विजय तिवारी ‘धीरू’ फफक कर रो पड़े। नेताजी के अंतिम दर्शन के लिए वह तत्काल सैफई के लिए निकल गए। मोबाइल से हुई बातचीत में धीरू ने कई संस्मरण सुनाए। उन्होंने बताया कि परिवार से नेताजी का जुड़ाव 1977 के पहले से था। तब उनके बड़े पिता राम हरि विजय तिवारी मैनपुरी के सिविल जज हुआ करते थे। मुलायम का बड़े पिताजी से अक्सर मिलना हुआ करता था।
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इसी दौरान मेरे पिताजी की उनसे कई मुलाकात हुई। मुलायम सिंह उन्हें छोटा भाई मानने लगे। बताया कि मेरे पिताजी अमेठी में कांग्रेस की राजनीति करते थे। वर्ष 1993 में कांग्रेस ने अंतिम समय में पिताजी को विधानसभा टिकट नहीं दिया। नेताजी से संबंध इतने प्रगाढ़ रहे कि इसकी भनक जैसे ही उन्हें लगी उन्होंने अपने घोषित उम्मीदवार शिव प्रसाद कश्यप का टिकट काटकर मेरे पिताजी को सपा का टिकट दे दिया। प्रचार करने भी आए।
गौरीगंज के चौहान बाग में जनसभा की। पिताजी चुनाव हार गए। बावजूद इसके 1996 में फिर टिकट दिया और पुन: प्रचार में आए। इस बार भी सफलता नहीं मिली। 27 अक्तूबर 1997 को पिताजी का निधन हो गया। तब मेरी उम्र 17 साल थी। सूचना मिली तो मुलायम फफक कर रो पड़े। 27 अक्तूबर 1998 को पिताजी की पहली पुण्यतिथि पर घर आए थे। उनकी प्रतिमा का अनावरण करने के बाद बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी के बीच अचानक मुझे आगे कर दिया। कहा, इस लड़के को आपकी सेवा में देकर जा रहा हूं। इससे कोई भूल हो जाए तो मेरी मित्रता में माफ कर देना। (संवाद)
दौड़ते हुए चढ़े थे मंच पर
धीरू ने बताया कि 2002 के विधानसभा चुनाव में मैं 22 साल का था। नेताजी ने मुझे बुलाकर टिकट दिया। प्रचार करने भी आए। जिस दिन नेताजी मेरे प्रचार में आए वह प्रचार का अंतिम दिन था। नेताजी का हेलीकॉप्टर करीब 4:30 बजे चौहान बाग पहुंचा।
नेताजी उतरकर दौड़ते हुए मंच पर पहुंचे। पांच बजे तक लोगों को संबोधित किया इसके बाद नीचे उतरकर लोगों के बीच पहुंचे और मेरे लिए वोट मांगा। हारने के बावजूद 2003 के उपचुनाव में पुन: टिकट दिया। मेरे लिए विधानसभा क्षेत्र के तीनों ब्लॉकों में जनसभा की।
पार्टी लाइन तोड़ बना दिया जिलाध्यक्ष
धीरू ने बताया कि 2002 में मायावती ने अमेठी को छत्रपति शाहूजी महराज नगर के नाम से जिला बना दिया। 2003 में मैं किसी को पार्टी जिलाध्यक्ष बनवाने के लिए कई अन्य लोगों के साथ मुलायम के पास गया था। नेताजी ने कहा मैं तुम्हें पार्टी जिलाध्यक्ष बनाना चाहता हूं। मैंने कहा नेताजी अभी मेरी उम्र महज 23 साल है। मैं कैसे इतना बड़ा पद संभाल पाऊंगा। नेताजी ने कहा कि मैं तुम्हें खुद से बड़ा बनाना चाहता हूं। फिर सबकी मौजूदगी में मुझे जिलाध्यक्ष घोषित कर दिया। इसके बाद मुझे पार्टी का प्रदेश कार्यसमिति सदस्य, अयोध्या मंडल का पार्टी प्रभारी व 2012 में फिर जिलाध्यक्ष बनाया।
बिना रामसुफल नामांकन नहीं करते थे मुलायम
संग्रामपुर (अमेठी)। अम्मरपुर निवासी राम सुफल पांडेय व मुलायम सिंह यादव की दोस्ती किसी से छिपी नहीं है। मुलायम सिंह यादव दोस्त के साथ ही राम सुफल को अपना गुरु मानते थे।
मुलायम सिंह यादव ने राजनीति में आने से पहले राम सुफल पांडेय से अपनी कुंडली बनवाई थी। मुलायम सिंह यादव ने अभी तक जितने भी चुनाव लड़े उन्हें पर्चा खरीदने से लेकर नामांकन करने तक का दिन और समय रामसुफल पांडेय ही बताते थे।
नामांकन करते समय उन्हें अपने साथ भी रखते थे। यही कारण है कि मुख्यमंत्री रहते हुए दो बार उनके यहां तो बाद में तीन बार उनके आवास अम्मरपुर पहुंचे। मुलायम सिंह यादव राम सुफल पांडेय से हर बात में सलाह लेते थे। राम सुफल पांडेय मंत्र विज्ञान एवं ज्योतिषी से पीएचडी हैं। सोमवार को मुलायम सिंह यादव के निधन की सूचना पाकर राम सुफल पांडेय भावुक हो गए।
उन्होंने कहा पूरा जीवन मुलायम सिंह यादव के अच्छे और बुरे दिनों में वह उनके साथ रहे। 57 साल से उनके अच्छे संबंध हैं। नेता तो हजारों है पर मुलायम सिंह जैसा कोई नहीं। आज एक युग का अंत हो गया है। उन्होंने मुलायम सिंह से जुड़ी हुई कई बातें साझा कीं।
ऐसे हुई थी पहली मुलाकात
राम सुफल पांडेय की पहली मुलाकात सपा संरक्षक मुलायम सिंह से वर्ष 1965 में हुई थी। उस समय राम सुफल पांडेय मुलायम सिंह के घर के समीप जसवंत नगर ब्लॉक में बीडीओ थे। तब मुलायम जैन इंटर कालेज में शिक्षक थे। विद्यालय के किसी काम के सिलसिले से वह ब्लॉक में आये थे। उसी समय दोनों लोगों की पहली मुलाकात हुई।
बेटे की बरात में आए थे नेताजी
राम सुफल पांडेय से नेताजी का बड़ा लगाव था। वर्ष 1966 व 1967 में नेताजी राम सुफल पांडेय से व्यक्तिगत कार्य से पहली बार गांव में मिलने आए। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहते हुए 11 मई 1995 को राम सुफल के बेटे अरविंद की बरात में शामिल हुए। मुख्यमंत्री रहते दूसरी बार नौ मई 2004 को राम सुफल की बेटी अंकिता की शादी में गांव आए थे। घर के समीप ही हेलीपैड बना था।
एक माह पहले हुई थी आखिरी मुलाकात
राम सुफल पांडेय ने बताया कि नेताजी से आखिरी मुलाकात एक महीने पहले लखनऊ में हुई थी। जैसे उनके पास गए पूछा पंडित जी कैसे हैं। सब बढ़िया। उन्होंने घर वालों का हालचाल भी लिया था। राम सुफल ने बताया कि नेताजी हमसे 40 दिन बड़े थे। पहली मुलाकात के बाद उनसे प्रतिदिन प्रेम बढ़ता गया। बीते दो साल से वह लगातार बीमार चल रहे थे। जिसके बाद भी वह महीने में एक से दो बार खुद ही फोन कर हाल-चाल लेते रहते थे।
पंडित जी लड़ जाइए चुनाव
राम सुफल ने बताया कि नेताजी जब भी मिलते कहते पंडित जी नौकरी छोड़ लड़ जाइए चुनाव। पर हर बार मैं मना कर देता। नेता जी कहते पंडित जी आप राजनीति से इतना भागते क्यों है। जहां से आप चाहें वहां से चुनाव लड़ जाएं। राम सुफल पांडेय बताते हैं कि विधानसभा चुनाव टिकट बंटवारे में एक सीट पर कई प्रबल दावेदार आ जाने पर नेताजी फिर हमको बुलाते। कहते पंडित जी बताइए किसके भाग्य प्रबल दिख रहे हैं। जिसको हम बता देते थे नेताजी फिर उसी को टिकट देते थे।
गायत्री प्रजापति को बेटे की तरह मानते थे मुलायम
अमेठी। ब्लॉक अमेठी के गांव परसावां निवासी गायत्री प्रजापति नेताजी मुलायम सिंह यादव के बेहद करीबियों में गिने जाते थे। गायत्री ने सपा सरकार के पांच वर्ष के कार्यकाल में विधायक बनने के बाद चार बार अलग-अलग मंत्री पद की शपथ ली थी।
स्थानीय ब्लॉक के गांव परसावां निवासी गायत्री प्रसाद प्रजापति दूसरी पार्टी से वर्ष 1993 में विधानसभा चुनाव लड़ने के बाद नेताजी मुलायम सिंह यादव के गृह जनपद के एमएलसी/विधायक दयाराम प्रजापति के साथ पहली बार नेता जी से मुलाकात हुई। उसके बाद गायत्री लगातार नेताजी से प्रभावित होकर उनके सभी कार्यक्रमों में पूरी सक्रियता से जुट गए। वर्ष 1996 में नेताजी ने गायत्री प्रजापति को अमेठी से टिकट दिया।
सपा के लोगों के अनुसार नेताजी गायत्री प्रजापति को बेटे की तरह मानते थे। इसके बाद वर्ष 2002 में पार्टी विधानसभा क्षेत्र का एक खेमा गायत्री प्रजापति को टिकट न देने के विरोध में था बावजूद इसके नेता जी ने सभी कार्यकर्ताओं को समझाते हुए कहा कि गायत्री बेटे जैसा है यह चुनाव लड़ रहा है सब लोग एक साथ मेहनत करो। नेता जी ने रामलीला मैदान में सभा को संबोधित किया। यह पहली बार था जब रामलीला मैदान में हेलीकॉप्टर उतरा था।
चुनाव हारने के बाद भी गायत्री प्रजापति लगातार नेताजी के करीबियों में बने रहे। लोगों के अनुसार वर्ष 2012 में नेताजी के कहने पर ही गायत्री प्रजापति को अमेठी विधानसभा से टिकट मिला। विधायक बनने के बाद नेताजी मुलायम सिंह यादव के कहने पर पहले सिंचाई मंत्री और फिर स्वतंत्र प्रभार मंत्री बने। नजदीकियाें के चलते स्वतंत्र प्रभार मंत्री बनने के बाद फिर खनन विभाग के कैबिनेट मंत्री बनाए गए।
सितंबर 2016 में आरोपों के चलते कैबिनेट मंत्री पद से गायत्री को हटाया गया। लेकिन दो हफ्ते बाद ही फिर कैबिनेट में शामिल कर परिवहन विभाग का मंत्री बनाया गया। वर्ष 2017 में नेताजी के दखल से गायत्री को विधानसभा का टिकट मिला था। गायत्री प्रजापति के बेटे अनिल प्रजापति भावुक हो गए। कहा कि उनके पिताजी नेताजी को भगवान की तरह मानते थे। लेकिन अंतिम दर्शन नहीं कर पा रहे हैं।
सबसे बड़े थे कार्यकर्ता
नेताजी मुलायम सिंह यादव के व्यक्तित्व और उनके प्रेम को हम कभी भूल नहीं पाएंगे। रूंधे गले से नेताजी को याद करते हुए स्थानीय ब्लॉक के वरिष्ठ सपा नेता पूर्व प्रमुख रमाशंकर बताते हैं कि वर्ष 1993 में मैं लखनऊ गया था। सपा कार्यालय पहुंच कर जिज्ञासा बस नेताजी से मुलाकात की। नेता जी के विचारों और उनके व्यवहार से प्रभावित होकर मैं उनसे जुड़ा। उन्होंने बताया कि नेताजी से कई बार आवास पर मुलाकात हुई। वर्ष 1994 में सपा से प्रमुख बने। वर्ष 2000 में विधानसभा का चुनाव लड़े।
सिर से उठा पिता का साया
पूर्व मुख्यमंत्री एवं सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव के निजी छायाकार स्थानीय ब्लॉक के ओझा पुरवा गांव निवासी उदय राज यादव उनके संस्मरण को याद कर रोते हुए कहते हैं कि आज पिता का साया उनके सर से उठ गया। उदयराज ने बताया कि 1993 से नेताजी के विचारों से जुड़े। 1994 में नेताजी को पहली बार देखा।
1996 में निजी फोटोग्राफर के रूप में उदय राज यादव नेताजी के फोटोग्राफर बन गए। कहा कि नेताजी हमेशा कार्यकर्ताओं के लिए सोचते थे। सभी का हाल-चाल पूछते थे। बताया कि कई बार पार्टी कार्यकर्ता व क्षेत्र के लोगों की समस्याओं के लिए अगर मैं उनसे कहता था तो तत्काल बुलाने के लिए कहते और फिर उसकी पूरी मदद करते थे। उदय राज के घर ओझा का पुरवा में सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव भी आ चुके हैं।
देवी शरण से थे करीबी संबंध
इन्हौना (अमेठी)। सेमरौता निवासी देवी शरण बाजपेई भी मुलायम के करीबियों में थे। उनकी मुलायम से कई मुलाकातें थीं। मुलायम उन्हें नाम लेकर बुलाते थे। देवी शरण बाजपेई बताते हैं कि मुलायम जैसा नेता न हुआ न होगा। (संवाद)
श्रद्धांजलि सभा का आयोजन
अमेठी। शहर के आवास विकास कॉलोनी स्थित विधायक महाराजी प्रजापति के कार्यालय पर सोमवार दोपहर बाद सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव के निधन पर शोक सभा का आयोजन किया गया। पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने मौन रख दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की। शोक सभा के बाद सपा कार्यालय पर तीन दिन का अवकाश घोषित किया गया।
इस मौके पर रमाशंकर प्रजापति, अनुराग प्रजापति, अरुण प्रजापति, रूदल यादव, श्रीनाथ यादव, महावीर कश्यप, सूबेदार यादव, हरिराम यादव, संदीप श्रीवास्तव, संकठा यादव, देवचंद्र सिंह मुन्ना, राजकुमार मौर्या, शेरबहादुर यादव, आरिफ खान, शंभू यादव, घनशयाम शर्मा, ओम प्रकाश यादव आदि मौजूद रहे। वहीं सपा नेता शिव प्रताप यादव की अगुवाई में शहर के बाईपास स्थित कार्यालय पर शोकसभा का आयोजन किया गया जिसमें मौजूद लोगों ने पुष्प अर्पित कर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव को श्रद्धांजलि दी। पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. संजय सिंह ने सपा संस्थापक के निधन पर गहरी शोक संवेदना व्यक्त की। जामा मस्जिद के सेक्रेटरी मो. लईक समेत क्षेत्र के अन्य लोगों ने नेताजी के निधन पर शोक संवेदना व्यक्त की है। (संवाद)

भारतीय राजनीति के एक युग का अंत
भादर (अमेठी)। ब्लॉक क्षेत्र के रामगंज स्थित सपा कार्यालय पर सोमवार को शोक सभा का आयोजन किया गया। पूर्व प्रमुख भादर अखिलेश यादव की अगुवाई में हुई शोक सभा में पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के निधन पर सपा कार्यकर्ताओं ने दो मिनट मौन रह कर श्रद्धांजलि अर्पित की। पूर्व प्रमुख ने शोक संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि भारतीय राजनीति के एक युग का अंत हो गया। नेताजी ने समाज के अंतिम पायदान पर खड़े लोगों से लेकर समाज के हर जाति वर्ग के लोगों का बिना किसी भेदभाव के विकास किया। इस मौके पर प्रधान बृजेश यादव, राम मनोहर यादव व राम कुबेर यादव आदि मौजूद रहे । (संवाद)

3 : संग्रामपुर : नामांकन के दौरान मुलायम सिंह यादव के साथ मौजूद रामसुफल पांडेय (फाइल फोटो)। -संवाद

3 : संग्रामपुर : नामांकन के दौरान मुलायम सिंह यादव के साथ मौजूद रामसुफल पांडेय (फाइल फोटो)। -संवाद- फोटो : AMETHI

11 : गौरीगंज : नंदमहर में सपा नेता शिवहरि विजय तिवारी की प्रतिमा के अनावरण कार्यक्रम में मुलायम सिं?

11 : गौरीगंज : नंदमहर में सपा नेता शिवहरि विजय तिवारी की प्रतिमा के अनावरण कार्यक्रम में मुलायम सिं?- फोटो : AMETHI

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