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मिट्टी को बीमार बना रहा रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग
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अमेठी। अंतरराष्ट्रीय मृदा दिवस पर शनिवार को शहर के अंतू रोड स्थित ओम नगर में अमेठी जल बिरादरी की ओर से विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में वक्ताओं ने रासायनिक उर्वरक के प्रयोग से होने वाली हानियों को विस्तार से बताते हुए जैविक उर्वरक का प्रयोग करने की अपील की।
गोष्ठी को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग से समाप्त हो रही मिट्टी की उर्वरा शक्ति पर गहरी चिंता जताई। डॉ. धनंजय सिंह ने कहा कि मिट्टी हमारे जीवन का मूल तत्व है। रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग मिट्टी को बीमार बना रहा है। पर्यावरण प्रदूषण भी इसके लिए भयंकर संकट बन रहा है।
उन्होंने कहा कि मिट्टी की सेहत को सुधारने के लिए जैविक खेती को बढ़ावा देना होगा। किसानों की दशा पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि कोरोना संकट के बाद हर वस्तु के दाम बढ़े, किंतु धान और गेहूं का बाजारों में मूल्य घट गया। जो किसानों की आर्थिक स्थिति को प्रभावित कर रहा है।
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श्रीनाथ शुक्ला ने कहा कि मिट्टी का परीक्षण कराकर ही आवश्यक उर्वरक का प्रयोग कर किसान अच्छी उपज ले कर आय बढ़ा सकते है। डॉ. अर्जुन पांडेय ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि प्रकृति ने मानव को प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से उपभोग के लिए बहुत कुछ दिया।
आवश्यकतानुसार उपयोग लाभदायक तो अधिक उपयोग घातक सिद्ध होता है। उन्होंने किसानों के प्रशिक्षण और प्रारंभिक कक्षाओं में कृषि शिक्षा को अपरिहार्य बनाने की बात कही है। विचार गोष्ठी को धर्मेंद्र सिंह, जवाहर लाल वर्मा व जमुना प्रसाद वर्मा ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
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गोष्ठी को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग से समाप्त हो रही मिट्टी की उर्वरा शक्ति पर गहरी चिंता जताई। डॉ. धनंजय सिंह ने कहा कि मिट्टी हमारे जीवन का मूल तत्व है। रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग मिट्टी को बीमार बना रहा है। पर्यावरण प्रदूषण भी इसके लिए भयंकर संकट बन रहा है।
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उन्होंने कहा कि मिट्टी की सेहत को सुधारने के लिए जैविक खेती को बढ़ावा देना होगा। किसानों की दशा पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि कोरोना संकट के बाद हर वस्तु के दाम बढ़े, किंतु धान और गेहूं का बाजारों में मूल्य घट गया। जो किसानों की आर्थिक स्थिति को प्रभावित कर रहा है।
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श्रीनाथ शुक्ला ने कहा कि मिट्टी का परीक्षण कराकर ही आवश्यक उर्वरक का प्रयोग कर किसान अच्छी उपज ले कर आय बढ़ा सकते है। डॉ. अर्जुन पांडेय ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि प्रकृति ने मानव को प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से उपभोग के लिए बहुत कुछ दिया।
आवश्यकतानुसार उपयोग लाभदायक तो अधिक उपयोग घातक सिद्ध होता है। उन्होंने किसानों के प्रशिक्षण और प्रारंभिक कक्षाओं में कृषि शिक्षा को अपरिहार्य बनाने की बात कही है। विचार गोष्ठी को धर्मेंद्र सिंह, जवाहर लाल वर्मा व जमुना प्रसाद वर्मा ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।