UP : अमेठी में भीषण हादसा... बरात से लौटते समय बुलेट को डीसीएम ने मारी टक्कर, तीन की दर्दनाक मौत
अमेठी के थौरा गांव के पास बरात से लौट रहे तीन युवकों की बुलेट और डीसीएम की टक्कर में मौत हो गई। दो ने मौके पर दम तोड़ा, जबकि तीसरे की अस्पताल में मौत हुई।
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अमेठी में थौरा गांव के पास शुक्रवार देर रात बुलेट और डीसीएम में आमने-सामने टक्कर से तीन युवकों की मौत हो गई। महाराजपुर निवासी उत्कर्ष सिंह (सैनिक), बजरंग सिंह और अंशु सिंह पड़ोसी की शादी से लौट रहे थे। उत्कर्ष शुक्रवार दोपहर जम्मू से छुट्टी पर घर पहुंचे थे। परिवार से मिलकर शाम को सीधे दोस्त की शादी में शामिल होने गए। रात में वापसी के दौरान तीनों हादसे का शिकार हो गए।
तीनों शादी से लौट रहे थे
बारात महाराजपुर निवासी शेरा लाल कोरी के घर से हारीपुर गई थी। शादी समारोह से तीनों युवक लौट रहे थे। थौरा गांव की सीमा में उनकी बुलेट आगे से आ रही डीसीएम से टकरा गई। टक्कर में उत्कर्ष और बजरंग की घटनास्थल पर मौत हुई। अंशु को जिला अस्पताल पहुंचाया गया, जहां सुबह उसकी मौत हो गई। पुलिस ने शव कब्जे में लेकर पंचनामा भर पोस्टमार्टम के लिए भेजे। दुर्घटनाग्रस्त डीसीएम जब्त कर कानूनी कार्रवाई शुरू हुई।
गांव में सुबह मौत की सूचना पहुंचते ही माहौल शोक में बदल गया। परिजन और ग्रामीण स्तब्ध रह गए। तीनों परिवारों में रोने की आवाजें गूंजती रहीं। इंस्पेक्टर रवि सिंह ने बताया कि तहरीर मिलने पर प्रकरण दर्ज किया जाएगा।
छुट्टी पर आया बेटा…बस कुछ घंटों में हमेशा के लिए चला गया
उत्कर्ष सिंह (32) जम्मू में तैनात थे। शुक्रवार को छुट्टी लेकर घर पहुंचे थे। परिवार से मिलते ही शाम को दोस्त की शादी में पहुंचे। सुबह उनकी मौत की खबर आई तो परिवार टूट गया। पत्नी सोनम, बेटी माही (10) और रुद्र (8) लगातार रोते रहे। पिता शेर बहादुर बेटे पर निर्भर थे। छोटा भाई संदीप भी सेना में है।
शादी की तैयारी चल रही थी…सुबह घर में चीखें गूंज उठी
अंशु सिंह (30) बैजनाथ गांव का इकलौता बेटा था। घर में उसकी शादी की तैयारी चल रही थी। खेती की जिम्मेदारी उसी पर थी। उसकी मौत से परिवार की उम्मीदें टूट गईं। दो बहनें प्रतिमा और पूनम सदमे में हैं। माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल है।
रात तक हंसी थी…सुबह उसी घर में सन्नाटा फैला मिला
बजरंग सिंह (25) मेहनती और सरल स्वभाव का युवक था। दोस्तों के साथ बारात में गया था। लौटते समय उसकी मौत की खबर ने परिवार को गहरे दुख में डाल दिया। माता-पिता और रिश्तेदार उसे याद कर बिलखते रहे। गांव के लोग उसे शांत और सहयोगी स्वभाव के लिए जानते थे।