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Amethi: युवक की हत्या पर अमेठी पहुंचे कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष, बोले- शिकायत के बाद भी नहीं की गई कार्रवाई
Tue, 22 Apr 2025 02:44 PM IST
ishwar ashish
अमर उजाला नेटवर्क,अमेठी
अमर उजाला नेटवर्क,अमेठी
Published by: ishwar ashish
Updated Tue, 22 Apr 2025 02:44 PM IST
सार
अमेठी में युवक की नृशंस हत्या ने कानून-व्यवस्था और दलित सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पीड़ित परिवार ने पहले ही पुलिस को हमले की शिकायत दी थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने इसे बाबा साहब आंबेडकर के संविधान का अपमान बताया।
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अमेठी पहुंचे कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
अमेठी के जामो के कल्यानपुर में गांव में सोमवार रात दलित युवक की नृशंस हत्या ने न सिर्फ कानून-व्यवस्था की पोल खोल दी है, बल्कि दलित सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मृतक के परिजनों का आरोप है कि हत्या से पहले भी आरोपी परिवार पर हमला कर चुके थे, जिसकी शिकायत पुलिस को दी गई थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। परिजनों का कहना है कि यदि पुलिस ने समय रहते कार्रवाई की होती, तो यह हत्या टाली जा सकती थी।
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घटना के बाद कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय मृतक के घर पहुंचे और मृतक के परिजनों से मिलकर उन्हें ढांढस बंधाया। अजय राय ने प्रदेश सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि भाजपा सरकार दलितों के नाम पर केवल फोटोशूट और सम्मेलन कर रही है, जबकि ज़मीन पर उनकी सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश के विभिन्न जिलों में दलितों की हत्या, उत्पीड़न और जलाने की घटनाएं सामने आ रही हैं, जो संविधान निर्माता बाबा साहब भीमराव आंबेडकर के आदर्शों का सीधा अपमान है।
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राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच यह मामला एक बड़ी प्रशासनिक विफलता को उजागर करता है। जब पीड़ित पक्ष की शिकायतों को नजरअंदाज किया जाता है, तो यह ना सिर्फ अपराधियों के हौसले बढ़ाता है बल्कि समाज में कानून के प्रति विश्वास भी कमजोर होता है।
अब जब यह मामला सुर्खियों में आ चुका है। पीड़ित परिवार और समाज की मांग है कि इसकी सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में कराई जाए और आरोपियों को सख्त से सख्त सजा दी जाए साथ ही पुलिस तंत्र की भूमिका की निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों पर भी कार्रवाई की जाए।
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार भले ही जीरो टॉलरेंस की नीति की बात करती हो लेकिन जमीनी हकीकत इससे उलट नजर आती है। अगर 'बुलडोजर नीति' सच में अपराधियों के खिलाफ है, तो उसका प्रयोग केवल राजनीतिक प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहना चाहिए।