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अघोषित बिजली कटौती ने कर दिया बेहाल
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सिंहपुर (अमेठी)। विद्युत वितरण उपकेंद्र सेमरौता से लगातार हो रही अघोषित बिजली कटौती से आम जनमानस परेशान है। अप्रैल माह के शुरुआती दिनों में तेज गर्मी से जहां लोग अभी से बेहाल हैं वहीं बिजली कटौती ने परेशानी और बढ़ा दी है। जब आम ग्रामीणों का शाम को भोजन बनाने और खाने का समय होता है उसी समय बिजली उपकेंद्र से बिजली काट दी जाती है।
बीते पंद्रह दिनों से लगातार शाम सात बजे से नौ बजे के बीच बिना सूचना के लाइन का ब्रेक डाउन होना जारी है। यही नहीं आधे घंटे के अंतराल के बाद पुन: बिजली जानी तय है। ऐसे में गरीबों का भोजन बनना और खाना दोनों अंधेरे में हो रहा है। यह तो शाम की स्थिति है। इसके अलावा रात में बारह बजे से दो बजे के मध्य पुन: घंटे आधे घंटे के लिए बिजली कटौती होती है।
दिन की कटौती पहले की तरह टुकड़ों में चार बार होना तय है। सिंहपुर क्षेत्र के दांदूपुर गांव में बीते साल 132 केवीए के पावर हाउस निर्माण के बाद आम ग्रामीणों में यह आस बंधी थी कि लो वोल्टेज और अघोषित बिजली कटौती से राहत मिल मिलेगी। लेकिन गर्मी की शुरुआत होते ही विद्युत आपूर्ति अपने पुराने ढर्रे पर चल निकली है।
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मिट्टी का तेल बंद होने के चलते अब गांव के किसी घर में चिमनी/ढेबरी भी नहीं है। ऐसे में बिजली जाते ही अंधेरे में खाना बनाना और खाना होता है। जब ज्यादा जरूरत होती है उसी समय बिजली गायब होने से आम जनमानस दुखी है। लोग मोबाइल की लाइट में अपने जरूरी काम निपटाने को मजबूर हैं।
क्या कहते हैं ग्रामीण
खेखरुआ निवासी जितेंद्र सिंह का कहना है कि भाजपा सरकार की घोषणा है कि ग्रामीण क्षेत्र को अठारह घंटे बिजली और शहरी क्षेत्र को 24 घंटे बिजली आपूर्ति होगी। परंतु विद्युत वितरण उपकेंद्र सेमरौता के कर्मियों की हठधर्मिता के चलते उजाले में भोजन भी नहीं उपलब्ध हो पा रहा है। सेमरौता निवासी शैलेंद्र वर्मा कहते हैं कि भाजपा सरकार दूसरी बार अपने एजेंडे में बिजली के बिल कम कराने के नाम पर आई थी। बिल कम करने की कौन कहे अघोषित कटौती ही उपभोक्ताओं का सर दर्द बन चुकी है।
जेहटा उसरहा प्रधान प्रतिनिधि आशुतोष मिश्र ने कहा कि बीते दो साल से अधिक का समय बीत चुका है आम जनता को मिट्टी का तेल उपलब्ध नहीं है। ऐसे में गरीब किसान मजदूर मेहनत करने के बाद घर लौटता है। भोजन पानी की व्यवस्था में आता है। इस समय उजाले की जरूरत होती है। उसी समय बिजली कटौती के चलते वह अंधेरे में भोजन बनाने और करने को मजबूर है। पूरे लक्ष्मण देई निवासी अनिल पाठक ने कहा कि बीते बीस दिनों से शाम का भोजन बिजली के उजाले में नहीं मिला। चुनाव बाद भाजपा की सरकार तो बन गई है लेकिन बिजली की दयनीय स्थिति से आम जनमानस अपने आपको ठगा महसूस कर रहा है।
क्या कहते हैं जिम्मेदार
विद्युत वितरण उपकेंद्र सेमरौता के अवर अभियंता सरोज कुमार राजभर ने बताया कि अघोषित कटौती ऊपर के आदेश पर होती है। यह कटौती हमारे स्तर से नहीं होती है। हम इसमें कुछ नहीं कर सकते।
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बीते पंद्रह दिनों से लगातार शाम सात बजे से नौ बजे के बीच बिना सूचना के लाइन का ब्रेक डाउन होना जारी है। यही नहीं आधे घंटे के अंतराल के बाद पुन: बिजली जानी तय है। ऐसे में गरीबों का भोजन बनना और खाना दोनों अंधेरे में हो रहा है। यह तो शाम की स्थिति है। इसके अलावा रात में बारह बजे से दो बजे के मध्य पुन: घंटे आधे घंटे के लिए बिजली कटौती होती है।
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दिन की कटौती पहले की तरह टुकड़ों में चार बार होना तय है। सिंहपुर क्षेत्र के दांदूपुर गांव में बीते साल 132 केवीए के पावर हाउस निर्माण के बाद आम ग्रामीणों में यह आस बंधी थी कि लो वोल्टेज और अघोषित बिजली कटौती से राहत मिल मिलेगी। लेकिन गर्मी की शुरुआत होते ही विद्युत आपूर्ति अपने पुराने ढर्रे पर चल निकली है।
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मिट्टी का तेल बंद होने के चलते अब गांव के किसी घर में चिमनी/ढेबरी भी नहीं है। ऐसे में बिजली जाते ही अंधेरे में खाना बनाना और खाना होता है। जब ज्यादा जरूरत होती है उसी समय बिजली गायब होने से आम जनमानस दुखी है। लोग मोबाइल की लाइट में अपने जरूरी काम निपटाने को मजबूर हैं।
क्या कहते हैं ग्रामीण
खेखरुआ निवासी जितेंद्र सिंह का कहना है कि भाजपा सरकार की घोषणा है कि ग्रामीण क्षेत्र को अठारह घंटे बिजली और शहरी क्षेत्र को 24 घंटे बिजली आपूर्ति होगी। परंतु विद्युत वितरण उपकेंद्र सेमरौता के कर्मियों की हठधर्मिता के चलते उजाले में भोजन भी नहीं उपलब्ध हो पा रहा है। सेमरौता निवासी शैलेंद्र वर्मा कहते हैं कि भाजपा सरकार दूसरी बार अपने एजेंडे में बिजली के बिल कम कराने के नाम पर आई थी। बिल कम करने की कौन कहे अघोषित कटौती ही उपभोक्ताओं का सर दर्द बन चुकी है।
जेहटा उसरहा प्रधान प्रतिनिधि आशुतोष मिश्र ने कहा कि बीते दो साल से अधिक का समय बीत चुका है आम जनता को मिट्टी का तेल उपलब्ध नहीं है। ऐसे में गरीब किसान मजदूर मेहनत करने के बाद घर लौटता है। भोजन पानी की व्यवस्था में आता है। इस समय उजाले की जरूरत होती है। उसी समय बिजली कटौती के चलते वह अंधेरे में भोजन बनाने और करने को मजबूर है। पूरे लक्ष्मण देई निवासी अनिल पाठक ने कहा कि बीते बीस दिनों से शाम का भोजन बिजली के उजाले में नहीं मिला। चुनाव बाद भाजपा की सरकार तो बन गई है लेकिन बिजली की दयनीय स्थिति से आम जनमानस अपने आपको ठगा महसूस कर रहा है।
क्या कहते हैं जिम्मेदार
विद्युत वितरण उपकेंद्र सेमरौता के अवर अभियंता सरोज कुमार राजभर ने बताया कि अघोषित कटौती ऊपर के आदेश पर होती है। यह कटौती हमारे स्तर से नहीं होती है। हम इसमें कुछ नहीं कर सकते।