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Amethi News: पूजन-तर्पण के बाद निभाई जा रही परंपरा
Sat, 03 Oct 2026 12:37 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Sat, 03 Oct 2026 12:37 AM IST
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संग्रामपुर के टीकरमाफी में कौवे को भोजन कराने का इंतजार करते श्रद्धालु।-संवाद
अमेठी। पितृ पक्ष में पूर्वजों की आत्मा की शांति और तृप्ति की कामना को लेकर घर-घर श्राद्ध और तर्पण किया जा रहा है। सुबह स्नान और पूजन के बाद पितरों के निमित्त भोजन तैयार किया जाता है। श्राद्धकर्म पूरा होने के बाद भोजन का एक हिस्सा अलग निकालकर छत या आंगन में रखा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इसे कौवे को खिलाने की परंपरा है। कौवे को पितरों का प्रतीक माना जाता है और उसके भोजन ग्रहण करने को पितरों तक अर्पण पहुंचने से जोड़कर देखा जाता है।
आचार्य त्रिवेणी प्रसाद मिश्र ने बताया कि पितृ पक्ष में श्राद्ध और तर्पण के साथ पितरों के निमित्त भोजन निकालने की परंपरा है। कौवे को पितरों का प्रतीक मानकर भोजन कराया जाता है। कई परिवार भोजन रखने के बाद उसके आने की प्रतीक्षा भी करते हैं। उन्होंने बताया कि पेड़ों की संख्या कम होने और शहरीकरण बढ़ने से कई जगह कौवे कम दिखाई देते हैं।
ऐसी स्थिति में श्रद्धालु पितरों के निमित्त तैयार भोजन गाय या कुत्ते को करा सकते हैं। इनके उपलब्ध न होने पर चींटियों को आटा या अन्न डालकर अर्पण किया जा सकता है। श्रद्धालु राम सुफल ने बताया कि पितरों के निमित्त भोजन निकालकर कौवे को खिलाने की परंपरा उनके परिवार में वर्षों से चली आ रही है। इससे बच्चों और नई पीढ़ी को पूर्वजों के प्रति सम्मान और पितृ पक्ष की धार्मिक परंपराओं की जानकारी मिलती है। परिवार के लोग पूर्वजों का स्मरण कर श्रद्धा से श्राद्धकर्म कर रहे हैं।
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आचार्य त्रिवेणी प्रसाद मिश्र ने बताया कि पितृ पक्ष में श्राद्ध और तर्पण के साथ पितरों के निमित्त भोजन निकालने की परंपरा है। कौवे को पितरों का प्रतीक मानकर भोजन कराया जाता है। कई परिवार भोजन रखने के बाद उसके आने की प्रतीक्षा भी करते हैं। उन्होंने बताया कि पेड़ों की संख्या कम होने और शहरीकरण बढ़ने से कई जगह कौवे कम दिखाई देते हैं।
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ऐसी स्थिति में श्रद्धालु पितरों के निमित्त तैयार भोजन गाय या कुत्ते को करा सकते हैं। इनके उपलब्ध न होने पर चींटियों को आटा या अन्न डालकर अर्पण किया जा सकता है। श्रद्धालु राम सुफल ने बताया कि पितरों के निमित्त भोजन निकालकर कौवे को खिलाने की परंपरा उनके परिवार में वर्षों से चली आ रही है। इससे बच्चों और नई पीढ़ी को पूर्वजों के प्रति सम्मान और पितृ पक्ष की धार्मिक परंपराओं की जानकारी मिलती है। परिवार के लोग पूर्वजों का स्मरण कर श्रद्धा से श्राद्धकर्म कर रहे हैं।
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