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Amethi News: इमरजेंसी में पहुंचे मरीज की इंजेक्शन से बची जान
Sun, 28 Dec 2025 12:06 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Sun, 28 Dec 2025 12:06 AM IST
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जिला अस्पताल के इमरजेंसी कक्ष में मरीज का इलाज करते डॉक्टर। -संवाद
अमेठी सिटी। ठंड के कारण हृदयाघात (हार्ट अटैक) और ब्रेन स्ट्रोक का खतरा बढ़ गया है। जिला अस्पताल की इमरजेंसी में शुक्रवार रात पहुंचे हृदयाघात के मरीज की इंजेक्शन के माध्यम से चिकित्सकों ने जान बचाई। इमरजेंसी में एक सप्ताह के आंकड़ों पर नजर डालें तो करीब 277 मरीज इलाज कराने पहुंचे, जिसमें सांस से संबंधी 29 तो सीने के दर्द से पीड़ित 12 मरीज रहे। वहीं सात अन्य जिला अस्पताल पहुंचे, जहां चिकित्सकों मृत घोषित कर दिया।
गौरीगंज स्थित संयुक्त जिला अस्पताल, मेडिकल कॉलेज, जगदीशपुर सीएचसी स्थित ट्राॅमा सेंटर व फुरसतगंज की इमरजेंसी में चार से पांच मरीज पहुंच रहे हैं। अस्पताल में ऐसे मरीजों की जान बचाने के लिए एसटी-सेगमेंट एलिवेशन मायोकार्डियल इंफ्रक्शन (स्टेमी) के तहत 40 हजार रुपये का जीवन रक्षक इंजेक्शन निशुल्क लगाया जा रहा है। चार घंटे में यह इंजेक्शन लग जाने पर 80 फीसदी तक मरीजों की जान बचाई जा रही है।
शुक्रवार रात करीब 11 बजे मुंशीगंज के बेनी प्रसाद का पुरवा निवासी राम बहादुर (61) सीने में तेज दर्द की समस्या लेकर जिला अस्पताल की इमरजेंसी में पहुंचे। चिकित्सक डॉ. पीतांबर कनौजिया ने तत्काल ईसीजी करवाया और लखनऊ स्थित एसजीपीजीआई ग्रुप पर रिपोर्ट भेजी। विशेषज्ञ चिकित्सकों ने तत्काल इंजेक्शन लगाया। एक घंटे बाद जब मरीजों को राहत मिली तो तत्काल उसे एसजीपीजीआई लखनऊ रेफर किया गया। सीएमएस डॉ. बद्री प्रसाद अग्रवाल ने बताया कि मरीज पूरी स्वस्थ है। जिला अस्पताल की इमरजेंसी में पूरी व्यवस्था व जीवन रक्षक इंजेक्शन निशुल्क उपलब्ध है।
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इंसेट
अब तक 15 मरीजों की बचाई गई जान
जिले के तिलोई मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल के अलावा जगदीशपुर स्थित ट्राॅमा सेंटर व फुरसतगंज में दिल के मरीजों के लिए यूपी स्टेमी केयर सुविधा संचालित है। जून से अब तक इन चारों अस्पतालों में 252 मरीजों की ईसीजी हुई है। इनमें से 24 मरीजों में स्टेमी लक्षण पाए जाने पर 15 मरीजों को जीवन रक्षक इंजेक्शन लगाकर उनकी जान बचाई गई।
इंसेट
ये हैं लक्षण
फिजिशियन डॉ. शुभम पांडेय ने बताया कि ठंड बढ़ने के कारण नसें सिकुड़ने लगती हैं और रक्त संचार प्रभावित होता है। इससे हृदयाघात का खतरा दोगुना हो जाता है। इमरजेंसी में आने वाले मरीजों में से बुजुर्गों के अलावा 20 फीसदी मरीजों की उम्र 40 से कम है। ठंड में रक्तचाप बढ़ जाता है, इससे ब्रेन स्ट्रोक का भी खतरा अधिक है। कहा कि चार घंटे में इमरजेंसी में आने पर इनको भी जीवन रक्षक इंजेक्शन निशुल्क लगाया जा रहा है। कहा कि रक्तचाप मरीज खुद से दवाएं बंद न करें। प्रतिदिन रक्तचाप की जांच करके नोट कर लें। घबराहट, पसीना आने पर डॉक्टर को दिखाएं। मधुमेह नियंत्रित रखें, तले भोजन से बचें। धूप निकलने के बाद ही बाहर टहलने निकलें।
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गौरीगंज स्थित संयुक्त जिला अस्पताल, मेडिकल कॉलेज, जगदीशपुर सीएचसी स्थित ट्राॅमा सेंटर व फुरसतगंज की इमरजेंसी में चार से पांच मरीज पहुंच रहे हैं। अस्पताल में ऐसे मरीजों की जान बचाने के लिए एसटी-सेगमेंट एलिवेशन मायोकार्डियल इंफ्रक्शन (स्टेमी) के तहत 40 हजार रुपये का जीवन रक्षक इंजेक्शन निशुल्क लगाया जा रहा है। चार घंटे में यह इंजेक्शन लग जाने पर 80 फीसदी तक मरीजों की जान बचाई जा रही है।
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शुक्रवार रात करीब 11 बजे मुंशीगंज के बेनी प्रसाद का पुरवा निवासी राम बहादुर (61) सीने में तेज दर्द की समस्या लेकर जिला अस्पताल की इमरजेंसी में पहुंचे। चिकित्सक डॉ. पीतांबर कनौजिया ने तत्काल ईसीजी करवाया और लखनऊ स्थित एसजीपीजीआई ग्रुप पर रिपोर्ट भेजी। विशेषज्ञ चिकित्सकों ने तत्काल इंजेक्शन लगाया। एक घंटे बाद जब मरीजों को राहत मिली तो तत्काल उसे एसजीपीजीआई लखनऊ रेफर किया गया। सीएमएस डॉ. बद्री प्रसाद अग्रवाल ने बताया कि मरीज पूरी स्वस्थ है। जिला अस्पताल की इमरजेंसी में पूरी व्यवस्था व जीवन रक्षक इंजेक्शन निशुल्क उपलब्ध है।
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अब तक 15 मरीजों की बचाई गई जान
जिले के तिलोई मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल के अलावा जगदीशपुर स्थित ट्राॅमा सेंटर व फुरसतगंज में दिल के मरीजों के लिए यूपी स्टेमी केयर सुविधा संचालित है। जून से अब तक इन चारों अस्पतालों में 252 मरीजों की ईसीजी हुई है। इनमें से 24 मरीजों में स्टेमी लक्षण पाए जाने पर 15 मरीजों को जीवन रक्षक इंजेक्शन लगाकर उनकी जान बचाई गई।
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ये हैं लक्षण
फिजिशियन डॉ. शुभम पांडेय ने बताया कि ठंड बढ़ने के कारण नसें सिकुड़ने लगती हैं और रक्त संचार प्रभावित होता है। इससे हृदयाघात का खतरा दोगुना हो जाता है। इमरजेंसी में आने वाले मरीजों में से बुजुर्गों के अलावा 20 फीसदी मरीजों की उम्र 40 से कम है। ठंड में रक्तचाप बढ़ जाता है, इससे ब्रेन स्ट्रोक का भी खतरा अधिक है। कहा कि चार घंटे में इमरजेंसी में आने पर इनको भी जीवन रक्षक इंजेक्शन निशुल्क लगाया जा रहा है। कहा कि रक्तचाप मरीज खुद से दवाएं बंद न करें। प्रतिदिन रक्तचाप की जांच करके नोट कर लें। घबराहट, पसीना आने पर डॉक्टर को दिखाएं। मधुमेह नियंत्रित रखें, तले भोजन से बचें। धूप निकलने के बाद ही बाहर टहलने निकलें।