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Amethi News: दो साल से नक्शा मंजूरी के लिए भटक रहा उद्यमी
Thu, 03 Jul 2025 12:39 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Thu, 03 Jul 2025 12:39 AM IST
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जगदीशपुर (अमेठी)। राज्य सरकार की वन ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी योजना को जमीन पर झटका लगता दिख रहा है। जगदीशपुर औद्योगिक क्षेत्र में एक उद्यमी दो साल से स्वास्थ्य सेवा से जुड़ा प्रोजेक्ट शुरू करना चाहते हैं, लेकिन यूपीसीडा की जटिल प्रक्रिया और भू-उपयोग को लेकर उठाई गई आपत्ति के चलते नक्शा अब तक मंजूर नहीं हुआ है।
वर्ष 2022 में उद्यमी ने निवेश की मंशा से भूखंड खरीदा। अनुबंध के बाद नक्शा स्वीकृति के लिए शुल्क समेत सभी औपचारिकताएं पूरी की गईं। श्रम, अग्निशमन, प्रदूषण और विद्युत विभाग से अनापत्ति प्रमाणपत्र भी मिल गए। जनवरी 2024 में नक्शा शुल्क जमा हुआ, लेकिन महीनों तक कोई जवाब नहीं आया। अक्तूबर में मौखिक रूप से बताया गया कि निर्माण की समय-सीमा समाप्त हो चुकी है। इसके बाद प्राधिकरण ने समय विस्तार और मेंटीनेंस शुल्क करीब साढ़े सोलह लाख रुपये जमा करने को कहा।
उद्यमी ने अधिकतर धनराशि जमा कर जनवरी 2025 में दोबारा नक्शा शुल्क भी अदा कर दिया। इसके बावजूद जून 2025 में प्राधिकरण की ओर से पत्र आया कि जिस उपयोग (स्वास्थ्य सेवा) के लिए नक्शा भेजा गया है, वह मूल भूखंड के उपयोग (शॉप) से मेल नहीं खाता। भवन नियमावली के अनुसार दोनों के एफएआर व कवरेज अलग-अलग हैं, इसलिए स्वीकृति नहीं दी जा सकती।
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अब उद्यमी ने मुख्यमंत्री, औद्योगिक विकास मंत्री और प्रमुख सचिव को पत्र भेजकर कहा है कि जब भूखंड आवंटन के समय ही परियोजना रिपोर्ट सौंपी जा चुकी थी तो अब उपयोग वर्ग का मुद्दा उठाना अनुचित है। लाखों रुपये लेकर बाद में आपत्ति जताना ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के विपरीत है। अयोध्या मंडल प्रबंधक यूपीसीडा अजय कुमार ने बताया कि भूखंड का परिसरीय उपयोग शॉप दर्ज है, जबकि भवन मानचित्र स्वास्थ्य सेवा के लिए प्रस्तुत किया गया है। भवन नियमावली के अनुसार दोनों उपयोग भिन्न हैं और उनके एफएआर व कवरेज में अंतर है। संशोधित मानचित्र निवेश मित्र पोर्टल पर पुनः प्रस्तुत करने को कहा गया है।
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वर्ष 2022 में उद्यमी ने निवेश की मंशा से भूखंड खरीदा। अनुबंध के बाद नक्शा स्वीकृति के लिए शुल्क समेत सभी औपचारिकताएं पूरी की गईं। श्रम, अग्निशमन, प्रदूषण और विद्युत विभाग से अनापत्ति प्रमाणपत्र भी मिल गए। जनवरी 2024 में नक्शा शुल्क जमा हुआ, लेकिन महीनों तक कोई जवाब नहीं आया। अक्तूबर में मौखिक रूप से बताया गया कि निर्माण की समय-सीमा समाप्त हो चुकी है। इसके बाद प्राधिकरण ने समय विस्तार और मेंटीनेंस शुल्क करीब साढ़े सोलह लाख रुपये जमा करने को कहा।
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उद्यमी ने अधिकतर धनराशि जमा कर जनवरी 2025 में दोबारा नक्शा शुल्क भी अदा कर दिया। इसके बावजूद जून 2025 में प्राधिकरण की ओर से पत्र आया कि जिस उपयोग (स्वास्थ्य सेवा) के लिए नक्शा भेजा गया है, वह मूल भूखंड के उपयोग (शॉप) से मेल नहीं खाता। भवन नियमावली के अनुसार दोनों के एफएआर व कवरेज अलग-अलग हैं, इसलिए स्वीकृति नहीं दी जा सकती।
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अब उद्यमी ने मुख्यमंत्री, औद्योगिक विकास मंत्री और प्रमुख सचिव को पत्र भेजकर कहा है कि जब भूखंड आवंटन के समय ही परियोजना रिपोर्ट सौंपी जा चुकी थी तो अब उपयोग वर्ग का मुद्दा उठाना अनुचित है। लाखों रुपये लेकर बाद में आपत्ति जताना ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के विपरीत है। अयोध्या मंडल प्रबंधक यूपीसीडा अजय कुमार ने बताया कि भूखंड का परिसरीय उपयोग शॉप दर्ज है, जबकि भवन मानचित्र स्वास्थ्य सेवा के लिए प्रस्तुत किया गया है। भवन नियमावली के अनुसार दोनों उपयोग भिन्न हैं और उनके एफएआर व कवरेज में अंतर है। संशोधित मानचित्र निवेश मित्र पोर्टल पर पुनः प्रस्तुत करने को कहा गया है।