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Amethi News: साइबर ठगी व तस्करी से साथियों को बचाएंगे बाल प्रहरी

Thu, 03 Sep 2026 12:37 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी Updated Thu, 03 Sep 2026 12:37 AM IST
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'Bal Prahari' will protect their peers from cyber fraud and trafficking.
अमेठी सिटी। साइबर ठगी, मानव तस्करी और फर्जी नौकरी के झांसे से विद्यार्थियों को बचाने के लिए अब विद्यार्थी भी प्रहरी की भूमिका निभाएंगे। जिले के इंटर कॉलेजों में कक्षा नौ से 12 तक के छात्र-छात्राओं को बाल प्रहरी के रूप में तैयार किया जाएगा। माध्यमिक शिक्षा परिषद के निर्देश पर जिले के 226 माध्यमिक विद्यालयों में एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग क्लब (एएचटीसी) गठित किए जाएंगे।
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जिले में 38 राजकीय, 25 सहायता प्राप्त और 180 वित्तविहीन मान्यता प्राप्त माध्यमिक विद्यालय संचालित हैं। इनमें करीब 1.24 लाख विद्यार्थी पंजीकृत हैं। सभी विद्यालयों में क्लब की समिति गठित करने के निर्देश दिए गए हैं। समिति का विवरण, फोटो और गतिविधियों की रिपोर्ट जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय को उपलब्ध करानी होगी।
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विद्यालयों से प्राप्त जानकारी राज्य स्तरीय पोर्टल पर भी अपलोड की जाएगी। क्लब में शामिल विद्यार्थियों को साइबर ठगी के तरीकों, मानव तस्करी के खतरे, फर्जी नौकरी के झांसे और संदिग्ध गतिविधियों की पहचान के बारे में प्रशिक्षित किया जाएगा।
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अनजान लोगों के संपर्क में आने से जुड़े जोखिम और ऐसी स्थिति में अपनाए जाने वाले सुरक्षा उपाय भी बताए जाएंगे। प्रशिक्षण में पुलिस, एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (एएचटीयू) और विशेषज्ञों की मदद ली जाएगी।


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हर विद्यालय से आठ विद्यार्थी बनेंगे बाल प्रहरी
प्रत्येक विद्यालय में प्रधानाचार्य क्लब के अध्यक्ष और एक वरिष्ठ शिक्षक समन्वयक होंगे। कक्षा नौ, 10, 11 और 12 से एक-एक छात्र और एक-एक छात्रा का चयन होगा। इस तरह प्रत्येक विद्यालय से आठ विद्यार्थी क्लब के सदस्य बनेंगे। ये विद्यार्थी विद्यालय में अपने साथियों तक सुरक्षा संबंधी जानकारी पहुंचाने के साथ संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी शिक्षक या जिम्मेदार व्यक्ति तक पहुंचाने में सहयोग करेंगे।



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बाल प्रहरियों को जोखिम पहचानने का मिलेगा प्रशिक्षण
जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ. राजेश कुमार द्विवेदी ने बताया कि एएचटीसी के माध्यम से विद्यार्थियों को साइबर अपराध और मानव तस्करी के जोखिमों को समझने के साथ उनसे बचने के व्यावहारिक उपाय बताए जाएंगे। बाल प्रहरियों को ऐसी परिस्थितियों की पहचान और समय रहते जिम्मेदार लोगों तक सूचना पहुंचाने के लिए तैयार किया जाएगा, जिससे विद्यालय स्तर पर बच्चों की सुरक्षा को मजबूत किया जा सके।
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