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Amethi News: सोशल मीडिया से गुमराह कर विद्यार्थियों से की ठगी
Fri, 10 Oct 2025 12:41 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Fri, 10 Oct 2025 12:41 AM IST
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अमेठी। अमेठी इंस्टीट्यूट ऑफ पैरामेडिकल एंड साइंसेज (एआईपीएस )ने सोशल मीडिया के जरिए हाईटेक तरीके से छात्रों को गुमराह कर लाखों रुपये हड़प लिए। कॉलेज प्रबंधन ने फेसबुक, यूट्यूब और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर आकर्षक पोस्ट, वीडियो और तस्वीरें डालकर अभ्यर्थियों को एडमिशन का झांसा दिया। संस्थान के नाम से कई पेज बनाए गए, जिन पर लैब, क्लासरूम और सर्टिफिकेट वितरण के वीडियो दिखाकर कॉलेज को मान्यता प्राप्त बताया गया।
वीडियो में छात्रों को लैब में प्रैक्टिकल करते और ट्रेनिंग लेते हुए दिखाया गया, जिससे हर नया अभ्यर्थी इसे असली समझ बैठा। छात्रा प्रिंशी ने बताया कि उसने फेसबुक पर कॉलेज का पेज देखा था, जहां एडमिशन और मान्यता की जानकारी दी गई थी। वीडियो देखकर उसने दाखिला लिया, लेकिन कुछ महीनों में सच्चाई सामने आ गई। छात्र कपिल ने बताया कि कॉलेज प्रबंधन ने ट्रेनिंग सीएचसी में कराने और डिप्लोमा स्टेट मेडिकल फैकल्टी से जारी करने का दावा किया था, मगर बाद में यह सब झूठ निकला।
छात्राओं सुमन, कोमल और प्रिया ने बताया कि फेसबुक पर जानकारी लेने के बाद कॉलेज स्टाफ ने व्हाट्सएप और कॉल के माध्यम से संपर्क किया। सरकारी मान्यता प्राप्त कॉलेज बताकर एडमिशन के लिए जल्द निर्णय लेने का दबाव बनाया गया। सीट खत्म होने का डर दिखाकर फीस ऑनलाइन मांगी गई। उन्होंने विश्वास कर अपनी गाढ़ी कमाई जमा कर दी।
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प्रबंधन ने सोशल मीडिया पर फर्जी प्रमाणपत्र, लैब के फोटो और छात्रों के नाम से पोस्ट डालकर झूठा प्रचार किया। एडमिशन के समय ऑनलाइन रसीदें और नकली पत्र भेजे गए। फीस यूपीआई और फोनपे के जरिए ली गई। अभिभावक राजेश शुक्ल ने बताया कि शिकायत दर्ज हुए करीब 25 दिन हो चुके हैं, लेकिन छह आरोपी अब भी पुलिस की पकड़ से दूर हैं। उन्होंने कहा कि हर दिन नए पीड़ित सामने आ रहे हैं, जबकि प्रशासन केवल जांच का हवाला दे रहा है। अभिभावकों का कहना है कि बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ किया गया, फिर भी ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है।
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वीडियो में छात्रों को लैब में प्रैक्टिकल करते और ट्रेनिंग लेते हुए दिखाया गया, जिससे हर नया अभ्यर्थी इसे असली समझ बैठा। छात्रा प्रिंशी ने बताया कि उसने फेसबुक पर कॉलेज का पेज देखा था, जहां एडमिशन और मान्यता की जानकारी दी गई थी। वीडियो देखकर उसने दाखिला लिया, लेकिन कुछ महीनों में सच्चाई सामने आ गई। छात्र कपिल ने बताया कि कॉलेज प्रबंधन ने ट्रेनिंग सीएचसी में कराने और डिप्लोमा स्टेट मेडिकल फैकल्टी से जारी करने का दावा किया था, मगर बाद में यह सब झूठ निकला।
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छात्राओं सुमन, कोमल और प्रिया ने बताया कि फेसबुक पर जानकारी लेने के बाद कॉलेज स्टाफ ने व्हाट्सएप और कॉल के माध्यम से संपर्क किया। सरकारी मान्यता प्राप्त कॉलेज बताकर एडमिशन के लिए जल्द निर्णय लेने का दबाव बनाया गया। सीट खत्म होने का डर दिखाकर फीस ऑनलाइन मांगी गई। उन्होंने विश्वास कर अपनी गाढ़ी कमाई जमा कर दी।
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प्रबंधन ने सोशल मीडिया पर फर्जी प्रमाणपत्र, लैब के फोटो और छात्रों के नाम से पोस्ट डालकर झूठा प्रचार किया। एडमिशन के समय ऑनलाइन रसीदें और नकली पत्र भेजे गए। फीस यूपीआई और फोनपे के जरिए ली गई। अभिभावक राजेश शुक्ल ने बताया कि शिकायत दर्ज हुए करीब 25 दिन हो चुके हैं, लेकिन छह आरोपी अब भी पुलिस की पकड़ से दूर हैं। उन्होंने कहा कि हर दिन नए पीड़ित सामने आ रहे हैं, जबकि प्रशासन केवल जांच का हवाला दे रहा है। अभिभावकों का कहना है कि बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ किया गया, फिर भी ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है।