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सुविधाओं से लैस स्टेशन, नहीं एक भी ट्रेन का ठहराव
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01 : अमेठी : तालाखजुरी रेलवे स्टेशन भवन। -संवाद
- फोटो : AMETHI
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अमेठी। लखनऊ-प्रतापगढ़-वाराणसी रेल ट्रैक पर यात्री सुविधा बढ़ाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर विभाग ने स्टेशनों को सौंदर्यीकरण व उच्चीकृत किया है। सुविधाओं से लैस होने के बावजूद तालाखजुरी स्टेशन यात्रियों के लिए शोपीस साबित हो रहा है।
मार्च 2020 से पहले स्टेशन पर पांच जोड़ी ट्रेनों का ठहराव होता था। इससे प्रतिदिन करीब 200 यात्री अलग-अलग ट्रेनों से यात्रा भी करते थे। ट्रेन ठहराव नहीं होने से लोगों को जहां परेशानियों का सामना करना पड़ रह है वहीं विभाग को आर्थिक क्षति भी उठानी पड़ रही है।
ट्रेनों को गति देने के साथ ही यात्रियों की सुविधा बढ़ाने के लिए रेल विभाग ने अमेठी से उतरेटिया तक रेल लाइन दोहरीकरण व विद्युतीकरण करने के बाद स्टेशनों को उच्चीकृत किया है। जिले के तालाखजुरी रेलवे स्टेशन पर विभाग ने रेल विभाग निगम को कार्रदायी संस्था नामित करते हुए कार्य पूरा कराया था।
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तालाखजुरी रेलवे स्टेशन भवन भले ही यात्रियों की सुविधा से लैस हो गया हो लेकिन यह यात्रियों के लिए सिर्फ दिखावा साबित हो रहा है। मार्च 2020 से पहले ताला खजुरी में ट्रैक पर संचालित पांच जोड़ी ट्रेनों का ठहराव होता था तो प्रतिदिन करीब 200 यात्री अलग-अलग ट्रेनों से विभिन्न स्टेशनों की यात्रा करते थे।
कोविड संक्रमण काल से बंद ट्रेनों का संचालन बहाल नहीं होने से स्थानीय लोग ट्रेन यात्रा सुविधा से वंचित हो रहे हैं। ऐसे में स्टेशन मास्टर, पोर्टर समेत अन्य कर्मियों की तैनाती के बावजूद विभाग को प्रतिदिन करीब दस हजार रुपये का नुकसान हो रहा है। ट्रेनों का ठहराव नहीं होने से लोगों को यात्रा के लिए निजी वाहनों को सहारा लेने को मजबूर होना पड़ रहा है।
दो प्लेटफॉर्म का हुआ है निर्माण
ताला खजुरी रेलवे स्टेशन पर प्लेटफॉर्म नंबर एक तथा दो के साथ यात्री प्रतीक्षालय, फुट व रैंप ओवर ब्रिज, स्टेशन मास्टर कक्ष, पेयजल व प्रसाधन के साथ छांव के लिए नियमानुसार टीनशेड का निर्माण किया गया है। ट्रेनों का संचालन नहीं होने से सुविधाओं का लाभ स्थानीय लोगों को नहीं मिल पा रहा है।
इन ट्रेनों को होता था संचालन
कोविड काल से पहले ताला खजुरी रेलवे स्टेशन पर अप/डाउन लखनऊ-प्रयाग पैसेंजर, वाराणसी-लखनऊ पैसेंजर, प्रतापगढ़-लखनऊ शटल पैसेंजर, बरेली-प्रयाग पैसेंजर तथा लखनऊ-प्रतापगढ़ डेमू पैसेंजर का ठहराव होता था। सभी ट्रेनों पर प्रतिदिन तो पूर्णिमा व माघ मेले में पीआरएल व बरेली पैसेंजर से बड़ी संख्या में लोग प्रयागराज की यात्रा करते थे।
ट्रेन यात्रा में हो रही असुविधा
ताला गांव निवासी मनोज शुक्ल ने बताया कि स्टेशन पर ट्रेन का ठहराव नहीं होने से विकास बाधित हो रहा है तो लोगों को असुविधा हो रही है। राजेश तिवारी ने कहा कि विभाग को ट्रैक पर बंद पड़ी ट्रेनों का संचालन बहाल करना चाहिए। ट्रेन संचालित नहीं होने से सुविधा से लैस स्टेशन लोगों के किस काम आएगा।
धर्मेंद्र शुक्ल ने कहा कि जब तक पैसेंजर ट्रेनों का संचालन बहाल नहीं होता तब तक विभाग को अन्य ट्रेनों का ठहराव सुनिश्चित करते हुए सुविधा देनी चाहिए। पुष्पेश कुमार शुक्ल ने कहा कि ताला खजुरी में ट्रेन का ठहराव नहीं होने से गौरीगंज या अमेठी स्टेशन जाकर ट्रेन पकड़नी पड़ती है। ऐसे में परेशानी के साथ अधिक पैसे का व्यय करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
उच्चाधिकारी लेंगे निर्णय : एसएम
ताला खजुरी के स्टेशन मास्टर रविकांत ने बताया कि स्टेशन पर ट्रेनों के ठहराव व संचालन का निर्णय उच्चाधिकारी लेते हैं। यात्रियों की मांग उच्चाधिकारियों को बता दी गई है। स्टेशन पर यात्री सुविधाओं की कोई कमी नहीं है। संचालन विभाग के निर्देशानुसार कार्यरत कर्मी अपनी ड्यूटी पूरी कर रहे हैं।
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मार्च 2020 से पहले स्टेशन पर पांच जोड़ी ट्रेनों का ठहराव होता था। इससे प्रतिदिन करीब 200 यात्री अलग-अलग ट्रेनों से यात्रा भी करते थे। ट्रेन ठहराव नहीं होने से लोगों को जहां परेशानियों का सामना करना पड़ रह है वहीं विभाग को आर्थिक क्षति भी उठानी पड़ रही है।
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ट्रेनों को गति देने के साथ ही यात्रियों की सुविधा बढ़ाने के लिए रेल विभाग ने अमेठी से उतरेटिया तक रेल लाइन दोहरीकरण व विद्युतीकरण करने के बाद स्टेशनों को उच्चीकृत किया है। जिले के तालाखजुरी रेलवे स्टेशन पर विभाग ने रेल विभाग निगम को कार्रदायी संस्था नामित करते हुए कार्य पूरा कराया था।
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तालाखजुरी रेलवे स्टेशन भवन भले ही यात्रियों की सुविधा से लैस हो गया हो लेकिन यह यात्रियों के लिए सिर्फ दिखावा साबित हो रहा है। मार्च 2020 से पहले ताला खजुरी में ट्रैक पर संचालित पांच जोड़ी ट्रेनों का ठहराव होता था तो प्रतिदिन करीब 200 यात्री अलग-अलग ट्रेनों से विभिन्न स्टेशनों की यात्रा करते थे।
कोविड संक्रमण काल से बंद ट्रेनों का संचालन बहाल नहीं होने से स्थानीय लोग ट्रेन यात्रा सुविधा से वंचित हो रहे हैं। ऐसे में स्टेशन मास्टर, पोर्टर समेत अन्य कर्मियों की तैनाती के बावजूद विभाग को प्रतिदिन करीब दस हजार रुपये का नुकसान हो रहा है। ट्रेनों का ठहराव नहीं होने से लोगों को यात्रा के लिए निजी वाहनों को सहारा लेने को मजबूर होना पड़ रहा है।
दो प्लेटफॉर्म का हुआ है निर्माण
ताला खजुरी रेलवे स्टेशन पर प्लेटफॉर्म नंबर एक तथा दो के साथ यात्री प्रतीक्षालय, फुट व रैंप ओवर ब्रिज, स्टेशन मास्टर कक्ष, पेयजल व प्रसाधन के साथ छांव के लिए नियमानुसार टीनशेड का निर्माण किया गया है। ट्रेनों का संचालन नहीं होने से सुविधाओं का लाभ स्थानीय लोगों को नहीं मिल पा रहा है।
इन ट्रेनों को होता था संचालन
कोविड काल से पहले ताला खजुरी रेलवे स्टेशन पर अप/डाउन लखनऊ-प्रयाग पैसेंजर, वाराणसी-लखनऊ पैसेंजर, प्रतापगढ़-लखनऊ शटल पैसेंजर, बरेली-प्रयाग पैसेंजर तथा लखनऊ-प्रतापगढ़ डेमू पैसेंजर का ठहराव होता था। सभी ट्रेनों पर प्रतिदिन तो पूर्णिमा व माघ मेले में पीआरएल व बरेली पैसेंजर से बड़ी संख्या में लोग प्रयागराज की यात्रा करते थे।
ट्रेन यात्रा में हो रही असुविधा
ताला गांव निवासी मनोज शुक्ल ने बताया कि स्टेशन पर ट्रेन का ठहराव नहीं होने से विकास बाधित हो रहा है तो लोगों को असुविधा हो रही है। राजेश तिवारी ने कहा कि विभाग को ट्रैक पर बंद पड़ी ट्रेनों का संचालन बहाल करना चाहिए। ट्रेन संचालित नहीं होने से सुविधा से लैस स्टेशन लोगों के किस काम आएगा।
धर्मेंद्र शुक्ल ने कहा कि जब तक पैसेंजर ट्रेनों का संचालन बहाल नहीं होता तब तक विभाग को अन्य ट्रेनों का ठहराव सुनिश्चित करते हुए सुविधा देनी चाहिए। पुष्पेश कुमार शुक्ल ने कहा कि ताला खजुरी में ट्रेन का ठहराव नहीं होने से गौरीगंज या अमेठी स्टेशन जाकर ट्रेन पकड़नी पड़ती है। ऐसे में परेशानी के साथ अधिक पैसे का व्यय करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
उच्चाधिकारी लेंगे निर्णय : एसएम
ताला खजुरी के स्टेशन मास्टर रविकांत ने बताया कि स्टेशन पर ट्रेनों के ठहराव व संचालन का निर्णय उच्चाधिकारी लेते हैं। यात्रियों की मांग उच्चाधिकारियों को बता दी गई है। स्टेशन पर यात्री सुविधाओं की कोई कमी नहीं है। संचालन विभाग के निर्देशानुसार कार्यरत कर्मी अपनी ड्यूटी पूरी कर रहे हैं।