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जल्द स्थायी भवन में होगा कलेक्ट्रेट का संचालन
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गौरीगंज (अमेठी)। 11 वर्ष से अस्थायी भवन में संचालित कलेक्ट्रेट कार्यालय को जल्द ही स्थायी भवन मिल जाएगा। जामो रोड स्थित शहर के विशुनदासपुर में कलेक्ट्रेट निर्माण का कार्य डीएम की सख्ती के बाद अंतिम चरण में है। कलेक्ट्रेट कार्यालय स्थायी भवन में संचालित होने से न सिर्फ फरियादियों बल्कि अफसरों व कर्मचारियों को भी सहूलियत मिलेगी।
जिले का गठन एक जुलाई 2010 को हुआ था। जिला गठन के बाद शहर के विशुनदासपुर में स्थायी कलेक्ट्रेट निर्माण के लिए 36.152 हेक्टेयर भूमि चिह्नित कर उसका अधिग्रहण किया गया था। भूमि चिह्नित होने के कई वर्ष बाद वित्तीय वर्ष 2016-17 में सूबे की तत्कालीन सपा सरकार ने कलेक्ट्रेट निर्माण के लिए पांच करोड़ 38 लाख 64 हजार रुपये के डीपीआर को स्वीकृति प्रदान की।
14 दिसंबर 2016 को पहली किस्त के रूप में दो करोड़ रुपये अवमुक्त कर दिए गए। शासन ने धनराशि अवमुक्त करनेे के बाद पैकफेड (उत्तर प्रदेश राज निर्माण सहकारी संघ लिमिटेड) को कार्यदायी संस्था नामित करते हुए निर्माण कार्य पूरा करने का निर्देश दिया था। निर्माण कार्य में लापरवाही बरत रही कार्यदायी संस्था ने अवमुक्त धनराशि का उपभोग करने के बाद 2018 में शासन से दूसरी किस्त की डिमांड की।
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संस्था की मांग पर शासन ने 19 फरवरी 2018 को अवशेष तीन करोड़ 38 लाख 64 हजार रुपये भी कर दिया। रुपये मिलने व जिला प्रशासन के दबाव के बावजूद कार्यदायी संस्था ने निर्माण कार्य पूरा नहीं किया। निर्माण कार्य में लापरवाही बरतने तथा समय से कार्य पूरा नहीं करने के चलते इस बीच निर्माण सामाग्रियों की राशि में बढ़ोत्तरी हो गई।
इसके चलते लगातार रिवाइज इस्टीमेट के बीच कलेक्ट्रेट की लागत 17 करोड़ 77 लाख 42 हजार रुपये तक पहुंच गई। हालांकि वर्ष 2019 में जिले में कार्यभार संभालने के बाद डीएम अरुण कुमार ने संस्था के खिलाफ सख्त रुख अख्तियार किया तो निर्माण कार्य युद्धस्तर पर शुरू हुआ। अब नतीजा यह है कि कलेक्ट्रेट का निर्माण तकरीबन अंतिम चरण में है। सब कुछ ठीक रहा तो जल्द ही अस्थायी कलेक्ट्रेट कार्यालय का संचालन स्थायी भवन में शुरू हो जाएगा।
तहसील भवन में चल रहा कलेक्ट्रेट
जिला गठन के बाद से ही कलेक्ट्रेट कार्यालय का संचालन गौरीगंज तहसील के भवन में हो रहा है। कलेक्ट्रेट के हिसाब से अधिकारियों व कर्मियों को कक्ष आवंटित नहीं होने तथा संसाधन नहीं मिलने से कार्यों के निष्पादन में परेशानी होती है। इससे तहसील में कार्यरत अफसरों व कर्मियों के अलावा अपनी फरियाद लेकर पहुंचने वालों को परेशानी उठानी पड़ती है।
चार मार्च 2016 को मिली थी स्वीकृति
तत्कालीन प्रदेश सरकार ने जिला प्रशासन की ओर से भेजे गए अनुमानित आगणन को चार मार्च 2016 को वित्तीय व प्रशासनिक मंजूरी प्रदान की थी। स्वीकृति के बाद चार अप्रैल 2016 को लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान से शिवपाल सिंह यादव ने इसकी आधारशिला रखी थी। आधारशिला रखने के तत्काल बाद सचिव राजस्व परिषद ने कार्यदायी संस्था के खाते में पहली किस्त अवमुक्त करते हुए निर्माण कार्य डेडलाइन में पूरा कराने को कहा था।
जल्द स्थायी भवन में जाएगा दफ्तर
डीएम अरुण कुमार ने कहा कि उनके आने से पूर्व कलेक्ट्रेट निर्माण का काम बेहद धीमी गति से चल रहा था। लापरवाही के लिए शासन से लिखा पढ़ी की गई। सख्ती करने के बाद कार्यदायी संस्था ने काम तेज किया। कोशिश है कि नए साल के शुरुआती दिनों में ही कलेक्ट्रेट का संचालन स्थायी भवन में शुरू हो जाए।
क्या कहते हैं जिलेवासी
जिले में कई शिक्षण संस्थानों का संचालन करने वाले जगदंबा प्रसाद त्रिपाठी मनीषी ने कहा कि कलेक्ट्रेट स्थायी भवन में संचालित होने से लोगों को सहूलियत होगी। इंदिरा गांधी पीजी कॉलेज के बीएड विभागाध्यक्ष लालता प्रसाद द्विवेदी अगम ने कहा कि विशुनदासपुर में कलेक्ट्रेट का संचालन शुरू होने से जामो रोड व उसके आसपास के क्षेत्र का विकास होगा।
शहर निवासी दिनेश मिश्र ने कहा कि 11 साल बाद जिले में कलेक्ट्रेट को स्थायी भवन मिलेगा। यह बहुत खुशी की बात है। इससे आम लोगों को भी सुविधा होगी। शहर में निजी अस्पताल चलाने वाले डॉ. एसएन सिंह ने कहा कि कलेक्ट्रेट का इतनी जल्दी निर्माण डीएम अरुण कुमार की कड़ी निगरानी से ही संभव हुआ है।
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जिले का गठन एक जुलाई 2010 को हुआ था। जिला गठन के बाद शहर के विशुनदासपुर में स्थायी कलेक्ट्रेट निर्माण के लिए 36.152 हेक्टेयर भूमि चिह्नित कर उसका अधिग्रहण किया गया था। भूमि चिह्नित होने के कई वर्ष बाद वित्तीय वर्ष 2016-17 में सूबे की तत्कालीन सपा सरकार ने कलेक्ट्रेट निर्माण के लिए पांच करोड़ 38 लाख 64 हजार रुपये के डीपीआर को स्वीकृति प्रदान की।
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14 दिसंबर 2016 को पहली किस्त के रूप में दो करोड़ रुपये अवमुक्त कर दिए गए। शासन ने धनराशि अवमुक्त करनेे के बाद पैकफेड (उत्तर प्रदेश राज निर्माण सहकारी संघ लिमिटेड) को कार्यदायी संस्था नामित करते हुए निर्माण कार्य पूरा करने का निर्देश दिया था। निर्माण कार्य में लापरवाही बरत रही कार्यदायी संस्था ने अवमुक्त धनराशि का उपभोग करने के बाद 2018 में शासन से दूसरी किस्त की डिमांड की।
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संस्था की मांग पर शासन ने 19 फरवरी 2018 को अवशेष तीन करोड़ 38 लाख 64 हजार रुपये भी कर दिया। रुपये मिलने व जिला प्रशासन के दबाव के बावजूद कार्यदायी संस्था ने निर्माण कार्य पूरा नहीं किया। निर्माण कार्य में लापरवाही बरतने तथा समय से कार्य पूरा नहीं करने के चलते इस बीच निर्माण सामाग्रियों की राशि में बढ़ोत्तरी हो गई।
इसके चलते लगातार रिवाइज इस्टीमेट के बीच कलेक्ट्रेट की लागत 17 करोड़ 77 लाख 42 हजार रुपये तक पहुंच गई। हालांकि वर्ष 2019 में जिले में कार्यभार संभालने के बाद डीएम अरुण कुमार ने संस्था के खिलाफ सख्त रुख अख्तियार किया तो निर्माण कार्य युद्धस्तर पर शुरू हुआ। अब नतीजा यह है कि कलेक्ट्रेट का निर्माण तकरीबन अंतिम चरण में है। सब कुछ ठीक रहा तो जल्द ही अस्थायी कलेक्ट्रेट कार्यालय का संचालन स्थायी भवन में शुरू हो जाएगा।
तहसील भवन में चल रहा कलेक्ट्रेट
जिला गठन के बाद से ही कलेक्ट्रेट कार्यालय का संचालन गौरीगंज तहसील के भवन में हो रहा है। कलेक्ट्रेट के हिसाब से अधिकारियों व कर्मियों को कक्ष आवंटित नहीं होने तथा संसाधन नहीं मिलने से कार्यों के निष्पादन में परेशानी होती है। इससे तहसील में कार्यरत अफसरों व कर्मियों के अलावा अपनी फरियाद लेकर पहुंचने वालों को परेशानी उठानी पड़ती है।
चार मार्च 2016 को मिली थी स्वीकृति
तत्कालीन प्रदेश सरकार ने जिला प्रशासन की ओर से भेजे गए अनुमानित आगणन को चार मार्च 2016 को वित्तीय व प्रशासनिक मंजूरी प्रदान की थी। स्वीकृति के बाद चार अप्रैल 2016 को लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान से शिवपाल सिंह यादव ने इसकी आधारशिला रखी थी। आधारशिला रखने के तत्काल बाद सचिव राजस्व परिषद ने कार्यदायी संस्था के खाते में पहली किस्त अवमुक्त करते हुए निर्माण कार्य डेडलाइन में पूरा कराने को कहा था।
जल्द स्थायी भवन में जाएगा दफ्तर
डीएम अरुण कुमार ने कहा कि उनके आने से पूर्व कलेक्ट्रेट निर्माण का काम बेहद धीमी गति से चल रहा था। लापरवाही के लिए शासन से लिखा पढ़ी की गई। सख्ती करने के बाद कार्यदायी संस्था ने काम तेज किया। कोशिश है कि नए साल के शुरुआती दिनों में ही कलेक्ट्रेट का संचालन स्थायी भवन में शुरू हो जाए।
क्या कहते हैं जिलेवासी
जिले में कई शिक्षण संस्थानों का संचालन करने वाले जगदंबा प्रसाद त्रिपाठी मनीषी ने कहा कि कलेक्ट्रेट स्थायी भवन में संचालित होने से लोगों को सहूलियत होगी। इंदिरा गांधी पीजी कॉलेज के बीएड विभागाध्यक्ष लालता प्रसाद द्विवेदी अगम ने कहा कि विशुनदासपुर में कलेक्ट्रेट का संचालन शुरू होने से जामो रोड व उसके आसपास के क्षेत्र का विकास होगा।
शहर निवासी दिनेश मिश्र ने कहा कि 11 साल बाद जिले में कलेक्ट्रेट को स्थायी भवन मिलेगा। यह बहुत खुशी की बात है। इससे आम लोगों को भी सुविधा होगी। शहर में निजी अस्पताल चलाने वाले डॉ. एसएन सिंह ने कहा कि कलेक्ट्रेट का इतनी जल्दी निर्माण डीएम अरुण कुमार की कड़ी निगरानी से ही संभव हुआ है।