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थौरा गांव में पुलिस वाहनों के सायरन तोड़ रहे सन्नाटा
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09 : भेटुआ : अमेठी थाना क्षेत्र के थौरा गांव में पसरा सन्नाटा। -संवाद
- फोटो : AMETHI
गौरीगंज(अमेठी)। अमेठी कोतवाली क्षेत्र के थौरा गांव में हुए खूनी संघर्ष के तीसरे दिन भी मातमी सन्नाटा पसरा रहा। पुलिस वाहनों के सायरन सन्नाटे को तोड़ रहे थे। पीड़ित के साथ पूरे गांव में पीएसी व पुलिस बल का कड़ा पहरा है। नौ घायलों में से चार लखनऊ के ट्रामा सेंटर में जिंदगी मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं।
अमेठी कोतवाली के थौरा गांव निवासी वंश बहादुर सिंह का दिलीप सिंह से रास्ते का विवाद चल रहा था। करीब डेढ़ वर्ष पहले दिलीप सिंह द्वारा वंश बहादुर के निकलने वाले रास्ते पर कटीला तार लगाकर उनका आवागमन पूरी तरह से बंद कर दिया गया था।
तब से वंश बहादुर प्रशासनिक अफसरों के साथ ही मुख्यमंत्री के समक्ष पेश होकर फरियाद कर चुके थे। लगातार शिकायत करने के बाद दिलीप को बंद रास्ता प्रशासन द्वारा खुलवाने का अंदेशा सताने लगा। इसी बात को लेकर शुक्रवार को दिलीप सिंह पक्ष के लोगों ने वंश बहादुर पक्ष पर जानलेवा हमला बोल दिया। इसमें वंश बहादुर परिवार की तीन महिलाओं समेत कुल नौ लोग घायल हुए।
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इनमें से राहुल सिंह की मौत हो गई जबकि अन्य चार घायल ट्रामा सेंटर में जिंदगी मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं। शनिवार देर शाम राहुल का अंतिम संस्कार गांव में ही किया गया। घटना के तीसरे दिन भी गांव में मातमी सन्नाटा पसरा है। गांव पहुंच रहे पुलिस के वाहनों के सायरन सन्नाटे को तोड़ रहे हैं। गांव में पीएसी के साथ ही बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात है। सांत्वना देने के लिए आसपास के लोग बड़ी संख्या में रविवार को भी वंश बहादुर के घर पहुंचते रहे।
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अमेठी कोतवाली के थौरा गांव निवासी वंश बहादुर सिंह का दिलीप सिंह से रास्ते का विवाद चल रहा था। करीब डेढ़ वर्ष पहले दिलीप सिंह द्वारा वंश बहादुर के निकलने वाले रास्ते पर कटीला तार लगाकर उनका आवागमन पूरी तरह से बंद कर दिया गया था।
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तब से वंश बहादुर प्रशासनिक अफसरों के साथ ही मुख्यमंत्री के समक्ष पेश होकर फरियाद कर चुके थे। लगातार शिकायत करने के बाद दिलीप को बंद रास्ता प्रशासन द्वारा खुलवाने का अंदेशा सताने लगा। इसी बात को लेकर शुक्रवार को दिलीप सिंह पक्ष के लोगों ने वंश बहादुर पक्ष पर जानलेवा हमला बोल दिया। इसमें वंश बहादुर परिवार की तीन महिलाओं समेत कुल नौ लोग घायल हुए।
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इनमें से राहुल सिंह की मौत हो गई जबकि अन्य चार घायल ट्रामा सेंटर में जिंदगी मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं। शनिवार देर शाम राहुल का अंतिम संस्कार गांव में ही किया गया। घटना के तीसरे दिन भी गांव में मातमी सन्नाटा पसरा है। गांव पहुंच रहे पुलिस के वाहनों के सायरन सन्नाटे को तोड़ रहे हैं। गांव में पीएसी के साथ ही बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात है। सांत्वना देने के लिए आसपास के लोग बड़ी संख्या में रविवार को भी वंश बहादुर के घर पहुंचते रहे।