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Amethi News: पत्नी को मायके भेजा, खुद लग रहे कतार में
Fri, 03 Apr 2026 12:36 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Fri, 03 Apr 2026 12:36 AM IST
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अमेठी के केवलापुर में सिलिंडर लेने के इंतजार में जमीन पर लेटी महिला। -संवाद
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अमेठी। पर्याप्त उपलब्धता के दावे के बावजूद जिले में घरेलू गैस सिलिंडर की किल्लत खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। बुकिंग के बाद भी लोगों को तेज धूप में एजेंसी और गोदामों के बाहर घंटों कतार भी लगानी पड़ रही है। सिलिंडर न मिलने से कई परिवारों के समक्ष भोजन तक का संकट गहराने लगा है।
परेशान लोग पत्नी को मायके तो बच्चों को ननिहाल भेजने पर विवश हो रहे हैं। बृहस्पतिवार सुबह प्रकाश गैस एजेंसी के बाहर उपभोक्ताओं की पीड़ा सुनकर वहां मौजूद लोग भी द्रवित हो उठे।
हथकिला के अविनाश पाल ने बताया कि बुकिंग के बाद भी 13 दिन से लाइन लगा रहे हैं, लेकिन सिलिंडर नहीं मिल रहा है। मजबूरी में पत्नी को मायके भेजने के बाद खुद ढाबे पर खाना खाने को विवश हैं। अल्फा खान एजेंसी के पास जमीन पर लेटी गंगागंज की एक महिला ने बताया कि घर में तीन बच्चे हैं, जो पढ़ाई करते हैं। सिलिंडर खत्म होने से खाना नहीं बना पा रही हूं। बच्चे भूखे पेट स्कूल जा रहे हैं। टिफिन में बिस्कुट-नमकीन देना पड़ रहा है।
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एक सप्ताह से लाइन लगा रही हूं, फिर भी सिलिंडर नहीं मिल रहा है। उत्तरगांव की रजमा ने बताया कि पति मुंबई में रहते हैं। घर पर बच्चों और बुजुर्ग सास-ससुर की जिम्मेदारी है। 21 तारीख को गैस खत्म हुई थी, तब से रोज घर के काम छोड़कर सिलिंडर लेने के लिए कतार में लगना पड़ रहा है। बच्चों को भी ननिहाल भेज दिया है।
टीकरमाफी के राहुल यादव ने बताया कि 12 दिन से काम पर नहीं जा रहे हैं। घर के बच्चे जंगल से लकड़ी लेकर आ रहे हैं, उसे जलाकर किसी तरह चूल्हे पर खाना बन रहा है। गैस न मिलने से बच्चे स्कूल भी नहीं जा पा रहे हैं। रेखा देवी ने कहा कि छोटे-छोटे बच्चों के साथ घंटों धूप में खड़े रहना पड़ रहा है। (संवाद)
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परेशान लोग पत्नी को मायके तो बच्चों को ननिहाल भेजने पर विवश हो रहे हैं। बृहस्पतिवार सुबह प्रकाश गैस एजेंसी के बाहर उपभोक्ताओं की पीड़ा सुनकर वहां मौजूद लोग भी द्रवित हो उठे।
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हथकिला के अविनाश पाल ने बताया कि बुकिंग के बाद भी 13 दिन से लाइन लगा रहे हैं, लेकिन सिलिंडर नहीं मिल रहा है। मजबूरी में पत्नी को मायके भेजने के बाद खुद ढाबे पर खाना खाने को विवश हैं। अल्फा खान एजेंसी के पास जमीन पर लेटी गंगागंज की एक महिला ने बताया कि घर में तीन बच्चे हैं, जो पढ़ाई करते हैं। सिलिंडर खत्म होने से खाना नहीं बना पा रही हूं। बच्चे भूखे पेट स्कूल जा रहे हैं। टिफिन में बिस्कुट-नमकीन देना पड़ रहा है।
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एक सप्ताह से लाइन लगा रही हूं, फिर भी सिलिंडर नहीं मिल रहा है। उत्तरगांव की रजमा ने बताया कि पति मुंबई में रहते हैं। घर पर बच्चों और बुजुर्ग सास-ससुर की जिम्मेदारी है। 21 तारीख को गैस खत्म हुई थी, तब से रोज घर के काम छोड़कर सिलिंडर लेने के लिए कतार में लगना पड़ रहा है। बच्चों को भी ननिहाल भेज दिया है।
टीकरमाफी के राहुल यादव ने बताया कि 12 दिन से काम पर नहीं जा रहे हैं। घर के बच्चे जंगल से लकड़ी लेकर आ रहे हैं, उसे जलाकर किसी तरह चूल्हे पर खाना बन रहा है। गैस न मिलने से बच्चे स्कूल भी नहीं जा पा रहे हैं। रेखा देवी ने कहा कि छोटे-छोटे बच्चों के साथ घंटों धूप में खड़े रहना पड़ रहा है। (संवाद)