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Amethi News: पिंडदान कर पूर्वजों से मांगा आशीष
Mon, 22 Sep 2025 01:16 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Mon, 22 Sep 2025 01:16 AM IST
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अमेठी में पितृविसर्जन पर पितरों का तर्पण करते श्रद्धालु।-संवाद
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अमेठी। पितृ पक्ष के अंतिम दिन रविवार को अमावस्या पर श्रद्धालुओं ने अपने पूर्वजों का पिंडदान व तर्पण कर आशीर्वाद प्राप्त किया। शहर से लेकर गांवों तक विभिन्न घाटों, नदियों और तालाबों के किनारे सुबह से ही भीड़ जुटने लगी। श्रद्धालुओं ने खोवा, चावल और जौ आदि से पिंड बनाकर मंत्रोच्चार के बीच पितरों का आह्वान किया और पूरे विधिविधान से उनका पूजन कर तर्पण किया।
पिंडदान के बाद स्नान कर लोगों ने घर का बना भोजन गाय, कौवा और कुत्तों को खिलाया। ब्राह्मणों को भोजन कराकर दान-दक्षिणा देकर पितरों को विदा किया। मान्यता है कि गया, बदरीनाथ जैसे तीर्थों में पिंडदान से ही पूर्वज पूर्ण तृप्त होते हैं। पितृ पक्ष में यही पूर्वज अपने वंशजों के हाथों से तर्पण स्वीकार करने के लिए आते हैं। रामघाट, बुद्धू बाबा घाट, टीकरमाफी घाट, कालिकन सगरा सहित अन्य स्थलों पर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। दाढ़ी-बाल बनवाने से लेकर स्नान और पूजन तक सभी ने परंपरा का पालन किया।
आचार्य त्रिवेणी प्रसाद मिश्र ने बताया कि पितृ अमावस्या उन सभी ज्ञात और अज्ञात पितरों को समर्पित है, जिनका श्राद्ध किसी कारणवश छूट गया हो। इस दिन किया गया तर्पण और दान अक्षय फलदायी माना जाता है। आचार्य के अनुसार इस दिन पितरों को याद कर उनका विसर्जन किया जाता है और वे वायु रूप में अपने लोक को लौट जाते हैं। धार्मिक मान्यता यह भी है कि यदि पूरे पितृ पक्ष में पितरों को याद न किया जा सके, तो केवल अमावस्या पर स्मरण करने से ही वे तृप्त होकर संतानों को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।
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पिंडदान के बाद स्नान कर लोगों ने घर का बना भोजन गाय, कौवा और कुत्तों को खिलाया। ब्राह्मणों को भोजन कराकर दान-दक्षिणा देकर पितरों को विदा किया। मान्यता है कि गया, बदरीनाथ जैसे तीर्थों में पिंडदान से ही पूर्वज पूर्ण तृप्त होते हैं। पितृ पक्ष में यही पूर्वज अपने वंशजों के हाथों से तर्पण स्वीकार करने के लिए आते हैं। रामघाट, बुद्धू बाबा घाट, टीकरमाफी घाट, कालिकन सगरा सहित अन्य स्थलों पर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। दाढ़ी-बाल बनवाने से लेकर स्नान और पूजन तक सभी ने परंपरा का पालन किया।
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आचार्य त्रिवेणी प्रसाद मिश्र ने बताया कि पितृ अमावस्या उन सभी ज्ञात और अज्ञात पितरों को समर्पित है, जिनका श्राद्ध किसी कारणवश छूट गया हो। इस दिन किया गया तर्पण और दान अक्षय फलदायी माना जाता है। आचार्य के अनुसार इस दिन पितरों को याद कर उनका विसर्जन किया जाता है और वे वायु रूप में अपने लोक को लौट जाते हैं। धार्मिक मान्यता यह भी है कि यदि पूरे पितृ पक्ष में पितरों को याद न किया जा सके, तो केवल अमावस्या पर स्मरण करने से ही वे तृप्त होकर संतानों को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।
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