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जिले में धूमधाम से मनाया गया विश्व वेटलैंड दिवस
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गौरीगंज (अमेठी)। अंतरराष्ट्रीय विश्व वेटलैंड दिवस जिले में बुधवार को धूमधाम से मनाया गया। वन एवं वन्यजीव प्रभाग की ओर से गौरीगंज तहसील के हरखपुर गांव में 32.944 हेक्टेयर में फैले चदवां ताल पर बर्ड वॉचिंग कार्यक्रम आयोजित किया गया। गौरीगंज के हरखपुर स्थित चदवां ताल पर बर्ड वॉचिंग कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में कोविड प्रोटोकॉल का पालन करते हुए प्राथमिक व उच्च प्राथमिक स्कूल हरखपुर में पंजीकृत बच्चों को वन विभाग ने आमंत्रित करने के साथ बड़ी संख्या में ग्रामीणों को कार्यक्रम स्थल पर बुलाया।
डीएफओ महेंद्र नारायण सिंह ने मौजूद लोगों से चिड़ियों तथा जल संरक्षण पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने मौजूद बच्चों तथा ग्रामीणों सेे मानव जीवन को बनाए रखने के लिए पशु पक्षियों के जीवित रहने का महत्व समझाया। उन्होंने गिद्ध जैसे कई पक्षियों की प्रजाति के समाप्त होने तथा उनके जीवित रहने की भी वजह बताई। जागरूकता गोष्ठी के बाद बच्चों के बीच विभिन्न प्रतियोगिताएं आयोजित कर बच्चों को पुरस्कृत किया गया। प्रतियोगिता व गोष्ठी के बाद डीएफओ ने मौजूद बच्चों तथा ग्रामीणों को ताल के समीप ले जाकर मौजूद पक्षियों के नस्ल आदि की जानकारी दी। ग्रामीणों से ताल पर मौजूद पक्षियों के संरक्षण में सहयोग की अपील करते हुए ताल पर शिकार करने की नीयत से आए शिकारियों की सूचना तत्काल देने को भी कहा।
डीएफओ ने बताया कि गौरीगंज के अतिरिक्त अमेठी के पिंडोरिया व मुसाफिरखाना के कादूनाला स्थित वेटलैंड पर कार्यक्रम आयोजित किया गया है। पिछले वर्ष की भांति इस वर्ष ताल पर पक्षियों के ठहराव में बढ़ोत्तरी हुई है। कहा कि ताल में इस समय 32 प्रकार के 371 सारस, ग्रे हेरान, गौरेया, आईविस, ग्रीन बीईटर, हुदहुद, बुलबुल, मैना, बगुला, कार्मोरेंट, नीलकंठ व डुबडुबी समेत कई पक्षी की गणना की गई है। मौके पर क्षेत्रीय वनाधिकारी शिव प्रसाद मिश्र, उप प्रभागीय वनाधिकारी रणवीर मिश्र समेत सभी स्टॉफ व बड़ी संख्या में स्थानीय व बच्चे मौजूद रहे।
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बताया कि झील में ढांई-ढांई मीटर ऊंचे कई आईलैंड बनाए गए हैं। कहा कि बरसात तथा ठंड के मौसम में पक्षी इस पर आसानी से बैठ सकते हैं। पक्षियों के लिए झील तथा उसके समीप बड़ी संख्या में बबूल, खैर आदि के पौधे भी रोपित कराए गए हैं, जिस पर वह आसानी से अपना बसेरा बनाए हुए हैं। झील को इतना गहरा कराया गया है कि उसमें गर्मी के मौसम में भी पर्याप्त मात्रा में पानी रहता है।
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डीएफओ महेंद्र नारायण सिंह ने मौजूद लोगों से चिड़ियों तथा जल संरक्षण पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने मौजूद बच्चों तथा ग्रामीणों सेे मानव जीवन को बनाए रखने के लिए पशु पक्षियों के जीवित रहने का महत्व समझाया। उन्होंने गिद्ध जैसे कई पक्षियों की प्रजाति के समाप्त होने तथा उनके जीवित रहने की भी वजह बताई। जागरूकता गोष्ठी के बाद बच्चों के बीच विभिन्न प्रतियोगिताएं आयोजित कर बच्चों को पुरस्कृत किया गया। प्रतियोगिता व गोष्ठी के बाद डीएफओ ने मौजूद बच्चों तथा ग्रामीणों को ताल के समीप ले जाकर मौजूद पक्षियों के नस्ल आदि की जानकारी दी। ग्रामीणों से ताल पर मौजूद पक्षियों के संरक्षण में सहयोग की अपील करते हुए ताल पर शिकार करने की नीयत से आए शिकारियों की सूचना तत्काल देने को भी कहा।
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डीएफओ ने बताया कि गौरीगंज के अतिरिक्त अमेठी के पिंडोरिया व मुसाफिरखाना के कादूनाला स्थित वेटलैंड पर कार्यक्रम आयोजित किया गया है। पिछले वर्ष की भांति इस वर्ष ताल पर पक्षियों के ठहराव में बढ़ोत्तरी हुई है। कहा कि ताल में इस समय 32 प्रकार के 371 सारस, ग्रे हेरान, गौरेया, आईविस, ग्रीन बीईटर, हुदहुद, बुलबुल, मैना, बगुला, कार्मोरेंट, नीलकंठ व डुबडुबी समेत कई पक्षी की गणना की गई है। मौके पर क्षेत्रीय वनाधिकारी शिव प्रसाद मिश्र, उप प्रभागीय वनाधिकारी रणवीर मिश्र समेत सभी स्टॉफ व बड़ी संख्या में स्थानीय व बच्चे मौजूद रहे।
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बताया कि झील में ढांई-ढांई मीटर ऊंचे कई आईलैंड बनाए गए हैं। कहा कि बरसात तथा ठंड के मौसम में पक्षी इस पर आसानी से बैठ सकते हैं। पक्षियों के लिए झील तथा उसके समीप बड़ी संख्या में बबूल, खैर आदि के पौधे भी रोपित कराए गए हैं, जिस पर वह आसानी से अपना बसेरा बनाए हुए हैं। झील को इतना गहरा कराया गया है कि उसमें गर्मी के मौसम में भी पर्याप्त मात्रा में पानी रहता है।