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Amethi News: भगवान की भक्ति से मिलता है मोक्ष
Tue, 10 Jun 2025 12:22 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Tue, 10 Jun 2025 12:22 AM IST
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पन्हौना सिंहपुर में श्रीमद्भागवत कथा सुनते श्रद्धालु। स्रोत- आयोजक
सिंहपुर (अमेठी)। पन्हौना गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिन सोमवार को अयोध्या से पधारे प्रवाचक अजय शास्त्री बिंदु ने श्रद्धालुओं को परीक्षित मोक्ष की कथा सुनाई, जिसे सुनकर वह भावविभोर हो गए।
प्रवाचक ने कहा कि राजा परीक्षित बहुत ही धर्मपरायण और ज्ञानी थे। एक दिन उन्होंने मुनि शुक से पूछा कि जीवन का अंतिम समय आने पर मनुष्य को क्या करना चाहिए। इस पर मुनि ने कहा कि वे अपने जीवन के अंतिम क्षणों में भगवान विष्णु का स्मरण करें और भक्ति करें तो मोक्ष प्राप्त कर सकते हैं। राजा परीक्षित ने अपने जीवन में भगवान का ध्यान किया। अपनी भूलों का पश्चाताप किया और भक्ति मार्ग अपना लिया।
जब मृत्यु का समय आया तो उन्होंने भगवान का स्मरण किया। उनके अंतिम समय में भगवान विष्णु प्रकट हुए और उन्हें मोक्ष प्रदान किया। इस कथा से यह शिक्षा मिलती है कि जीवन के अंतिम क्षणों में भी यदि सच्चे मन से भगवान का स्मरण किया जाए तो मोक्ष संभव है। राजा परीक्षित की कथा हमें भक्ति और धर्म का महत्व समझाती है। जीवन का अंतिम लक्ष्य मोक्ष है, जो भगवान की भक्ति से ही प्राप्त होता है। इस दौरान मुख्य यजमान विजय नारायण शुक्ला, आदित्य शुक्ला, सत्यदेव तिवारी, रविकांत, राजेंद्र शुक्ला, मिंटू सिंह, देव बक्स, पुन्नू तिवारी आदि मौजूद रहे।
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प्रवाचक ने कहा कि राजा परीक्षित बहुत ही धर्मपरायण और ज्ञानी थे। एक दिन उन्होंने मुनि शुक से पूछा कि जीवन का अंतिम समय आने पर मनुष्य को क्या करना चाहिए। इस पर मुनि ने कहा कि वे अपने जीवन के अंतिम क्षणों में भगवान विष्णु का स्मरण करें और भक्ति करें तो मोक्ष प्राप्त कर सकते हैं। राजा परीक्षित ने अपने जीवन में भगवान का ध्यान किया। अपनी भूलों का पश्चाताप किया और भक्ति मार्ग अपना लिया।
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जब मृत्यु का समय आया तो उन्होंने भगवान का स्मरण किया। उनके अंतिम समय में भगवान विष्णु प्रकट हुए और उन्हें मोक्ष प्रदान किया। इस कथा से यह शिक्षा मिलती है कि जीवन के अंतिम क्षणों में भी यदि सच्चे मन से भगवान का स्मरण किया जाए तो मोक्ष संभव है। राजा परीक्षित की कथा हमें भक्ति और धर्म का महत्व समझाती है। जीवन का अंतिम लक्ष्य मोक्ष है, जो भगवान की भक्ति से ही प्राप्त होता है। इस दौरान मुख्य यजमान विजय नारायण शुक्ला, आदित्य शुक्ला, सत्यदेव तिवारी, रविकांत, राजेंद्र शुक्ला, मिंटू सिंह, देव बक्स, पुन्नू तिवारी आदि मौजूद रहे।
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