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मनरेगा से कृषि पर खर्च हुए 88.4 करोड़ रुपये
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गौरीगंज (अमेठी)। जिले में मनरेगा योजना के तहत वित्तीय वर्ष में कुल 1.58 अरब रुपये खर्च हुए हैं। इसमें से कृषि कार्यों पर 88.4 करोड़ रुपये व्यय किए गए हैं। कृषि पर हुआ व्यय का कुल 55.38 प्रतिशत है। इसमें से किसानों की सुविधा के लिए 19.77 करोड़ रुपये सिंचाई पर खर्च हुए हैं।
बेरोजगार मजदूरों को गांव में ही रोजगार मुहैया कराने के लिए पिछले वित्तीय वर्ष में जिले में मनरेगा योजना के तहत कुल एक अरब, 58 करोड़, 98 लाख 83 हजार रुपये खर्च हुए हैं। इसमें से अकेले कृषि कार्यों पर 88 करोड़ चार लाख 15 हजार रुपये व्यय किए गए हैं। इस हिसाब से कृषि कार्य पर वर्ष में भर में कराए गए कार्यों का प्रतिशत 55.38 रहा।
इसी तरह सिंचाई कार्यों पर भी मनरेगा योजना के तहत 19 करोड़ 77 लाख 28 हजार रुपये खर्च किए गए। सीडीओ डॉ. अंकुर लाठर के अनुसार कृषि कार्य पर तकरीबन सभी ग्राम पंचायतों में किसानों के खेतों की मेड़बंदी तथा समतलीकरण का कार्य कराया गया है। विशेषकर अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति के लोगों के खेतों की मेड़बंदी व समतलीकरण का कार्य कराया गया है।
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इन कार्यों पर मनरेगा योजना से मजदूरी भुगतान आदि पर 88 करोड़ रुपये से ज्यादा का खर्च हुआ है। बताया कि योजना के तहत गांव के अन्य विकास कार्यों के साथ ही सिंचाई पर भी व्यय किया गया है। ऐसे किसान जिनके खेतों तक फसल सींचने के लिए सिंचाई का साधन नहीं था। वहां सीवान के बीच नाली निर्माण के साथ ही गांव की माइनरों व अल्पिकाओं की सफाई का कार्य 19.77 करोड़ रुपये से कराया गया है।
रोजगार मुहैया कराना प्राथमिकता
सीडीओ डॉ. अंकुर लाठर ने कहा कि गांव के बेरोजगारों को रोजगार मुहैया कराना प्राथमिकता में है। कहा कि गांव में संपर्क मार्ग, नाली, खड़ंजा, इंटरलॉकिंग के अलावा किसानों के हित में भी काम कराया गया है। किसानों के खेतों की मेड़बंदी हो या फिर खेत समलतीकरण के साथ ही हर क्षेत्र में मनरेगा योजना के तहत काम किया गया है। हर किसी को उसके गांव, न्याय पंचायत व ब्लॉक क्षेत्र में रोजगार मुहैया कराने की कोशिश रहती है।
जिले से बेरोजगारों का पलायन रुका
सीडीओ ने बताया कि नियमित रूप से मनरेगा योजना की मॉनीटरिंग की जा रही है। कहा कि वित्तीय वर्ष में योजना के तहत जिले में कुल 52 लाख 40 हजार 536 मानव दिवस का सृजन किया गया। इसके सापेक्ष कुल एक लाख सात हजार 424 लोगों को 100 दिन का रोजगार दिया गया। इसमें से 51 हजार 48 महिला तथा 20 हजार 55 अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति के लोगों को रोजगार दिया गया। गांव में ही रोजगार मिलने की वजह से बेरोजगारों का शहर की ओर होने वाला पलायन भी रुका।
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बेरोजगार मजदूरों को गांव में ही रोजगार मुहैया कराने के लिए पिछले वित्तीय वर्ष में जिले में मनरेगा योजना के तहत कुल एक अरब, 58 करोड़, 98 लाख 83 हजार रुपये खर्च हुए हैं। इसमें से अकेले कृषि कार्यों पर 88 करोड़ चार लाख 15 हजार रुपये व्यय किए गए हैं। इस हिसाब से कृषि कार्य पर वर्ष में भर में कराए गए कार्यों का प्रतिशत 55.38 रहा।
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इसी तरह सिंचाई कार्यों पर भी मनरेगा योजना के तहत 19 करोड़ 77 लाख 28 हजार रुपये खर्च किए गए। सीडीओ डॉ. अंकुर लाठर के अनुसार कृषि कार्य पर तकरीबन सभी ग्राम पंचायतों में किसानों के खेतों की मेड़बंदी तथा समतलीकरण का कार्य कराया गया है। विशेषकर अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति के लोगों के खेतों की मेड़बंदी व समतलीकरण का कार्य कराया गया है।
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इन कार्यों पर मनरेगा योजना से मजदूरी भुगतान आदि पर 88 करोड़ रुपये से ज्यादा का खर्च हुआ है। बताया कि योजना के तहत गांव के अन्य विकास कार्यों के साथ ही सिंचाई पर भी व्यय किया गया है। ऐसे किसान जिनके खेतों तक फसल सींचने के लिए सिंचाई का साधन नहीं था। वहां सीवान के बीच नाली निर्माण के साथ ही गांव की माइनरों व अल्पिकाओं की सफाई का कार्य 19.77 करोड़ रुपये से कराया गया है।
रोजगार मुहैया कराना प्राथमिकता
सीडीओ डॉ. अंकुर लाठर ने कहा कि गांव के बेरोजगारों को रोजगार मुहैया कराना प्राथमिकता में है। कहा कि गांव में संपर्क मार्ग, नाली, खड़ंजा, इंटरलॉकिंग के अलावा किसानों के हित में भी काम कराया गया है। किसानों के खेतों की मेड़बंदी हो या फिर खेत समलतीकरण के साथ ही हर क्षेत्र में मनरेगा योजना के तहत काम किया गया है। हर किसी को उसके गांव, न्याय पंचायत व ब्लॉक क्षेत्र में रोजगार मुहैया कराने की कोशिश रहती है।
जिले से बेरोजगारों का पलायन रुका
सीडीओ ने बताया कि नियमित रूप से मनरेगा योजना की मॉनीटरिंग की जा रही है। कहा कि वित्तीय वर्ष में योजना के तहत जिले में कुल 52 लाख 40 हजार 536 मानव दिवस का सृजन किया गया। इसके सापेक्ष कुल एक लाख सात हजार 424 लोगों को 100 दिन का रोजगार दिया गया। इसमें से 51 हजार 48 महिला तथा 20 हजार 55 अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति के लोगों को रोजगार दिया गया। गांव में ही रोजगार मिलने की वजह से बेरोजगारों का शहर की ओर होने वाला पलायन भी रुका।