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ग्राम प्रधान सेंभुई को 78 हजार की आरसी
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अमेठी। कूट रचित दस्तावेज से नवीन परती भूमि पर अवैध निर्माण कराकर भवन को किराए पर देना ग्राम प्रधान सेंभुई को भारी पड़ गया। जांच रिपोर्ट आने के बाद डीएम ने प्रधान के वित्तीय व प्रशासनिक अधिकार पर प्रतिबंध लगाते हुए 78,400 रुपये की आरसी जारी की है। गांव के विकास कार्यों के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित कराने का निर्देश डीपीआरओ को दिया गया है।
स्थानीय ब्लॉक क्षेत्र की ग्राम पंचायत सेंभुई के प्रधान भूपेंद्र प्रताप सिंह के खिलाफ गांव के ही प्रभात चंद्र उर्फ मनीष त्रिपाठी आदि ने डीएम अरुण कुमार को पत्र देकर अभिलेखों में नवीन परती के नाम दर्ज भूमि पर अपने अधिकारों का गलत तरीके से प्रयोग कर कब्जा करने की शिकायत की थी।
शिकायतकर्ता ने कहा था कि प्रधान ने न सिर्फ सरकारी भूमि पर कब्जा किया बल्कि उस पर मकान बनाकर बड़ौदा उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक की शाखा संचालित करने के लिए किराए पर भी दे दिया। ब्लॉक से लेकर जिला प्रशासन तक को दिए गए कई शिकायती पत्र पर कार्रवाई न होने के बाद शिकायतकर्ता ने उच्चन्यायालय की शरण ली।
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मामला न्यायालय पहुंचने की जानकारी होने के बाद हरकत में आए जिला प्रशासन ने प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए जिला कृषि अधिकारी तथा तहसील प्रशासन को जांच सौंपी थी। तीन दिन पूर्व ही तहसीलदार घनश्याम भारतीय ने प्रधान को उक्त भूमि से बेदखल कर दिया था वहीं जिला कृषि अधिकारी अखिलेश पांडेय की जांच रिपोर्ट मिलने के बाद डीएम ने गुरुवार को ग्राम प्रधान के वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकारों पर प्रतिबंध लगा दिया।
डीपीआरओ श्रेया मिश्रा को गांव में विकास कार्यों के सुचारु रूप से संचालन के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित कराने का निर्देश दिया। यही नहीं तहसील प्रशासन की ओर से बेदखली का आदेश जारी करने के साथ ही 78 हजार 400 रुपये की क्षतिपूर्ति तथा 935 रुपये निष्पादन शुल्क की आरसी भी जारी कर दी गई है।
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स्थानीय ब्लॉक क्षेत्र की ग्राम पंचायत सेंभुई के प्रधान भूपेंद्र प्रताप सिंह के खिलाफ गांव के ही प्रभात चंद्र उर्फ मनीष त्रिपाठी आदि ने डीएम अरुण कुमार को पत्र देकर अभिलेखों में नवीन परती के नाम दर्ज भूमि पर अपने अधिकारों का गलत तरीके से प्रयोग कर कब्जा करने की शिकायत की थी।
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शिकायतकर्ता ने कहा था कि प्रधान ने न सिर्फ सरकारी भूमि पर कब्जा किया बल्कि उस पर मकान बनाकर बड़ौदा उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक की शाखा संचालित करने के लिए किराए पर भी दे दिया। ब्लॉक से लेकर जिला प्रशासन तक को दिए गए कई शिकायती पत्र पर कार्रवाई न होने के बाद शिकायतकर्ता ने उच्चन्यायालय की शरण ली।
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मामला न्यायालय पहुंचने की जानकारी होने के बाद हरकत में आए जिला प्रशासन ने प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए जिला कृषि अधिकारी तथा तहसील प्रशासन को जांच सौंपी थी। तीन दिन पूर्व ही तहसीलदार घनश्याम भारतीय ने प्रधान को उक्त भूमि से बेदखल कर दिया था वहीं जिला कृषि अधिकारी अखिलेश पांडेय की जांच रिपोर्ट मिलने के बाद डीएम ने गुरुवार को ग्राम प्रधान के वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकारों पर प्रतिबंध लगा दिया।
डीपीआरओ श्रेया मिश्रा को गांव में विकास कार्यों के सुचारु रूप से संचालन के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित कराने का निर्देश दिया। यही नहीं तहसील प्रशासन की ओर से बेदखली का आदेश जारी करने के साथ ही 78 हजार 400 रुपये की क्षतिपूर्ति तथा 935 रुपये निष्पादन शुल्क की आरसी भी जारी कर दी गई है।