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आज विधानसभा की सदस्यता छोड़ सकते हैं राकेश प्रताप
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04 : गौरीगंज : विधायक राकेश प्रताप सिंह। -संवाद
- फोटो : AMETHI
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गौरीगंज (अमेठी)। गौरीगंज विधानसभा क्षेत्र से लगातार दूसरी बार विधायक चुने गए राकेश प्रताप सिंह आज अपना पद छोड़ सकते हैं। पद छोड़ने के बाद वे लखनऊ स्थित जीपीओ पर धरना शुरू करेंगे। विधायक अपने क्षेत्र की दो जर्जर सड़कों का पुनर्निर्माण नहीं होने से नाराज हैं। विधायक ने इस संबंध में पिछले दो अक्तूबर को जिला प्रशासन को ज्ञापन देकर अंतिम चेतावनी दी थी। विधायक ने कहा था कि 31 अक्तूबर को पूर्वाह्न 11 बजे तक दोनों सड़कों का निर्माण शुरू नहीं हुआ तो वे अपने पद से इस्तीफा दे देंगे।
समाजवादी पार्टी के टिकट पर 2012 के विधानसभा चुनाव में राकेश प्रताप सिंह गौरीगंज विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए थे। पांच वर्ष बाद वर्ष 2017 में वे दोबारा सपा के टिकट पर विधानसभा पहुंचे। पहली बार विधायक बनने के बाद प्रदेश में सपा की सरकार होने का लाभ उठाते हुए राकेश प्रताप सिंह ने अपने क्षेत्र में सड़कों के निर्माण के साथ तमाम विकास कार्य कराए।
2017 में भाजपा के प्रदेश की सत्ता पर काबिज होने के बाद से उनके पहले कार्यकाल में बनी कई सड़कें जर्जर हो गईं। इन्हीं सड़कों में शामिल कादूनाला थौरी मार्ग (9.15 किलोमीटर) व मुसाफिरखाना-पारा मार्ग (5.650 किलोमीटर) भी अति जर्जर हो चुका है। इन दोनों सड़कों को दुरुस्त कराने के लिए विधायक ने गत दो अक्तूबर को डीएम अरुण कुमार को ज्ञापन देकर 31 अक्तूबर तक का समय दिया था।
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कहा था कि 31 अक्तूबर को पूर्वाह्न 11 बजे तक दोनों सड़कों पर काम शुरू नहीं हुआ तो वे विधानसभा की सदस्यता से त्यागपत्र देकर जीपीओ पर बेमियादी धरना शुरू करेंगे। गौरतलब होगा कि 30 अक्तूबर की शाम तक दोनों जर्जर सड़कों के पुनर्निर्माण का कार्य शुरू नहीं हो सका है।
2016 में बनी थीं दोनों सड़कें
लखनऊ-वाराणसी राष्ट्रीय राजमार्ग पर कादूनाला से निकलकर थौरी व मुसाफिरखाना से निकलकर पारा बाजार को जोड़ने वाली दोनों सड़कों का निर्माण वर्ष 2016 में हुआ था। दोनों ग्रामीण सड़कें पीएमजीएसवाई के तहत बनाई गई थीं। 3.75 मीटर चौड़े कादूनाला-थौरी मार्ग का निर्माण तीन करोड़ 80 लाख 67 हजार रुपये की लागत से यूनिक कंस्ट्रक्शन कंपनी व 5.50 मीटर चौड़े मुसाफिरखाना-पारा संपर्क मार्ग का निर्माण चार करोड़ 28 लाख 99 हजार रुपये की लागत से मेसर्स राज कंस्ट्रक्शन कंपनी ने कराया था।
कैसे क्षतिग्रस्त हो गईं सड़कें
इन सड़कों का निर्माण पूरा होने के कुछ ही दिन बाद पूर्वांचल एक्सप्रेस का निर्माण शुरू हो गया। एक्सप्रेस वे की निर्माण में प्रयुक्त होने वाली सामग्री ढोने के लिए लगे वाहनों की दिन-रात आवाजाही से दोनों सड़कें जल्दी ही क्षतिग्रस्त हो गईं। पिछले कुछ वर्षों से तो यह सड़कें चलने लायक नहीं रह गई हैं।
प्राक्कलन समिति कर चुकी जांच
इन सड़कों के जर्जर होने व लोगों की ओर से लगातार मिल रही शिकायतों पर विधायक राकेश प्रताप सिंह ने इसकी शिकायत शासन में की थी। विधायक की शिकायत पर 10 मार्च 2020 को प्राक्कलन समिति ने दोनों सड़कों का स्थलीय निरीक्षण किया था। इस निरीक्षण के बाद पांच जनवरी 2021 को प्राक्कलन समिति के अध्यक्ष व सदस्यों ने दोबारा पीएमजीएसवाई के मुख्य कार्यपालक अधिकारी की मौजूदगी में सड़कों की जांच की थी।
सदन में उठाया था मामला
विधायक राकेश प्रताप सिंह ने दोनों जर्जर सड़कों का मुद्दा 23 फरवरी 2021 को सदन में भी उठाया था। विधायक के अनुसार सदन में पूछे गए प्रश्न के जवाब में शासन ने 25 फरवरी को लिखित जवाब देकर उन्हें बताया था कि दोनों सड़कों के पुनर्निर्माण का इस्टीमेट बन गया है तीन महीने में सड़कों का पुनर्निर्माण शुरू कर दिया जाएगा।
आईआईटी रुड़की में अटकी जांच
पांच जनवरी 2021 को हुई जांच के दौरान प्राक्कलन समिति ने दोनों सड़कों से निर्माण सामग्री का नमूना एकत्र कराया था। निर्माण सामग्री की गुणवत्ता जांचने के लिए इन नमूनों को जांच के लिए आईआईटी रुड़की भेजा गया। विभागीय जिम्मेदारों के अनुसार 10 माह बाद भी अभी आईआईटी रुड़की ने नमूनों की जांच रिपोर्ट नहीं भेजी है।
निर्माण एजेंसी की जिम्मेदारी
नियम है कि बड़ी सड़कों का निर्माण कराने के दौरान यदि कोई मार्ग क्षतिग्रस्त होता है तो उसे बड़ी सड़क का निर्माण करा रही एजेंसी ही दुरुस्त कराएगी। ऐसे में दोनों सड़कों को दुरुस्त कराने की जिम्मेदारी पूर्वांचल एक्सप्रेस का निर्माण कर रही एप्को इंफ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड की है। इस संबंध में मुख्य कार्यपालक अधिकारी पीएमजीसएवाई द्वारा मुख्य कार्यपालक अधिकारी यूपीडा को कई पत्र लिखे गए। पत्र के जवाब में यूपीडा के मुख्य कार्यपालक अधिकारी ने एप्को इंफ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड को दोनों सड़कें दुरुस्त कराने का लिखित निर्देश दिया था लेकिन एजेंसी ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया।
शासन को भेजा गया पुनर्निर्माण प्रस्ताव
विधायक द्वारा दो अक्तूबर को दिए गए ज्ञापन व इस संबंध में चार अक्तूबर को डीएम का निर्देश मिलने के बाद पीडब्ल्यूडी प्रांतीय खंड ने दोनों सड़कों के पुनर्निर्माण का प्रस्ताव शासन को भेजा है। भेजे गए प्रस्ताव में कादूनाला-थौरी मार्ग पर 14 करोड़ 40 लाख 75 हजार व मुसाफिरखाना पारा संपर्क मार्ग के निर्माण पर 10 करोड़ 28 लाख 10 हजार रुपये का खर्च आने की बात कही गई है। 29 अक्तूबर को जिले से भेजा गया प्रस्ताव मुख्य अभियंता अयोध्या द्वारा शनिवार को स्वीकृति के लिए प्रमुख अभियंता के पास भेज दिया गया है।
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समाजवादी पार्टी के टिकट पर 2012 के विधानसभा चुनाव में राकेश प्रताप सिंह गौरीगंज विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए थे। पांच वर्ष बाद वर्ष 2017 में वे दोबारा सपा के टिकट पर विधानसभा पहुंचे। पहली बार विधायक बनने के बाद प्रदेश में सपा की सरकार होने का लाभ उठाते हुए राकेश प्रताप सिंह ने अपने क्षेत्र में सड़कों के निर्माण के साथ तमाम विकास कार्य कराए।
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2017 में भाजपा के प्रदेश की सत्ता पर काबिज होने के बाद से उनके पहले कार्यकाल में बनी कई सड़कें जर्जर हो गईं। इन्हीं सड़कों में शामिल कादूनाला थौरी मार्ग (9.15 किलोमीटर) व मुसाफिरखाना-पारा मार्ग (5.650 किलोमीटर) भी अति जर्जर हो चुका है। इन दोनों सड़कों को दुरुस्त कराने के लिए विधायक ने गत दो अक्तूबर को डीएम अरुण कुमार को ज्ञापन देकर 31 अक्तूबर तक का समय दिया था।
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कहा था कि 31 अक्तूबर को पूर्वाह्न 11 बजे तक दोनों सड़कों पर काम शुरू नहीं हुआ तो वे विधानसभा की सदस्यता से त्यागपत्र देकर जीपीओ पर बेमियादी धरना शुरू करेंगे। गौरतलब होगा कि 30 अक्तूबर की शाम तक दोनों जर्जर सड़कों के पुनर्निर्माण का कार्य शुरू नहीं हो सका है।
2016 में बनी थीं दोनों सड़कें
लखनऊ-वाराणसी राष्ट्रीय राजमार्ग पर कादूनाला से निकलकर थौरी व मुसाफिरखाना से निकलकर पारा बाजार को जोड़ने वाली दोनों सड़कों का निर्माण वर्ष 2016 में हुआ था। दोनों ग्रामीण सड़कें पीएमजीएसवाई के तहत बनाई गई थीं। 3.75 मीटर चौड़े कादूनाला-थौरी मार्ग का निर्माण तीन करोड़ 80 लाख 67 हजार रुपये की लागत से यूनिक कंस्ट्रक्शन कंपनी व 5.50 मीटर चौड़े मुसाफिरखाना-पारा संपर्क मार्ग का निर्माण चार करोड़ 28 लाख 99 हजार रुपये की लागत से मेसर्स राज कंस्ट्रक्शन कंपनी ने कराया था।
कैसे क्षतिग्रस्त हो गईं सड़कें
इन सड़कों का निर्माण पूरा होने के कुछ ही दिन बाद पूर्वांचल एक्सप्रेस का निर्माण शुरू हो गया। एक्सप्रेस वे की निर्माण में प्रयुक्त होने वाली सामग्री ढोने के लिए लगे वाहनों की दिन-रात आवाजाही से दोनों सड़कें जल्दी ही क्षतिग्रस्त हो गईं। पिछले कुछ वर्षों से तो यह सड़कें चलने लायक नहीं रह गई हैं।
प्राक्कलन समिति कर चुकी जांच
इन सड़कों के जर्जर होने व लोगों की ओर से लगातार मिल रही शिकायतों पर विधायक राकेश प्रताप सिंह ने इसकी शिकायत शासन में की थी। विधायक की शिकायत पर 10 मार्च 2020 को प्राक्कलन समिति ने दोनों सड़कों का स्थलीय निरीक्षण किया था। इस निरीक्षण के बाद पांच जनवरी 2021 को प्राक्कलन समिति के अध्यक्ष व सदस्यों ने दोबारा पीएमजीएसवाई के मुख्य कार्यपालक अधिकारी की मौजूदगी में सड़कों की जांच की थी।
सदन में उठाया था मामला
विधायक राकेश प्रताप सिंह ने दोनों जर्जर सड़कों का मुद्दा 23 फरवरी 2021 को सदन में भी उठाया था। विधायक के अनुसार सदन में पूछे गए प्रश्न के जवाब में शासन ने 25 फरवरी को लिखित जवाब देकर उन्हें बताया था कि दोनों सड़कों के पुनर्निर्माण का इस्टीमेट बन गया है तीन महीने में सड़कों का पुनर्निर्माण शुरू कर दिया जाएगा।
आईआईटी रुड़की में अटकी जांच
पांच जनवरी 2021 को हुई जांच के दौरान प्राक्कलन समिति ने दोनों सड़कों से निर्माण सामग्री का नमूना एकत्र कराया था। निर्माण सामग्री की गुणवत्ता जांचने के लिए इन नमूनों को जांच के लिए आईआईटी रुड़की भेजा गया। विभागीय जिम्मेदारों के अनुसार 10 माह बाद भी अभी आईआईटी रुड़की ने नमूनों की जांच रिपोर्ट नहीं भेजी है।
निर्माण एजेंसी की जिम्मेदारी
नियम है कि बड़ी सड़कों का निर्माण कराने के दौरान यदि कोई मार्ग क्षतिग्रस्त होता है तो उसे बड़ी सड़क का निर्माण करा रही एजेंसी ही दुरुस्त कराएगी। ऐसे में दोनों सड़कों को दुरुस्त कराने की जिम्मेदारी पूर्वांचल एक्सप्रेस का निर्माण कर रही एप्को इंफ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड की है। इस संबंध में मुख्य कार्यपालक अधिकारी पीएमजीसएवाई द्वारा मुख्य कार्यपालक अधिकारी यूपीडा को कई पत्र लिखे गए। पत्र के जवाब में यूपीडा के मुख्य कार्यपालक अधिकारी ने एप्को इंफ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड को दोनों सड़कें दुरुस्त कराने का लिखित निर्देश दिया था लेकिन एजेंसी ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया।
शासन को भेजा गया पुनर्निर्माण प्रस्ताव
विधायक द्वारा दो अक्तूबर को दिए गए ज्ञापन व इस संबंध में चार अक्तूबर को डीएम का निर्देश मिलने के बाद पीडब्ल्यूडी प्रांतीय खंड ने दोनों सड़कों के पुनर्निर्माण का प्रस्ताव शासन को भेजा है। भेजे गए प्रस्ताव में कादूनाला-थौरी मार्ग पर 14 करोड़ 40 लाख 75 हजार व मुसाफिरखाना पारा संपर्क मार्ग के निर्माण पर 10 करोड़ 28 लाख 10 हजार रुपये का खर्च आने की बात कही गई है। 29 अक्तूबर को जिले से भेजा गया प्रस्ताव मुख्य अभियंता अयोध्या द्वारा शनिवार को स्वीकृति के लिए प्रमुख अभियंता के पास भेज दिया गया है।