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Amethi News: झलकारी बाई की जयंती पर निकाला जुलूस
Sat, 23 Nov 2024 02:19 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Sat, 23 Nov 2024 02:19 AM IST
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अमेठी सिटी। 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की अमर शहीद वीरांगना झलकारी बाई की जयंती धूमधाम से मनाई गई। अमेठी और मुंशीगंज में बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर और वीरांगना झलकारी बाई की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया। बौद्ध धम्म की परंपरा के अनुरूप सामूहिक त्रिरण पंचशील के साथ कार्यक्रम शुरू हुआ। जुलूस में एक घोड़े पर सवार बालिका सृष्टि झलकारी बाई की भूमिका में दिखी।
सामूहिक त्रिसरण पंचशील कार्यक्रम के बाद लगभग 2.30 बजे जुलूस का नगर भ्रमण शुरू हुआ। वीरांगना झलकारी बाई चेतना समिति की ओर से जिलाध्यक्ष संजय कुमार ने कहा कि झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की महिला सेना दुर्गा दल की कमांडर रहीं झलकारी बाई का जन्म 22 नवंबर 1830 को झांसी जिले के भोजला गांव में माता यमुना बाई की कोख से हुआ था। वह तीर तलवार चलाने और मलखंभ की माहिर थीं।
समिति के संरक्षक संजीव भारती ने कहा कि वीरांगना झलकारी बाई को किसी जाति की सीमा में बांधना ठीक नहीं है। झलकारी बाई के परिवार के बलिदान के कारण ही 1857 का स्वतंत्रता संग्राम आगे निर्णायक हुआ और अंग्रेजों को भारत छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा।
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इस दौरान कार्यक्रम संयोजक राम चंद्र बौद्ध, सह संयोजक जिया लाल बौद्ध, राम चंद्र सरस, इंद्र पाल गौतम, ललित कुमार, श्याम लाल, नरेंद्र कुमार, मो. इश्तियाक, ज्योति वर्मा, रामलली बौद्ध, सुमित्राआ आदि ने आए हुए अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम में बृजलाल वर्मा, पांचू राम मौर्य, बबलू तिवारी, सियाराम बौद्ध, पलटूराम, हरिश्चंद्र कोरी, त्रिभुवन दत्त, राम फल फौजी, आशा देवी, राम शंकर दानी, लालती, ऊषा, संगीता गौतम, कलावती, वर्षा, शिल्पा, हेमराज आदि मौजूद रहे।
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सामूहिक त्रिसरण पंचशील कार्यक्रम के बाद लगभग 2.30 बजे जुलूस का नगर भ्रमण शुरू हुआ। वीरांगना झलकारी बाई चेतना समिति की ओर से जिलाध्यक्ष संजय कुमार ने कहा कि झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की महिला सेना दुर्गा दल की कमांडर रहीं झलकारी बाई का जन्म 22 नवंबर 1830 को झांसी जिले के भोजला गांव में माता यमुना बाई की कोख से हुआ था। वह तीर तलवार चलाने और मलखंभ की माहिर थीं।
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समिति के संरक्षक संजीव भारती ने कहा कि वीरांगना झलकारी बाई को किसी जाति की सीमा में बांधना ठीक नहीं है। झलकारी बाई के परिवार के बलिदान के कारण ही 1857 का स्वतंत्रता संग्राम आगे निर्णायक हुआ और अंग्रेजों को भारत छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा।
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इस दौरान कार्यक्रम संयोजक राम चंद्र बौद्ध, सह संयोजक जिया लाल बौद्ध, राम चंद्र सरस, इंद्र पाल गौतम, ललित कुमार, श्याम लाल, नरेंद्र कुमार, मो. इश्तियाक, ज्योति वर्मा, रामलली बौद्ध, सुमित्राआ आदि ने आए हुए अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम में बृजलाल वर्मा, पांचू राम मौर्य, बबलू तिवारी, सियाराम बौद्ध, पलटूराम, हरिश्चंद्र कोरी, त्रिभुवन दत्त, राम फल फौजी, आशा देवी, राम शंकर दानी, लालती, ऊषा, संगीता गौतम, कलावती, वर्षा, शिल्पा, हेमराज आदि मौजूद रहे।