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Amethi News: कमजोर शरीर को ताकत दे रही फिजियोथेरेपी
Wed, 09 Sep 2026 12:32 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Wed, 09 Sep 2026 12:32 AM IST
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जिला अस्पताल के फिजियोथेरेपी कक्ष में मरीज का इलाज करते डॉक्टर। -संवाद
अमेठी सिटी। चोट, सर्जरी या बीमारी के बाद कमजोर हुए शरीर को फिर से सक्रिय करने में फिजियोथेरेपी अहम भूमिका निभा रही है। जिला अस्पताल की फिजियोथेरेपी इकाई में रोजाना करीब 40 मरीज उपचार करा रहे हैं। कमर, गर्दन, घुटने और कंधे के दर्द से परेशान मरीजों के साथ चोट या सर्जरी के बाद प्रभावित अंग की कमजोरी और जकड़न से जूझ रहे लोग भी यहां पहुंच रहे हैं। विशेषज्ञ मरीज की स्थिति के अनुसार व्यायाम और कसरत कराकर प्रभावित अंग की ताकत और गति बढ़ाने में मदद कर रहे हैं।
जिला अस्पताल के फिजियोथेरेपिस्ट राम सिंह सूर्यवंशी ने बताया कि हर मरीज की समस्या और शारीरिक क्षमता के अनुसार उपचार की योजना तैयार की जाती है। इसमें मांसपेशियों की कसरत, जोड़ों की गतिशीलता बढ़ाने और शरीर की गतिविधियों को बेहतर करने वाले अभ्यास कराए जाते हैं। नियमित अभ्यास से प्रभावित अंग की कार्यक्षमता बढ़ाने में मदद मिलती है। इससे मरीज धीरे-धीरे रोजमर्रा के काम खुद करने में सक्षम हो सकते हैं।
दुर्घटना या सर्जरी के बाद कई मरीजों के हाथ-पैर की गति सीमित हो जाती है। ऐसे मरीजों के पुनर्वास में फिजियोथेरेपी उपयोगी है। घुटने, कंधे, कमर और गर्दन के दर्द में विशेषज्ञ की सलाह से किए गए अभ्यास जोड़ों की गतिशीलता बढ़ाने में सहायक होते हैं। लंबे समय तक बैठे रहने या शारीरिक गतिविधि कम होने से कमजोर हुई मांसपेशियों को मजबूत करने में भी नियमित व्यायाम मदद करता है।
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बुजुर्गों में शरीर का संतुलन और चलने-फिरने की क्षमता बनाए रखने में भी फिजियोथेरेपी मददगार है। खिलाड़ियों को चोट के बाद खेल गतिविधियों में लौटने, मांसपेशियों की ताकत बढ़ाने और शरीर का संतुलन बेहतर करने में इसका लाभ मिलता है। मरीज की स्थिति के अनुसार व्यायाम की अवधि और तीव्रता तय की जाती है। जल्दबाजी में अधिक व्यायाम करने से बचने की सलाह दी जाती है।
फिजियोथेरेपी से ये फायदे
दर्द कम करने, मांसपेशियों की ताकत और लचीलेपन में सुधार, जोड़ों की गतिशीलता बढ़ाने, शरीर का संतुलन बेहतर करने और चोट-सर्जरी के बाद पुनर्वास में मदद मिलती है। रोजमर्रा के कामों में आत्मनिर्भरता बढ़ाने में भी यह सहायक है।
इन लोगों को अधिक जरूरत
चोट या दुर्घटना के बाद पुनर्वास करा रहे मरीज, सर्जरी के बाद कमजोरी से जूझ रहे लोग, जोड़ों और मांसपेशियों के दर्द से परेशान मरीज, बुजुर्ग और खिलाड़ी फिजियोथेरेपी से लाभ ले सकते हैं। उपचार विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार कराना जरूरी है।
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जिला अस्पताल के फिजियोथेरेपिस्ट राम सिंह सूर्यवंशी ने बताया कि हर मरीज की समस्या और शारीरिक क्षमता के अनुसार उपचार की योजना तैयार की जाती है। इसमें मांसपेशियों की कसरत, जोड़ों की गतिशीलता बढ़ाने और शरीर की गतिविधियों को बेहतर करने वाले अभ्यास कराए जाते हैं। नियमित अभ्यास से प्रभावित अंग की कार्यक्षमता बढ़ाने में मदद मिलती है। इससे मरीज धीरे-धीरे रोजमर्रा के काम खुद करने में सक्षम हो सकते हैं।
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दुर्घटना या सर्जरी के बाद कई मरीजों के हाथ-पैर की गति सीमित हो जाती है। ऐसे मरीजों के पुनर्वास में फिजियोथेरेपी उपयोगी है। घुटने, कंधे, कमर और गर्दन के दर्द में विशेषज्ञ की सलाह से किए गए अभ्यास जोड़ों की गतिशीलता बढ़ाने में सहायक होते हैं। लंबे समय तक बैठे रहने या शारीरिक गतिविधि कम होने से कमजोर हुई मांसपेशियों को मजबूत करने में भी नियमित व्यायाम मदद करता है।
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बुजुर्गों में शरीर का संतुलन और चलने-फिरने की क्षमता बनाए रखने में भी फिजियोथेरेपी मददगार है। खिलाड़ियों को चोट के बाद खेल गतिविधियों में लौटने, मांसपेशियों की ताकत बढ़ाने और शरीर का संतुलन बेहतर करने में इसका लाभ मिलता है। मरीज की स्थिति के अनुसार व्यायाम की अवधि और तीव्रता तय की जाती है। जल्दबाजी में अधिक व्यायाम करने से बचने की सलाह दी जाती है।
फिजियोथेरेपी से ये फायदे
दर्द कम करने, मांसपेशियों की ताकत और लचीलेपन में सुधार, जोड़ों की गतिशीलता बढ़ाने, शरीर का संतुलन बेहतर करने और चोट-सर्जरी के बाद पुनर्वास में मदद मिलती है। रोजमर्रा के कामों में आत्मनिर्भरता बढ़ाने में भी यह सहायक है।
इन लोगों को अधिक जरूरत
चोट या दुर्घटना के बाद पुनर्वास करा रहे मरीज, सर्जरी के बाद कमजोरी से जूझ रहे लोग, जोड़ों और मांसपेशियों के दर्द से परेशान मरीज, बुजुर्ग और खिलाड़ी फिजियोथेरेपी से लाभ ले सकते हैं। उपचार विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार कराना जरूरी है।