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Amethi News: फूलन ने दौड़ में बनाई पहचान
Tue, 29 Oct 2024 01:33 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Tue, 29 Oct 2024 01:33 AM IST
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लंबी दौड़ लगाती फूलन पाल।
भादर (अमेठी)। लगन और मेहनत की जुगलबंदी देर-सवेर सफलता का मुकाम तय ही कर देती है। भेवई गांव की फूलन पाल इस रास्ते की सफल राहगीर बनकर उभरी हैं। कम उम्र में जब उसने बाग में दौड़ लगानी शुरू की तो किसी ने सोचा भी नहीं था कि बिना संसाधन यह बिटिया एथलेटिक्स ट्रैक की रानी बन जाएगी। आज फूलन की झोली गोल्ड व सिल्वर मेडलों से भरी है। उसका सपना अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में अपनी धमक बनाना है।
भादर ब्लाॅक के पूरे शुक्लान मजरे भेवई गांव निवासी मनीष पाल की बेटी फूलन पाल का रुझान बचपन से ही एथलेटिक्स खेलों की तरफ था। फूलन के चाचा कमलेश पाल ने न केवल उसकी प्रतिभा को पहचाना, बल्कि उसे मुकाम तक पहुंचाने के लिए बतौर सारथी खुद भी जमीन पर उतर पड़े। कमलेश पाल ने नगरडीह के बाग में एथलेटिक्स ट्रैक बनाया। उसके बाद तो मानो फूलन की उड़ान को पंख लग गए।
महज 15 वर्ष की उम्र में बिना किसी संसाधन के वह एथलेटिक्स ट्रैक पर उतर पड़ी। नियमित कड़े अभ्यास से फूलन ने कम दूरी से लेकर लंबी दूरी की दौड़ प्रतियोगिताओं में परचम लहराना शुरू कर दिया। उसने प्रदेश से लेकर देश स्तरीय प्रतियोगिताओं में मेडलों की झड़ी लगा दी। वर्तमान समय में फूलन क्षेत्र की बालिकाओं के लिए प्रेरणास्रोत बनी हैं।
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फूलन की झोली में आए मेडल
2016 में फैजाबाद में हुई अंडर-16 पंद्रह सौ मीटर दौड़ में गोल्ड।
2018 में लखनऊ में हुई एथलेटिक्स प्रतियोगिता में 15000 मीटर व पांच हजार मीटर दौड़ में सिल्वर मेडल।
2019 में लखनऊ में हुई एथलेटिक्स प्रतियोगिता में 10 हजार मीटर दौड़ में गोल्ड मेडल।
2020 में हुई बंगलूरु यूनिवर्सिटी में 10 हजार मीटर दौड़ में सिल्वर मेडल।
2021 में पटियाला में हुई एथलेटिक्स प्रतियोगिता में 10 हजार मीटर दौड़ में सिल्वर मेडल।
2022 में नेशनल इंटरस्टेट सीनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप 10 हजार मीटर दौड़ में गोल्ड मेडल।
2023 में कर्नाटक में हुई इंटरस्टेट 10 हजार मीटर दौड़ में गोल्ड मेडल।
इनसेट
स्पोर्ट्स हॉस्टल में हुआ दाखिला
फूलन पाल के चाचा कमलेश पाल ने बताया कि उसे बचपन से दौड़ने का शौक था। उसके रुझान को देखते हुए 15 वर्ष की उम्र में नगरडीह स्थित बाग में ट्रैक बनाकर उसे दौड़ने का अभ्यास कराना शुरू किया। उसके कठिन परिश्रम व लगन का नतीजा यह हुआ कि 2023 में उसका चयन मध्यप्रदेश के भोपाल स्थित स्पोर्ट्स हॉस्टल में हो गया। स्पोर्ट्स हॉस्टल में वह लंबी दूरी की दौड़ के साथ ही अन्य एथलेटिक्स खेलों का प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं।
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भादर ब्लाॅक के पूरे शुक्लान मजरे भेवई गांव निवासी मनीष पाल की बेटी फूलन पाल का रुझान बचपन से ही एथलेटिक्स खेलों की तरफ था। फूलन के चाचा कमलेश पाल ने न केवल उसकी प्रतिभा को पहचाना, बल्कि उसे मुकाम तक पहुंचाने के लिए बतौर सारथी खुद भी जमीन पर उतर पड़े। कमलेश पाल ने नगरडीह के बाग में एथलेटिक्स ट्रैक बनाया। उसके बाद तो मानो फूलन की उड़ान को पंख लग गए।
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महज 15 वर्ष की उम्र में बिना किसी संसाधन के वह एथलेटिक्स ट्रैक पर उतर पड़ी। नियमित कड़े अभ्यास से फूलन ने कम दूरी से लेकर लंबी दूरी की दौड़ प्रतियोगिताओं में परचम लहराना शुरू कर दिया। उसने प्रदेश से लेकर देश स्तरीय प्रतियोगिताओं में मेडलों की झड़ी लगा दी। वर्तमान समय में फूलन क्षेत्र की बालिकाओं के लिए प्रेरणास्रोत बनी हैं।
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फूलन की झोली में आए मेडल
2016 में फैजाबाद में हुई अंडर-16 पंद्रह सौ मीटर दौड़ में गोल्ड।
2018 में लखनऊ में हुई एथलेटिक्स प्रतियोगिता में 15000 मीटर व पांच हजार मीटर दौड़ में सिल्वर मेडल।
2019 में लखनऊ में हुई एथलेटिक्स प्रतियोगिता में 10 हजार मीटर दौड़ में गोल्ड मेडल।
2020 में हुई बंगलूरु यूनिवर्सिटी में 10 हजार मीटर दौड़ में सिल्वर मेडल।
2021 में पटियाला में हुई एथलेटिक्स प्रतियोगिता में 10 हजार मीटर दौड़ में सिल्वर मेडल।
2022 में नेशनल इंटरस्टेट सीनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप 10 हजार मीटर दौड़ में गोल्ड मेडल।
2023 में कर्नाटक में हुई इंटरस्टेट 10 हजार मीटर दौड़ में गोल्ड मेडल।
इनसेट
स्पोर्ट्स हॉस्टल में हुआ दाखिला
फूलन पाल के चाचा कमलेश पाल ने बताया कि उसे बचपन से दौड़ने का शौक था। उसके रुझान को देखते हुए 15 वर्ष की उम्र में नगरडीह स्थित बाग में ट्रैक बनाकर उसे दौड़ने का अभ्यास कराना शुरू किया। उसके कठिन परिश्रम व लगन का नतीजा यह हुआ कि 2023 में उसका चयन मध्यप्रदेश के भोपाल स्थित स्पोर्ट्स हॉस्टल में हो गया। स्पोर्ट्स हॉस्टल में वह लंबी दूरी की दौड़ के साथ ही अन्य एथलेटिक्स खेलों का प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं।