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Amethi News: एक को बचाने में गई दूसरे की जान
Sat, 20 Jun 2026 12:13 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Sat, 20 Jun 2026 12:13 AM IST
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जगदीशपुर। हरपालपुर गांव में शुक्रवार को हर ओर मातम पसरा रहा। खेत में उतरे करंट की चपेट में आकर किसान हीरालाल प्रजापति और रामबोध यादव की मौत के बाद गांव की गलियों से लेकर चौपाल तक सिर्फ इसी हादसे की चर्चा होती रही। दोनों परिवारों के घरों में सुबह से ग्रामीणों और रिश्तेदारों का जमावड़ा लगा रहा।
ग्रामीणों के मुताबिक हादसे का सबसे मार्मिक पहलू यह रहा कि रामबोध किसी काम से खेत की ओर जा रहे थे। इसी दौरान उन्होंने हीरालाल को जमीन पर पड़ा देखा। वह उन्हें बचाने के लिए दौड़ पड़े, लेकिन खेत में फैले करंट की जानकारी न होने के कारण खुद भी उसकी चपेट में आ गए। कुछ ही पलों में दोनों किसानों की मौत हो गई। गांव के लोग दिनभर यही कहते रहे कि एक जान बचाने की कोशिश में दूसरी जान भी चली गई।
दोनों परिवारों में कोहराम मचा रहा। हीरालाल की पत्नी राजी, बेटे अशर्फीलाल समेत अन्य परिजन बिलखते रहे। रामबोध यादव की पत्नी कुसमा देवी, बेटे जितेंद्र और रंजीत का रो-रोकर बुरा हाल था। घरों के बाहर बैठीं महिलाएं परिजनों को सांत्वना देती रहीं, लेकिन किसी के पास इस दर्दनाक हादसे का जवाब नहीं था।
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दोपहर बाद जब दोनों किसानों की अंतिम यात्रा निकली तो गांव का माहौल और गमगीन हो गया। तमाम ग्रामीण अंतिम यात्रा में शामिल हुए। एक के बाद एक निकली दोनों अर्थियों को देखकर लोगों की आंखें नम हो गईं। गांव के बुजुर्गों का कहना था कि वर्षों बाद उन्होंने एक ही दिन में गांव से दो किसानों की अर्थियां उठते देखी हैं। शाम तक पूरे गांव में शोक का माहौल बना रहा।
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ग्रामीणों के मुताबिक हादसे का सबसे मार्मिक पहलू यह रहा कि रामबोध किसी काम से खेत की ओर जा रहे थे। इसी दौरान उन्होंने हीरालाल को जमीन पर पड़ा देखा। वह उन्हें बचाने के लिए दौड़ पड़े, लेकिन खेत में फैले करंट की जानकारी न होने के कारण खुद भी उसकी चपेट में आ गए। कुछ ही पलों में दोनों किसानों की मौत हो गई। गांव के लोग दिनभर यही कहते रहे कि एक जान बचाने की कोशिश में दूसरी जान भी चली गई।
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दोनों परिवारों में कोहराम मचा रहा। हीरालाल की पत्नी राजी, बेटे अशर्फीलाल समेत अन्य परिजन बिलखते रहे। रामबोध यादव की पत्नी कुसमा देवी, बेटे जितेंद्र और रंजीत का रो-रोकर बुरा हाल था। घरों के बाहर बैठीं महिलाएं परिजनों को सांत्वना देती रहीं, लेकिन किसी के पास इस दर्दनाक हादसे का जवाब नहीं था।
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दोपहर बाद जब दोनों किसानों की अंतिम यात्रा निकली तो गांव का माहौल और गमगीन हो गया। तमाम ग्रामीण अंतिम यात्रा में शामिल हुए। एक के बाद एक निकली दोनों अर्थियों को देखकर लोगों की आंखें नम हो गईं। गांव के बुजुर्गों का कहना था कि वर्षों बाद उन्होंने एक ही दिन में गांव से दो किसानों की अर्थियां उठते देखी हैं। शाम तक पूरे गांव में शोक का माहौल बना रहा।