{"_id":"636e89c1c5134975505afc52","slug":"officers-included-in-384-crore-scam-will-suffer-amethi-news-lko6567068195","type":"story","status":"publish","title_hn":"384 करोड़ के घपले में बढ़ेंगी अफसरों की मुश्किलें","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
384 करोड़ के घपले में बढ़ेंगी अफसरों की मुश्किलें
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गौरीगंज (अमेठी)। एनएच-56 के दो बाईपास में अधिग्रहीत जमीनों के मुआवजा वितरण के नाम पर 384 अफसरों द्वारा करोड़ रुपये लुटाने के मामले में अफसरों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। अमेठी सांसद व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने पूरे मामले की रिपोर्ट डीएम से मांगी है।
लखनऊ से वाराणसी के बीच निर्मित एनएच-56 का चौड़ीकरण कार्य वर्ष 2013 में स्वीकृत हुआ था। स्वीकृति के बाद वर्ष 2015 में जिले की मुसाफिरखाना तहसील के 45 गांवों से होकर गुजरने वाले 49 किलोमीटर लंबे इस मार्ग के चौड़ीकरण के अलावा मुसाफिरखाना व जगदीशपुर में बाईपास के लिए भूमि अधिग्रहीत की गई।
भूमि अधिग्रहण के दौरान तत्कालीन तहसील स्तरीय अफसरों ने आला अफसरों व एनएचएआई के अफसरों की मिलीभगत से बाईपास की उन जमीनों को भी एनएच चौड़ीकरण में शामिल जमीनों के बराबर मुआवजा दे दिया जिन्हें कृषि दर मिलनी चाहिए थी। इस खेल में अफसरों ने 180 करोड़ रुपये के बजाए 564 करोड़ (384 करोड़ रुपये अधिक) रुपये लुटा दिए।
विज्ञापन
पिछले दिनों डीएम राकेश कुमार मिश्र की ओर से कराई गई जांच में इसकी पुष्टि होने के बाद रिपोर्ट शासन को भेजी जा चुकी है। इस मामले में 1062 किसानों को नोटिस भी जारी हो चुकी है। शुक्रवार को इस मामले को केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने संज्ञान लिया। स्मृति ने डीएम से पूरे मामले में रिपोर्ट तलब की है। ऐसे में दोषी अफसरों की मुश्किल बढ़नी तय है। केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी के प्रतिनिधि विजय गुप्ता ने बताया कि मंत्री ने डीएम से मामले की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। रिपोर्ट मिलने के बाद केंद्र सरकार को भी अवगत कराया जाएगा।
विज्ञापन
लखनऊ से वाराणसी के बीच निर्मित एनएच-56 का चौड़ीकरण कार्य वर्ष 2013 में स्वीकृत हुआ था। स्वीकृति के बाद वर्ष 2015 में जिले की मुसाफिरखाना तहसील के 45 गांवों से होकर गुजरने वाले 49 किलोमीटर लंबे इस मार्ग के चौड़ीकरण के अलावा मुसाफिरखाना व जगदीशपुर में बाईपास के लिए भूमि अधिग्रहीत की गई।
विज्ञापन
भूमि अधिग्रहण के दौरान तत्कालीन तहसील स्तरीय अफसरों ने आला अफसरों व एनएचएआई के अफसरों की मिलीभगत से बाईपास की उन जमीनों को भी एनएच चौड़ीकरण में शामिल जमीनों के बराबर मुआवजा दे दिया जिन्हें कृषि दर मिलनी चाहिए थी। इस खेल में अफसरों ने 180 करोड़ रुपये के बजाए 564 करोड़ (384 करोड़ रुपये अधिक) रुपये लुटा दिए।
विज्ञापन
पिछले दिनों डीएम राकेश कुमार मिश्र की ओर से कराई गई जांच में इसकी पुष्टि होने के बाद रिपोर्ट शासन को भेजी जा चुकी है। इस मामले में 1062 किसानों को नोटिस भी जारी हो चुकी है। शुक्रवार को इस मामले को केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने संज्ञान लिया। स्मृति ने डीएम से पूरे मामले में रिपोर्ट तलब की है। ऐसे में दोषी अफसरों की मुश्किल बढ़नी तय है। केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी के प्रतिनिधि विजय गुप्ता ने बताया कि मंत्री ने डीएम से मामले की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। रिपोर्ट मिलने के बाद केंद्र सरकार को भी अवगत कराया जाएगा।