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न तो जरूरी जांचें न मिल पा रहा संपूर्ण इलाज
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गौरीगंज (अमेठी)। मलिक मोहम्मद जायसी संयुक्त जिला अस्पताल में मरीजों की जांच हो पाना मुश्किल है। पैथोलाजिस्ट व लैब सहायक की कमी से गंभीर बीमारियों से जुड़ी जांचें अस्पताल में नहीं हो पा रही हैं। ऐसे में मरीजों को निजी पैथोलॉजी में मोटी रकम खर्च करनी पड़ रही है या दूसरे जिलों का चक्कर काटना पड़ रहा है। साथ ही जिला अस्पताल का डीडीओ कोड एलॉट नहीं होने से न तो दवाओं की आपूर्ति हो पा रही और न ही चिकित्सकों की तैनाती हो पा रही है।
जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने की कोशिश नाकामयाब साबित हो रही है। जिला अस्पताल का संचालन शुरू होने के बाद शासन की ओर से सीएमएस की तैनाती करते हुए 34 चिकित्सकों के पद सृजित किए गए हैं। सृजित पदों की तुलना में जिला अस्पताल में वर्तमान में महज नौ चिकित्सकों की ही तैनाती है। ऐसे में मरीजों का उपचार मुश्किल हो रहा है।
इसके अलावा मरीजों की लिखी जा रही जांचें भी अस्पताल की पैथोलॉजी में नहीं हो पा रही। जिला अस्पताल में दो पैथोलॉजिस्ट एमडी के सृजित पद पर एक भी तैनाती नहीं है। लैब सहायक पद पर भी मात्र तीन सहायकों की तैनाती है। संबद्ध सहायक किसी तरह जिला अस्पताल में पैथोलॉजी संचालित कर रहे हैं। पैथोलॉजी में महज खून की सामान्य जांचें ही हो पा रही हैं।
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गंभीर बीमारी से ग्रसित मरीजों की जांच पैथोलॉजी में नहीं हो पा रही है। इतना ही नहीं जिला अस्पताल में डायलिसिस की सुविधा होने के बावजूद जांच नहीं हो पाने से मरीजों को परेशानी उठानी पड़ रही है। डायलिसिस से पहले होने वाली जांच के लिए मरीजों को निजी पैथोलॉजी या गैर जिले के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
महज इन जांचों की सुविधा
जिला अस्पताल में संचालित पैथालॉजी में सीबीसी, एचबी, टीएलसी, एसआर, यूरिन, एचआईबी, टाइफाइड, डेंगू, फाइलेरिया स्लाइड, ब्लड ग्रुप, आरबीएस, एमपी, एचबीएसएजी व फास्टिंग पीपी की जांच सुविधा मरीजों को मिल पा रही है।
नहीं हो रहीं यह जांचें
बायोकेमेस्ट्री के अंतर्गत करीब 650 प्रकार की जांच तो यूरिया, क्रेटनिन, किडनी फ्ंक्शन टेस्ट (केएफटी), लिवर फ्ंक्शन टेस्ट (एलएफटी), लिपिड प्रोफाइल व इक्ट्रोलाइट समेत करीब 300 प्रकार की अन्य जांचें नहीं हो पा रही हैं।
बढ़ाई जाए जांचें
कटरालालगंज निवासी धर्मेंद्र शुक्ल ने बताया कि अस्पताल में जांच सुविधा नहीं होने से परेशानी हो रही है। अस्पताल की ओपीडी में पहुंचे वाले मरीजों की सभी प्रकार की जांच हो सके इसकी सुविधा बढ़ाई जानी चाहिए।
पैथोलॉजिस्ट की हो तैनाती
गौरीपुर गांव निवासी वेद प्रकाश मिश्र का कहना है कि पैथालॉजिस्ट की तैनाती न होने से जांच रिपोर्ट पर भी सवाल उठते हैं। इसके अलावा अस्पताल में डायलिसिस के साथ गर्भवती महिलाओं व प्री-सर्जिकल (सर्जरी के पहले) कई प्रकार की जांच होनी अनिवार्य होती हैं। लेकिन अस्पताल में यह जांचें नहीं हो पा रही हैं।
शासन को भेजा गया है पत्र
मलिक मोहम्मद जायसी संयुक्त जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. बद्री प्रसाद अग्रवाल ने बताया कि पैथोलॉजिस्ट की तैनाती का अनुरोध शासन से किया गया है। अस्पताल को डीडीओ कोड एलॉट नहीं होने से मरीजों को स्वास्थ्य सुविधा का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है। सीएमओ की मदद से अस्पताल में दवा व कर्मियों को कमी को दूर कर मरीजों का उपचार किया जा रहा है। जिला अस्पताल में मरीजों को बेहतर उपचार मिल सके इसके लिए हर संभव कोशिश के साथ शासन से पत्राचार किया जा रहा है।
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जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने की कोशिश नाकामयाब साबित हो रही है। जिला अस्पताल का संचालन शुरू होने के बाद शासन की ओर से सीएमएस की तैनाती करते हुए 34 चिकित्सकों के पद सृजित किए गए हैं। सृजित पदों की तुलना में जिला अस्पताल में वर्तमान में महज नौ चिकित्सकों की ही तैनाती है। ऐसे में मरीजों का उपचार मुश्किल हो रहा है।
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इसके अलावा मरीजों की लिखी जा रही जांचें भी अस्पताल की पैथोलॉजी में नहीं हो पा रही। जिला अस्पताल में दो पैथोलॉजिस्ट एमडी के सृजित पद पर एक भी तैनाती नहीं है। लैब सहायक पद पर भी मात्र तीन सहायकों की तैनाती है। संबद्ध सहायक किसी तरह जिला अस्पताल में पैथोलॉजी संचालित कर रहे हैं। पैथोलॉजी में महज खून की सामान्य जांचें ही हो पा रही हैं।
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गंभीर बीमारी से ग्रसित मरीजों की जांच पैथोलॉजी में नहीं हो पा रही है। इतना ही नहीं जिला अस्पताल में डायलिसिस की सुविधा होने के बावजूद जांच नहीं हो पाने से मरीजों को परेशानी उठानी पड़ रही है। डायलिसिस से पहले होने वाली जांच के लिए मरीजों को निजी पैथोलॉजी या गैर जिले के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
महज इन जांचों की सुविधा
जिला अस्पताल में संचालित पैथालॉजी में सीबीसी, एचबी, टीएलसी, एसआर, यूरिन, एचआईबी, टाइफाइड, डेंगू, फाइलेरिया स्लाइड, ब्लड ग्रुप, आरबीएस, एमपी, एचबीएसएजी व फास्टिंग पीपी की जांच सुविधा मरीजों को मिल पा रही है।
नहीं हो रहीं यह जांचें
बायोकेमेस्ट्री के अंतर्गत करीब 650 प्रकार की जांच तो यूरिया, क्रेटनिन, किडनी फ्ंक्शन टेस्ट (केएफटी), लिवर फ्ंक्शन टेस्ट (एलएफटी), लिपिड प्रोफाइल व इक्ट्रोलाइट समेत करीब 300 प्रकार की अन्य जांचें नहीं हो पा रही हैं।
बढ़ाई जाए जांचें
कटरालालगंज निवासी धर्मेंद्र शुक्ल ने बताया कि अस्पताल में जांच सुविधा नहीं होने से परेशानी हो रही है। अस्पताल की ओपीडी में पहुंचे वाले मरीजों की सभी प्रकार की जांच हो सके इसकी सुविधा बढ़ाई जानी चाहिए।
पैथोलॉजिस्ट की हो तैनाती
गौरीपुर गांव निवासी वेद प्रकाश मिश्र का कहना है कि पैथालॉजिस्ट की तैनाती न होने से जांच रिपोर्ट पर भी सवाल उठते हैं। इसके अलावा अस्पताल में डायलिसिस के साथ गर्भवती महिलाओं व प्री-सर्जिकल (सर्जरी के पहले) कई प्रकार की जांच होनी अनिवार्य होती हैं। लेकिन अस्पताल में यह जांचें नहीं हो पा रही हैं।
शासन को भेजा गया है पत्र
मलिक मोहम्मद जायसी संयुक्त जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. बद्री प्रसाद अग्रवाल ने बताया कि पैथोलॉजिस्ट की तैनाती का अनुरोध शासन से किया गया है। अस्पताल को डीडीओ कोड एलॉट नहीं होने से मरीजों को स्वास्थ्य सुविधा का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है। सीएमओ की मदद से अस्पताल में दवा व कर्मियों को कमी को दूर कर मरीजों का उपचार किया जा रहा है। जिला अस्पताल में मरीजों को बेहतर उपचार मिल सके इसके लिए हर संभव कोशिश के साथ शासन से पत्राचार किया जा रहा है।