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मिथक तोड़ने में कामयाब रहे मयंकेश्वर शरण सिंह

Thu, 10 Mar 2022 11:53 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 10 Mar 2022 11:53 PM IST
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mayankeshwar won election on bjp ticket twice from tiloi
37 : गौरीगंज : तिलोई के भाजपा विधायक मयंकेश्वर शरण सिंह। -संवाद - फोटो : AMETHI
गौरीगंज (अमेठी)। 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के टिकट पर लगातार दूसरी बार जीत दर्जकर मयंकेश्वर शरण सिंह तीन दशक से चला आ रहा एक मिथक तोड़ने में कामयाब रहे। तीन दशक के चुनावी आंकड़े बानगी हैं कि 1991 के बाद हुए विधानसभा चुनावों में इस विधानसभा क्षेत्र में कोई भी विधायक लगातार उसी पार्टी के टिकट पर विधानसभा चुनाव नहीं जीत सका। यह ऐसा मिथक था जो अंदरखाने कार्यकर्ताओं के लिए भी उहापोह का कारण था।
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महराजगंज से काटकर तिलोई विधानसभा का गठन वर्ष 1967 में हुआ था। 1967 में हुए पहले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर मो. वसी नकवी विधायक चुने गए। 1969 में भारतीय जनसंघ के टिकट पर तो 1974 में कांग्रेस के टिकट पर मोहन सिंह ने यहां का प्रतिनिधित्व किया। 1977 में कांग्रेस के ही टिकट पर मोहन सिंह फिर विधायक बने। इसके बाद 1980, 1985, 1989 और 1991 में मो. वसी नकवी तिलोई के विधायक बनतेे रहे।
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1993 में पहली बार भाजपा के टिकट पर मयंकेश्वर शरण सिंह ने इस सीट पर जीत दर्ज की। मिथक की शुरुआत भी यहीं से होती है। 1993 के बाद 1996 में भाजपा ने मयंकेश्वर को टिकट दिया। हालांकि इस चुनाव में उन्हें कांग्रेस के मो. मुस्लिम से पराजित होना पड़ा। 2002 में एक बार फिर भाजपा ने मयंकेश्वर को टिकट दिया और वे चुनाव जीतने में कामयाब रहे।
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2007 में भी मयंकेश्वर चुनाव तो जीते लेकिन सपा के टिकट पर। 2012 में मयंकेश्वर दोबारा सपा की साइकिल के सहारे मैदान में उतरे लेकिन चुनाव हार गए। इसके बाद मयंकेश्वर भाजपा में शामिल हो गए। 2017 के चुनाव में भाजपा ने फिर उन्हें अपना उम्मीदवार बनाया और उन्होंने 44 हजार से अधिक मतों से जीत दर्ज की। इस चुनाव में भाजपा ने उन पर भरोसा जताया।

पार्टी द्वारा मयंकेश्वर को टिकट मिलने के बाद से ही क्षेत्र में तीन दशक से कायम इस मिथक को लेकर लोगों में उहापोह की स्थिति थी। हालांकि बृहस्पतिवार को मयंकेश्वर की जीत का परिणाम घोषित होते ही लोगों के मन में तीन दशक से कायम यह मिथक भी टूट गया। (संवाद)
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