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Amethi News: मनुष्य को नहीं भूलना चाहिए अपना कर्म
Tue, 18 Feb 2025 12:19 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Tue, 18 Feb 2025 12:19 AM IST
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बाजारशुकुल (अमेठी)। हमारा मन और भाव निर्मल होना चाहिए। जिसके हृदय में हित की भावना होती है, उनके लिए जीवन में कभी कोई कमी नहीं होती, उसके भंडार हमेशा भरे रहते हैं। अगर किसी को दान करो तो बताओ नहीं। गुप्त दान करो और दान करके भूल जाओ। तुम्हारे दान का ध्यान तो गोविंद रखता है और उसका चार गुना फल देता है। ये बातें क्षेत्र के भटमऊ गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिन सोमवार को प्रवाचक आचार्य विपिन नंदन शुक्ला महाराज ने कहीं।
प्रवाचक ने भगवान श्रीकृष्ण व सुदामा की मित्रता प्रसंग का वर्णन करते हुए कहा कि आज की मित्रता केवल लोभ, स्वार्थ पर आधारित रह गई है। सच्चे मन से मित्रता करने वाले से भगवान भी खुश रहते हैं। कहा कि शुद्ध आचरण से की गई मित्रता का कोई मोल नहीं होता। मनुष्य को अपना कर्म नहीं भूलना चाहिए। अगर सच्चा मित्र है तो श्रीकृष्ण और सुदामा की तरह होना चाहिए।
जीवन में मनुष्य को श्रीकृष्ण की तरह अपनी मित्रता निभानी चाहिए। कहा कि सुदामा संसार में सबसे अनोखे भक्त रहे हैं। वह जीवन में जितने गरीब नजर आए, उतने वे मन से धनवान थे। उन्होंने अपने सुख व दुखों को भगवान की इच्छा पर सौंप दिया था। इस अवसर पर बृज किशोर मिश्रा, आनंद पांडेय, बृजेंद्र मिश्रा, डॉ मोनू, राम प्रवेश तिवारी आदि मौजूद रहे।
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प्रवाचक ने भगवान श्रीकृष्ण व सुदामा की मित्रता प्रसंग का वर्णन करते हुए कहा कि आज की मित्रता केवल लोभ, स्वार्थ पर आधारित रह गई है। सच्चे मन से मित्रता करने वाले से भगवान भी खुश रहते हैं। कहा कि शुद्ध आचरण से की गई मित्रता का कोई मोल नहीं होता। मनुष्य को अपना कर्म नहीं भूलना चाहिए। अगर सच्चा मित्र है तो श्रीकृष्ण और सुदामा की तरह होना चाहिए।
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जीवन में मनुष्य को श्रीकृष्ण की तरह अपनी मित्रता निभानी चाहिए। कहा कि सुदामा संसार में सबसे अनोखे भक्त रहे हैं। वह जीवन में जितने गरीब नजर आए, उतने वे मन से धनवान थे। उन्होंने अपने सुख व दुखों को भगवान की इच्छा पर सौंप दिया था। इस अवसर पर बृज किशोर मिश्रा, आनंद पांडेय, बृजेंद्र मिश्रा, डॉ मोनू, राम प्रवेश तिवारी आदि मौजूद रहे।
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