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Amethi News: सायंकालीन अदालतों का वकीलों ने किया विरोध
Wed, 09 Apr 2025 12:35 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Wed, 09 Apr 2025 12:35 AM IST
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मुसाफिरखाना में एसडीएम को ज्ञापन देते अधिवक्ता। स्रोत- स्थानीय लोग।
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मुसाफिरखाना (अमेठी)। सायंकालीन अदालतों के प्रस्ताव के विरोध में मंगलवार को बार एसोसिएशन मुसाफिरखाना के अधिवक्ताओं ने एसडीएम अभिनव कनौजिया को राज्यपाल के नाम संबोधित सात सूत्री ज्ञापन सौंपा। इस दौरान अधिवक्ताओं ने अदालतों के निर्धारित समय से इतर संचालन को अव्यावहारिक और न्याय की गुणवत्ता के लिए हानिकारक बताया।
बार एसोसिएशन के अध्यक्ष केके सिंह व महासचिव अंजनी कुमार मिश्रा के नेतृत्व में दिए ज्ञापन में कहा गया कि उच्च न्यायालय, इलाहाबाद की ओर से जिला जज सुल्तानपुर के माध्यम से भेजे गए पत्र में सायंकालीन अदालतों का प्रस्ताव रखा गया है, जो वकीलों के लिए व्यावहारिक नहीं है। अधिवक्ताओं को केस की तैयारी, अध्ययन और ड्राफ्टिंग के लिए निर्धारित समय के बाद एकांत और मानसिक एकाग्रता की आवश्यकता होती है, जो सायंकालीन अदालतों से बाधित होगी।
ज्ञापन में यह भी कहा गया कि अधिवक्ताओं का पेशा किसी फैक्टरी की तरह नहीं है, बल्कि इसमें मानसिक व शारीरिक संतुलन की जरूरत होती है। साथ ही सायं अदालतों में सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की नियुक्ति से न्याय की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो सकते हैं। सुरक्षा की दृष्टि से भी यह व्यवस्था अधिवक्ताओं व वादकारियों के लिए जोखिम भरी हो सकती है। बार एसोसिएशन ने सायंकालीन अदालतों की योजना पर तत्काल रोक लगाने की मांग करते हुए नियमित अदालतों की संख्या बढ़ाने और न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति की मांग की है। इस मौके पर सुनील मिश्रा, पवन तिवारी, सतीश सिंह, संजय शुक्ला, सुनील सिंह, श्रद्धा, सुनील श्रीवास्तव, रविनंदन पांडेय, बृजेश शुक्ल, जगदीश सरोज आदि मौजूद रहे।
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बार एसोसिएशन के अध्यक्ष केके सिंह व महासचिव अंजनी कुमार मिश्रा के नेतृत्व में दिए ज्ञापन में कहा गया कि उच्च न्यायालय, इलाहाबाद की ओर से जिला जज सुल्तानपुर के माध्यम से भेजे गए पत्र में सायंकालीन अदालतों का प्रस्ताव रखा गया है, जो वकीलों के लिए व्यावहारिक नहीं है। अधिवक्ताओं को केस की तैयारी, अध्ययन और ड्राफ्टिंग के लिए निर्धारित समय के बाद एकांत और मानसिक एकाग्रता की आवश्यकता होती है, जो सायंकालीन अदालतों से बाधित होगी।
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ज्ञापन में यह भी कहा गया कि अधिवक्ताओं का पेशा किसी फैक्टरी की तरह नहीं है, बल्कि इसमें मानसिक व शारीरिक संतुलन की जरूरत होती है। साथ ही सायं अदालतों में सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की नियुक्ति से न्याय की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो सकते हैं। सुरक्षा की दृष्टि से भी यह व्यवस्था अधिवक्ताओं व वादकारियों के लिए जोखिम भरी हो सकती है। बार एसोसिएशन ने सायंकालीन अदालतों की योजना पर तत्काल रोक लगाने की मांग करते हुए नियमित अदालतों की संख्या बढ़ाने और न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति की मांग की है। इस मौके पर सुनील मिश्रा, पवन तिवारी, सतीश सिंह, संजय शुक्ला, सुनील सिंह, श्रद्धा, सुनील श्रीवास्तव, रविनंदन पांडेय, बृजेश शुक्ल, जगदीश सरोज आदि मौजूद रहे।
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