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Amethi News: जीवन में धर्म का होना अति आवश्यक
Wed, 05 Mar 2025 12:37 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Wed, 05 Mar 2025 12:37 AM IST
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सिंहपुर के फूला गांव में श्रीमद्भागवत कथा सुनते श्रद्धालु। -आयोजक
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इन्हौना (अमेठी)। ज्ञान, भक्ति और वैराग्य से ही जीवन में आनंद की प्राप्ति हो सकती है। जीवन में धर्म का होना अति आवश्यक है। ये बातें सिंहपुर ब्लॉक क्षेत्र के फूला गांव में श्रीमद्भागवत कथा के पहले दिन प्रवाचक आचार्य कमलेश मिश्रा ने कहीं।
प्रवाचक ने कहा कि ज्ञान के साथ भक्ति जरूरी है। भक्ति से जीवन में समरसता आती है। कहा कि भगवान को केवल मन चाहिए। यह मैं हूं और यह मेरा है, वह तू है और वह तेरा है, बस यही माया है, जिसने समस्त जीवों को अपने वश में कर रखा है। उन्होंने कहा कि माया दो प्रकार की होती है। एक विद्या माया है, जो जीव को गुणों को ग्रहण करने तथा ईश्वर प्राप्ति की ओर उन्मुख होने की प्रेरणा देती है। दूसरी दोषयुक्त अविद्या माया है, जिसके वश में होकर जीव संसार रूपी कुएं में पड़कर अनेक दुख भोगता है।
प्रवाचक ने कहा कि प्राणियों को अपना मन प्रभु के चरणों में अर्पित करना चाहिए। निर्मल मन प्रभु के समीप हो जाता है। इस मौके पर राधेश्याम, सावित्री देवी, सोनू सिंह, मोनू सिंह, शैलेंद्र प्रताप सिंह, पिंकू सिंह, जितेंद्र सिंह, राम कल्प सिंह, भारत मिश्रा, निशु अवस्थी आदि मौजूद रहे।
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प्रवाचक ने कहा कि ज्ञान के साथ भक्ति जरूरी है। भक्ति से जीवन में समरसता आती है। कहा कि भगवान को केवल मन चाहिए। यह मैं हूं और यह मेरा है, वह तू है और वह तेरा है, बस यही माया है, जिसने समस्त जीवों को अपने वश में कर रखा है। उन्होंने कहा कि माया दो प्रकार की होती है। एक विद्या माया है, जो जीव को गुणों को ग्रहण करने तथा ईश्वर प्राप्ति की ओर उन्मुख होने की प्रेरणा देती है। दूसरी दोषयुक्त अविद्या माया है, जिसके वश में होकर जीव संसार रूपी कुएं में पड़कर अनेक दुख भोगता है।
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प्रवाचक ने कहा कि प्राणियों को अपना मन प्रभु के चरणों में अर्पित करना चाहिए। निर्मल मन प्रभु के समीप हो जाता है। इस मौके पर राधेश्याम, सावित्री देवी, सोनू सिंह, मोनू सिंह, शैलेंद्र प्रताप सिंह, पिंकू सिंह, जितेंद्र सिंह, राम कल्प सिंह, भारत मिश्रा, निशु अवस्थी आदि मौजूद रहे।
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