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Amethi News: प्रभु की भक्ति से ही मानव का कल्याण संभव
Wed, 05 Feb 2025 12:53 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Wed, 05 Feb 2025 12:53 AM IST
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अमेठी सिटी। श्रीमद्भागवत कथा के श्रवण से जीव को मुक्ति का मार्ग मिल जाता है। व्यक्ति को संसार से मन हटाकर परमात्मा के चरणों में लगाना चाहिए। प्रभु की भक्ति से ही मानव का कल्याण संभव है। ईश्वर की भक्ति करने का कोई समय व आयु नहीं होती है। ये बातें जामों क्षेत्र के हरगांव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन मंगलवार को प्रवाचक राजेश तिवारी निर्मोही ने कहीं।
प्रवाचक ने कहा कि ब्रह्मज्ञान की प्राप्ति के बाद हृदय से जब भक्त व भगवान का नाता जुड़ जाता है, तभी सही रूप में भक्ति की शुरुआत होती है और हमें खुद को इसी रास्ते की तरफ बढ़ाना है, जहां भक्त और भगवान का मिलन होता है। भक्ति सिर्फ एकतरफा प्यार नहीं, बल्कि ओत-प्रोत अवस्था है, जहां भगवान अपने भक्त के प्रति प्यार का भाव रखते हैं, वहीं भक्त भी अपने दिल में प्रेम भक्ति का भाव रखता है।
उन्होंने कहा कि जो फल बड़े-बड़े संन्यासियों के तप से मिलता है, वही फल भावपूर्ण होकर गृहस्थी का दैनिक कार्य करते हुए ईश्वर को याद करने से मिल सकता है। जिसमें आवश्यकता केवल प्रेम की है। ईश्वर ने मनुष्य को बनाया, सबको एक समान समझा। कहीं भेदभाव नहीं किया। कहा कि परमात्मा के साथ जुड़कर प्रेम करना ही सच्ची भक्ति है और प्रभु की भक्ति ही मानव को अंत समय में भवसागर से पार लगाती है। कथा सुनने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ जुटी रही।
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प्रवाचक ने कहा कि ब्रह्मज्ञान की प्राप्ति के बाद हृदय से जब भक्त व भगवान का नाता जुड़ जाता है, तभी सही रूप में भक्ति की शुरुआत होती है और हमें खुद को इसी रास्ते की तरफ बढ़ाना है, जहां भक्त और भगवान का मिलन होता है। भक्ति सिर्फ एकतरफा प्यार नहीं, बल्कि ओत-प्रोत अवस्था है, जहां भगवान अपने भक्त के प्रति प्यार का भाव रखते हैं, वहीं भक्त भी अपने दिल में प्रेम भक्ति का भाव रखता है।
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उन्होंने कहा कि जो फल बड़े-बड़े संन्यासियों के तप से मिलता है, वही फल भावपूर्ण होकर गृहस्थी का दैनिक कार्य करते हुए ईश्वर को याद करने से मिल सकता है। जिसमें आवश्यकता केवल प्रेम की है। ईश्वर ने मनुष्य को बनाया, सबको एक समान समझा। कहीं भेदभाव नहीं किया। कहा कि परमात्मा के साथ जुड़कर प्रेम करना ही सच्ची भक्ति है और प्रभु की भक्ति ही मानव को अंत समय में भवसागर से पार लगाती है। कथा सुनने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ जुटी रही।
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