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Amethi News: शक्ति और ऊर्जा के प्रतीक हैं गुरु गोबिंद सिंह
Tue, 07 Jan 2025 12:15 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Tue, 07 Jan 2025 12:15 AM IST
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अमेठी। खालसा पंथ के संस्थापक दसवें पातशाह श्रीगुरु गोबिंद सिंह के प्रकाश पर्व पर सोमवार को विविध कार्यक्रम हुए। बाबा मनोहर सिंह की अगुवाई में अरदास के साथ सहज पाठ के भोग पड़े व लंगर का आयोजन हुआ। सेवादारों ने रेलवे स्टेशन पर पटना साहिब जाने वाले यात्रियों को प्रसाद वितरित किया।
शहर स्थित चाणक्यपुरी मोहल्ले में सोमवार को श्रीगुरु गोबिंद सिंह जी लंगर आयोजन समिति की ओर से दसवें गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह के प्रकाश पर्व पर कार्यक्रम आयोजित हुए। सुबह से ही सेवादारों ने लंगर तैयार किया। समिति के संरक्षक पंजाब मोगा प्रांत से पधारे बाबा मनोहर सिंह की अगुवाई में अरदास के साथ सहज पाठ के भोग पड़े। आयोजित विचार गोष्ठी में श्रीगुरु गोबिंद सिंह जी के जीवन दर्शन पर वक्ताओं ने प्रकाश डाला।
गोष्ठी में डॉ. अर्जुन पांडेय ने कहा कि धर्म की रक्षा के लिए गुरुजी का असीम त्याग है, जिसे संसार सदैव याद रखेगा। गुरु गोबिंद सिंह शक्ति और ऊर्जा के प्रतीक हैं। गुरु गोबिंद सिंह जी ने शौर्य, धर्मनिष्ठ जीवन की शिक्षा दी है। अंबरीष मिश्र ने कहा कि धर्म की रक्षा के लिए जितना बड़ा बलिदान श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने दिया है वह अन्यत्र दुर्लभ है। मानवता की सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है।
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खालसा पंथ के माध्यम से गुरु गोबिंद सिंह ने अत्याचारों के खिलाफ जनमानस को खड़ा करने के साथ हिंदू धर्म की रक्षा में सबसे बड़ा बलिदान दिया। वे एक महान संत और धर्मरक्षक के साथ महान योद्धा भी थे। सदाशिव पांडेय ने गुरु गोबिंद सिंह के जन्म, उनके जीवन और मुगलों की ओर से जबरन धर्म परिवर्तन कराए जाने के विरुद्ध उनके संघर्ष का उल्लेख किया, कहा कि हिंदू धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए उन्होंने अपने चार पुत्रों का बलिदान कर दिया।
सरदार हरिवंश सिंह ने कहा कि गुरु गोबिंद सिंह ने धर्म की रक्षा के लिए पुत्र मोह को त्याग दिया और खालसा पंथ के माध्यम से मुगल शासक औरंगजेब को करारा जवाब दिया। इस मौके पर श्रीनाथ शुक्ल, हरिशंकर मिश्र, दुर्गा प्रसाद मिश्र, सुनील त्रिपाठी, गुरुविंदर सिंह, रोहित, सरवन कुमार, साधना त्रिपाठी, बबलू तिवारी, प्रमोद कुमार, हर्ष अग्रहरि, आदित्य, अरुण कुमार, वीरेंद्र आदि मौजूद रहे।
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शहर स्थित चाणक्यपुरी मोहल्ले में सोमवार को श्रीगुरु गोबिंद सिंह जी लंगर आयोजन समिति की ओर से दसवें गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह के प्रकाश पर्व पर कार्यक्रम आयोजित हुए। सुबह से ही सेवादारों ने लंगर तैयार किया। समिति के संरक्षक पंजाब मोगा प्रांत से पधारे बाबा मनोहर सिंह की अगुवाई में अरदास के साथ सहज पाठ के भोग पड़े। आयोजित विचार गोष्ठी में श्रीगुरु गोबिंद सिंह जी के जीवन दर्शन पर वक्ताओं ने प्रकाश डाला।
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गोष्ठी में डॉ. अर्जुन पांडेय ने कहा कि धर्म की रक्षा के लिए गुरुजी का असीम त्याग है, जिसे संसार सदैव याद रखेगा। गुरु गोबिंद सिंह शक्ति और ऊर्जा के प्रतीक हैं। गुरु गोबिंद सिंह जी ने शौर्य, धर्मनिष्ठ जीवन की शिक्षा दी है। अंबरीष मिश्र ने कहा कि धर्म की रक्षा के लिए जितना बड़ा बलिदान श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने दिया है वह अन्यत्र दुर्लभ है। मानवता की सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है।
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खालसा पंथ के माध्यम से गुरु गोबिंद सिंह ने अत्याचारों के खिलाफ जनमानस को खड़ा करने के साथ हिंदू धर्म की रक्षा में सबसे बड़ा बलिदान दिया। वे एक महान संत और धर्मरक्षक के साथ महान योद्धा भी थे। सदाशिव पांडेय ने गुरु गोबिंद सिंह के जन्म, उनके जीवन और मुगलों की ओर से जबरन धर्म परिवर्तन कराए जाने के विरुद्ध उनके संघर्ष का उल्लेख किया, कहा कि हिंदू धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए उन्होंने अपने चार पुत्रों का बलिदान कर दिया।
सरदार हरिवंश सिंह ने कहा कि गुरु गोबिंद सिंह ने धर्म की रक्षा के लिए पुत्र मोह को त्याग दिया और खालसा पंथ के माध्यम से मुगल शासक औरंगजेब को करारा जवाब दिया। इस मौके पर श्रीनाथ शुक्ल, हरिशंकर मिश्र, दुर्गा प्रसाद मिश्र, सुनील त्रिपाठी, गुरुविंदर सिंह, रोहित, सरवन कुमार, साधना त्रिपाठी, बबलू तिवारी, प्रमोद कुमार, हर्ष अग्रहरि, आदित्य, अरुण कुमार, वीरेंद्र आदि मौजूद रहे।