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Amethi News: गोकुलवासियों का सच्चा रक्षक है गोवर्धन पर्वत
Fri, 13 Jun 2025 12:50 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Fri, 13 Jun 2025 12:50 AM IST
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-पूरे वक्तावर पेंडारा में श्रीमद्भागवत कथा सुनते श्रद्धालु। स्रोत- आयोजक
सिंहपुर (अमेठी)। पूरे बक्तावर मजरे पेंडारा में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में बृहस्पतिवार को रायबरेली से पधारे प्रवाचक आचार्य अखिलेश्वरानंद ने गोवर्धन पूजा के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि एक बार गोकुलवासियों ने इंद्रदेव की पूजा का आयोजन किया तो भगवान कृष्ण ने इसकी वजह पूछी।
इस पर गोकुलवासियों ने बताया कि इंद्र वर्षा के देवता हैं और उनकी कृपा से ही कृषि सफल होती है। श्रीकृष्ण ने उन्हें समझाया कि वर्षा प्रकृति का नियम है और गोवर्धन पर्वत ही उनका सच्चा रक्षक है जो पशु-पक्षियों को चारा, जल और आश्रय देता है। उन्होंने इंद्र पूजा की बजाय गोवर्धन पर्वत की पूजा करने को कहा। गोकुलवासियों ने श्रीकृष्ण की बात मानकर गोवर्धन की पूजा की।
यह देख इंद्र क्रोधित हो गए और गोकुल में तेज वर्षा शुरू कर दी। तब श्रीकृष्ण ने अपनी छोटी अंगुली पर गोवर्धन पर्वत को उठा लिया और सभी लोगों को उसके नीचे सुरक्षित आश्रय दिया। सात दिन तक लगातार वर्षा होती रही, लेकिन श्रीकृष्ण के संरक्षण में कोई हानि नहीं हुई। अंततः इंद्र ने अपनी गलती स्वीकार कर भगवान श्रीकृष्ण की स्तुति की, तभी से गोवर्धन पूजा की जाती है।
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इस दिन गोबर से गोवर्धन की आकृति बनाकर उसकी पूजा की जाती है और अन्नकूट का आयोजन होता है, जिसमें अनेक प्रकार के पकवान बनाए जाते हैं। इस दौरान यजमान रामबरन साहू, नीरज शुक्ला, आयोजक वासुदेव सिंह, जगदीश महराज, जन्मेजय सिंह, अनिरुद्ध सिंह, देव नारायण यादव, गौरी शंकर साहू आदि मौजूद रहे।
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इस पर गोकुलवासियों ने बताया कि इंद्र वर्षा के देवता हैं और उनकी कृपा से ही कृषि सफल होती है। श्रीकृष्ण ने उन्हें समझाया कि वर्षा प्रकृति का नियम है और गोवर्धन पर्वत ही उनका सच्चा रक्षक है जो पशु-पक्षियों को चारा, जल और आश्रय देता है। उन्होंने इंद्र पूजा की बजाय गोवर्धन पर्वत की पूजा करने को कहा। गोकुलवासियों ने श्रीकृष्ण की बात मानकर गोवर्धन की पूजा की।
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यह देख इंद्र क्रोधित हो गए और गोकुल में तेज वर्षा शुरू कर दी। तब श्रीकृष्ण ने अपनी छोटी अंगुली पर गोवर्धन पर्वत को उठा लिया और सभी लोगों को उसके नीचे सुरक्षित आश्रय दिया। सात दिन तक लगातार वर्षा होती रही, लेकिन श्रीकृष्ण के संरक्षण में कोई हानि नहीं हुई। अंततः इंद्र ने अपनी गलती स्वीकार कर भगवान श्रीकृष्ण की स्तुति की, तभी से गोवर्धन पूजा की जाती है।
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इस दिन गोबर से गोवर्धन की आकृति बनाकर उसकी पूजा की जाती है और अन्नकूट का आयोजन होता है, जिसमें अनेक प्रकार के पकवान बनाए जाते हैं। इस दौरान यजमान रामबरन साहू, नीरज शुक्ला, आयोजक वासुदेव सिंह, जगदीश महराज, जन्मेजय सिंह, अनिरुद्ध सिंह, देव नारायण यादव, गौरी शंकर साहू आदि मौजूद रहे।